हरिद्वार में भीषण गर्मी का असर: स्कूल समय बदलने की मांग तेज, बच्चों की सेहत को लेकर शिक्षक संघ चिंतित
हरिद्वार, उत्तराखण्ड में बढ़ती गर्मी और संभावित हीटवेव को लेकर अब शिक्षा व्यवस्था पर भी असर दिखने लगा है। जनपद हरिद्वार में जूनियर हाई स्कूल (पूर्व माध्यमिक) शिक्षक संघ ने स्कूलों के समय में बदलाव की मांग उठाई है, ताकि छात्र-छात्राओं को भीषण गर्मी से बचाया जा सके।
43 डिग्री तक पहुंच सकता है तापमान
शिक्षक संघ द्वारा मुख्य शिक्षा अधिकारी को भेजे गए पत्र में बताया गया है कि (IMD) देहरादून की 21 अप्रैल 2026 की चेतावनी के अनुसार अप्रैल महीने में तापमान 43 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की संभावना है। ऐसे में छोटे बच्चों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा सकता है।
सुबह की शिफ्ट में स्कूल चलाने की मांग
संघ ने मांग की है कि हरिद्वार जिले में भी स्कूलों का समय बदलकर सुबह 7:30 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक किया जाए। यह कदम बच्चों को तेज धूप और लू के प्रभाव से बचाने के लिए जरूरी बताया गया है।
दूसरे जिलों में लागू हो चुका फैसला
पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि जिले में जिला प्रशासन ने पहले ही स्कूल समय में बदलाव लागू कर दिया है। इससे हरिद्वार में भी समान व्यवस्था लागू करने की मांग को बल मिला है।
महानिदेशक का स्पष्ट निर्देश
इस मुद्दे पर की महानिदेशक दीप्ति सिंह द्वारा 21 अप्रैल 2026 को जारी निर्देश भी महत्वपूर्ण हैं। निर्देश में कहा गया है कि:
- स्कूलों में नियमित वॉटर बेल बजाई जाए
- सभी छात्रों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराया जाए
- जरूरत पड़ने पर स्कूल समय में बदलाव किया जा सकता है
- कक्षाओं में वेंटिलेशन, ORS और दवाइयों की व्यवस्था हो
- छात्रों को हीटवेव से बचाव की जानकारी दी जाए
- तेज धूप में खेल-कूद गतिविधियों पर रोक लगाई जाए
- हर स्कूल में हीटवेव एक्शन प्लान तैयार किया जाए
शिक्षक संघ का आग्रह
जिला अध्यक्ष पवन सैनी और जिला महामंत्री किरतपाल सिंह ने संयुक्त रूप से प्रशासन से अपील की है कि बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए जल्द निर्णय लिया जाए।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चेतावनी
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि अत्यधिक गर्मी में बच्चों में डिहाइड्रेशन, हीट स्ट्रोक और थकान जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ सकती हैं। ऐसे में स्कूल टाइमिंग में बदलाव एक जरूरी एहतियाती कदम हो सकता है।
हरिद्वार में बढ़ती गर्मी के बीच स्कूल समय बदलने की मांग अब गंभीर मुद्दा बनती जा रही है। प्रशासन के सामने चुनौती है कि वह समय रहते निर्णय लेकर बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करे। अगर जल्द फैसला नहीं लिया गया, तो आने वाले दिनों में समस्या और गंभीर हो सकती है।



