CDSCO का बड़ा कदम: नकली और घटिया दवाओं पर शिकंजा कसने के लिए बदले नियम, अब हर बैच की होगी सख्त निगरानी

CDSCO का बड़ा कदम: नकली और घटिया दवाओं पर शिकंजा कसने के लिए बदले नियम, अब हर बैच की होगी सख्त निगरानी

नई दिल्ली। देश में नकली (Spurious) और मानक गुणवत्ता से कम (Not of Standard Quality – NSQ) दवाओं के बढ़ते मामलों के बीच भारत के केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने दवा निगरानी व्यवस्था को और अधिक सख्त बनाने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाया है। CDSCO ने वर्ष 2024 से लागू दवाओं, कॉस्मेटिक्स और मेडिकल डिवाइस के सैंपलिंग एवं रिपोर्टिंग संबंधी दिशानिर्देशों में व्यापक संशोधन करते हुए नई रिपोर्टिंग प्रणाली लागू कर दी है।

इस बदलाव का उद्देश्य बाजार में बिक रही दवाओं की गुणवत्ता पर अधिक प्रभावी निगरानी रखना, नकली दवा नेटवर्क की पहचान करना और आम जनता को समय पर चेतावनी देना है। विशेषज्ञों का मानना है कि नए नियम दवा उद्योग में पारदर्शिता बढ़ाने और मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकते हैं।

अब रिपोर्ट में दर्ज होगी हर महत्वपूर्ण जानकारी

संशोधित दिशा-निर्देशों के तहत ड्रग इंस्पेक्टरों को NSQ दवाओं की रिपोर्टिंग के दौरान पहले से कहीं अधिक विस्तृत जानकारी देनी होगी। अब रिपोर्ट में उत्पाद का प्रकार, ब्रांड नाम, दवा का नाम, डोज फॉर्म, उपयोग का तरीका, निर्माता का नाम, निर्माण इकाई का पूरा विवरण, निर्माण राज्य, निर्माण तिथि, एक्सपायरी तिथि, रिपोर्टिंग स्रोत, रिपोर्टिंग माह और वर्ष, बैच नंबर तथा फेल होने का कारण भी शामिल करना अनिवार्य होगा।

पहले की व्यवस्था में केवल दवा का नाम, बैच नंबर, निर्माण और समाप्ति तिथि तथा निर्माता की जानकारी ही दर्ज की जाती थी। नई प्रणाली से संदिग्ध दवाओं की ट्रैकिंग अधिक आसान हो जाएगी और किसी भी गुणवत्ता संबंधी समस्या की जड़ तक पहुंचना संभव होगा।

हर महीने सार्वजनिक होंगे NSQ अलर्ट

CDSCO ने स्पष्ट किया है कि राज्य और केंद्रीय प्रयोगशालाओं से प्राप्त NSQ रिपोर्टों को निर्धारित एक्सेल प्रारूप में हर महीने की 10 तारीख तक भेजना होगा। इन रिपोर्टों को बाद में CDSCO की वेबसाइट पर “Drug/Device/Cosmetic NSQ Alert” के रूप में सार्वजनिक किया जाएगा।

इसका उद्देश्य डॉक्टरों, फार्मासिस्टों, अस्पतालों, वितरकों और आम नागरिकों को उन दवा बैचों की जानकारी देना है जो गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे हैं।

नकली दवाओं की पहचान के लिए भी नया प्रारूप

स्प्यूरियस (नकली) दवाओं की रिपोर्टिंग के लिए भी नया प्रारूप लागू किया गया है। पहले रिपोर्ट में उस वास्तविक कंपनी का नाम भी शामिल किया जाता था जिसकी दवा की नकल की गई थी। अब संशोधित प्रारूप में “Manufactured By” कॉलम रखा गया है, जिसमें यह उल्लेख किया जाएगा कि नकली दवा के वास्तविक निर्माता की जांच जारी है।

इसके साथ ही रिपोर्ट में अब दवा के फेल होने का कारण, नमूना लेने वाले अधिकारी का नाम, संबंधित फर्म का जवाब और नियामक टिप्पणियां भी दर्ज की जाएंगी।

हालांकि नई व्यवस्था में उन बिक्री केंद्रों और फार्मेसियों की जानकारी देने की बाध्यता हटा दी गई है जहां से नकली दवाओं का वितरण किया गया था। इस बदलाव को लेकर कुछ विशेषज्ञों ने चिंता भी व्यक्त की है।

क्या होती है स्प्यूरियस (नकली) दवा?

संशोधित दिशानिर्देशों में नकली दवा की परिभाषा को भी स्पष्ट किया गया है।

किसी दवा को स्प्यूरियस माना जाएगा यदि:

  • वह किसी अन्य दवा के नाम से बनाई गई हो।
  • किसी प्रसिद्ध ब्रांड की नकल या उसका विकल्प बनाकर बेची जा रही हो।
  • लेबल या पैकेजिंग इस प्रकार बनाई गई हो कि उपभोक्ता को भ्रमित किया जा सके।
  • पैकेट पर ऐसी कंपनी या व्यक्ति का नाम हो जो वास्तव में अस्तित्व में ही नहीं है।
  • असली दवा में किसी अन्य पदार्थ की मिलावट या प्रतिस्थापन किया गया हो।
  • दवा किसी ऐसी कंपनी का उत्पाद बताई जा रही हो जिसने वास्तव में उसका निर्माण नहीं किया है।

देशभर में बढ़े NSQ मामलों ने बढ़ाई चिंता

CDSCO द्वारा जारी आंकड़े बताते हैं कि देश में NSQ दवाओं के मामलों में पिछले वर्ष के मुकाबले भारी वृद्धि दर्ज की गई है।

वर्ष 2024 में जहां कुल 877 दवा नमूने NSQ पाए गए थे, वहीं वर्ष 2025 में यह संख्या बढ़कर 1,879 तक पहुंच गई। यानी केवल एक वर्ष में ऐसे मामलों में दो गुना से अधिक वृद्धि दर्ज की गई।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि वर्ष 2025 में रिपोर्ट किए गए 1,879 NSQ नमूनों में से 1,163 नमूने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से आए। यह कुल मामलों का लगभग 62 प्रतिशत है। जबकि 2024 में राज्यों का योगदान केवल 39 प्रतिशत था।

विशेषज्ञों का कहना है कि इसका अर्थ यह नहीं है कि दवाओं की गुणवत्ता अचानक खराब हो गई है, बल्कि अब राज्य दवा नियामक एजेंसियां अधिक सक्रियता से सैंपलिंग और रिपोर्टिंग कर रही हैं।

जन स्वास्थ्य सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम

स्वास्थ्य क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि भारत दुनिया के सबसे बड़े दवा उत्पादक देशों में से एक है। ऐसे में गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली का मजबूत होना बेहद जरूरी है।

नए नियमों के माध्यम से CDSCO न केवल नकली और घटिया दवाओं की पहचान तेजी से कर सकेगा, बल्कि पूरे वितरण नेटवर्क की निगरानी भी अधिक प्रभावी ढंग से कर पाएगा। इससे मरीजों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण दवाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

CDSCO द्वारा लागू की गई नई रिपोर्टिंग व्यवस्था भारत की दवा निगरानी प्रणाली को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और तकनीकी रूप से मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। बढ़ते NSQ और नकली दवाओं के मामलों के बीच यह पहल आम जनता के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए बेहद अहम मानी जा रही है। आने वाले समय में इन नियमों के प्रभाव से नकली दवा कारोबार पर बड़ी चोट पड़ने और दवा उद्योग में गुणवत्ता मानकों के पालन को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।

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