उत्तराखंड में स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ा बदलाव: अब जिला अस्पतालों में नहीं रुकेगा इलाज
देहरादून :- उत्तराखंड सरकार ने राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने के लिए एक बड़ा और व्यावहारिक कदम उठाया है। स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल के निर्देश पर अब जिला अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी के कारण मरीजों का इलाज नहीं रुकेगा। इसके लिए सरकार ने एक नया पब्लिक-प्राइवेट सहयोग (PPP) मॉडल तैयार किया है, जिसमें जरूरत पड़ने पर निजी अस्पतालों के विशेषज्ञ डॉक्टरों की सेवाएं ली जाएंगी।
क्या है नया मॉडल और कैसे करेगा काम?
राज्य के कई जिला अस्पताल लंबे समय से स्पेशलिस्ट और सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की कमी से जूझ रहे हैं। इसका परिणाम यह होता था कि मरीजों को देहरादून, हल्द्वानी जैसे बड़े शहरों या हायर सेंटर रेफर करना पड़ता था।
अब नई व्यवस्था के तहत:
- संबंधित बीमारी के विशेषज्ञ डॉक्टर निजी अस्पतालों से बुलाए जाएंगे
- जिला अस्पतालों में ही सर्जरी और इलाज कराया जाएगा
- डॉक्टरों को विजिट और सर्जरी के आधार पर भुगतान किया जाएगा
इससे मरीजों को स्थानीय स्तर पर ही बेहतर इलाज मिल सकेगा और समय व पैसे दोनों की बचत होगी।
आयुष्मान योजना के मरीजों को सबसे बड़ा फायदा
इस नई व्यवस्था का सबसे ज्यादा लाभ आयुष्मान भारत योजना के लाभार्थियों को मिलेगा।
- मरीजों को इधर-उधर भटकना नहीं पड़ेगा
- अपने ही जिले में फ्री या किफायती इलाज मिलेगा
- गंभीर बीमारियों का इलाज भी अब स्थानीय स्तर पर संभव होगा
‘यू कोट, वी पे’ योजना के बावजूद क्यों बनी रही कमी?
राज्य में पहले से चल रही यू कोट वी पे योजना के तहत डॉक्टरों को उनकी मांग के अनुसार वेतन देने की व्यवस्था है।
इसके बावजूद इन विभागों में कमी बनी हुई है:
- न्यूरोलॉजी
- कार्डियोलॉजी
- रेडियोलॉजी
- गायनी
- एनेस्थीसिया
नई PPP व्यवस्था इस कमी को तुरंत भरने की कोशिश है।
पहाड़ी इलाकों के लिए खास योजना
सरकार ने दूरस्थ क्षेत्रों के लिए एक और महत्वपूर्ण निर्णय लिया है:
- मैदान क्षेत्रों के विशेषज्ञ डॉक्टरों को 6 महीने के लिए पहाड़ी जिलों में भेजा जाएगा
- यह प्रक्रिया स्वेच्छा (voluntary basis) पर आधारित होगी
- इससे पहाड़ों में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता बेहतर होगी
दून मेडिकल कॉलेज में सस्ती जांच की सुविधा
दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल में मरीजों को राहत देने के लिए 17 तरह के किफायती हेल्थ पैकेज शुरू किए गए हैं:
- मिनी हेल्थ चेकअप – ₹610
- हार्ट चेकअप – ₹828
- फीवर प्रोफाइल – ₹971
- डायबिटीज प्रोफाइल – ₹1207
- फुल बॉडी चेकअप – ₹2009
खास बातें:
- निजी लैब के मुकाबले 2–3 गुना सस्ते
- बिना डॉक्टर की पर्ची के भी जांच संभव
- समय: सुबह 9 बजे से दोपहर 3 बजे तक
सरकार की आगे की योजना
सीएमओ डॉ. मनोज शर्मा के अनुसार:
- विशेषज्ञ डॉक्टरों की विजिट फीस जल्द तय की जाएगी
- इसके बाद यह मॉडल पूरी तरह लागू कर दिया जाएगा
क्या होगा असर?
अगर यह मॉडल सही तरीके से लागू हुआ, तो:
- जिला अस्पतालों पर भरोसा बढ़ेगा
- रेफरल केस कम होंगे
- पहाड़ी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं मजबूत होंगी
- गरीब और आयुष्मान मरीजों को सीधा लाभ मिलेगा
हालांकि, सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि:
- निजी डॉक्टर कितनी संख्या में उपलब्ध होते हैं
- भुगतान प्रणाली कितनी पारदर्शी रहती है
- प्रशासनिक समन्वय कितना मजबूत होता है



