नकली दवा का बड़ा भंडाफोड़: ₹56 लाख के फर्जी इंजेक्शन जब्त

 नकली दवा का बड़ा भंडाफोड़: ₹56 लाख के फर्जी इंजेक्शन जब्त

गुरुग्राम, हरियाणा के गुरुग्राम से स्वास्थ्य सुरक्षा से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है। ड्रग कंट्रोल विभाग ने कार्रवाई करते हुए डायबिटीज की दवा के नाम पर बेचे जा रहे नकली इंजेक्शनों के एक बड़े नेटवर्क का खुलासा किया है। इस कार्रवाई में करीब ₹56.15 लाख कीमत के फर्जी इंजेक्शन जब्त किए गए हैं। ये इंजेक्शन के नाम पर बाजार में बेचे जा रहे थे।


सूचना के आधार पर शुरू हुई कार्रवाई

अधिकारियों को सूचना मिली थी कि गुरुग्राम के कुछ इलाकों में एंटी-डायबिटीज इंजेक्शन संदिग्ध तरीके से बेचे जा रहे हैं। इसके बाद ड्रग कंट्रोल टीम ने निगरानी शुरू की। Super Mart-1 और DLF Phase-4 इलाके में नजर रखी गई। इसी दौरान एक संदिग्ध कार को रोका गया, जिसमें नकली दवाओं का स्टॉक मिला।


दो आरोपी गिरफ्तार

जांच के दौरान दो लोगों को हिरासत में लिया गया। इनमें एक व्यक्ति मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव बताया जा रहा है, जबकि दूसरा इस पूरे नेटवर्क का मुख्य संचालक माना जा रहा है। पूछताछ में दोनों आरोपियों के पास दवा बेचने या रखने का कोई वैध लाइसेंस नहीं मिला। इसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।


अलग-अलग डोज में नकली इंजेक्शन

अधिकारियों ने बताया कि जब्त किए गए इंजेक्शन अलग-अलग मात्रा (डोज) में थे, जिनमें 2.5 मिलीग्राम से लेकर 15 मिलीग्राम तक शामिल है। इससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि यह नेटवर्क लंबे समय से सक्रिय था और अलग-अलग जरूरत वाले मरीजों को निशाना बना रहा था।


स्टोरेज नियमों का उल्लंघन

जांच में यह भी सामने आया कि इन इंजेक्शनों को सही तापमान पर नहीं रखा गया था। इस तरह की दवाओं को 2 से 8 डिग्री सेल्सियस के बीच रखना जरूरी होता है। लेकिन बरामद स्टॉक सामान्य तापमान पर रखा गया था। इससे दवा की गुणवत्ता और असर दोनों खत्म हो सकते हैं, जो मरीजों के लिए खतरनाक है।


मशहूर कंपनी की नकल

प्रारंभिक जांच में पता चला है कि ये नकली इंजेक्शन अंतरराष्ट्रीय फार्मा कंपनी की असली दवा की नकल थे। भारत में इस दवा को अधिकृत कंपनी के जरिए आयात और बेचा जाता है, लेकिन जब्त किया गया स्टॉक किसी भी अधिकृत चैनल से नहीं खरीदा गया था। अधिकारियों का कहना है कि यह नकली दवा स्थानीय स्तर पर तैयार की गई थी।


ऐसे हुई नकली दवा की पहचान

ड्रग कंट्रोल टीम ने पैकेजिंग और लेबल की जांच के दौरान कई गड़बड़ियां पकड़ीं। इनमें फॉन्ट साइज में अंतर, स्टोरेज निर्देशों की कमी, कंपनी के नाम में गलतियां और पैकेजिंग की खराब गुणवत्ता शामिल हैं। इन आधारों पर दवाओं को फर्जी घोषित किया गया।


कानूनी कार्रवाई शुरू

पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ के तहत मामला दर्ज किया है। आरोपियों पर नकली दवा बनाने, बिना लाइसेंस बेचने और अवैध रूप से भंडारण करने के आरोप लगाए गए हैं। जब्त दवाओं के सैंपल को जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा गया है।


मरीजों के लिए बड़ा खतरा

विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की नकली दवाएं मरीजों के लिए बेहद खतरनाक होती हैं। डायबिटीज जैसी बीमारी में सही दवा का समय पर लेना जरूरी होता है। अगर मरीज नकली इंजेक्शन का उपयोग करता है, तो उसकी बीमारी नियंत्रित नहीं होगी और स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है। कुछ मामलों में साइड इफेक्ट या जान का खतरा भी हो सकता है।


बढ़ती मांग का फायदा उठा रहे गिरोह

जानकारी के अनुसार, डायबिटीज और वजन कम करने वाली दवाओं की मांग तेजी से बढ़ रही है। इसी का फायदा उठाकर कुछ गिरोह नकली दवाओं का कारोबार कर रहे हैं। महंगी दवाओं की नकल कर उन्हें सस्ते या समान दाम पर बेचकर लोगों को ठगा जा रहा है।


जांच जारी, और खुलासे संभव

ड्रग विभाग अब इस मामले की गहराई से जांच कर रहा है। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि यह नेटवर्क केवल गुरुग्राम तक सीमित है या अन्य शहरों में भी फैला हुआ है। साथ ही यह भी जांच हो रही है कि इस गिरोह में और कौन-कौन लोग शामिल हैं।

यह मामला दिखाता है कि नकली दवाओं का कारोबार कितना खतरनाक रूप ले चुका है। स्वास्थ्य से जुड़ी चीजों में लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है। ऐसे में लोगों को दवा खरीदते समय सतर्क रहने और केवल अधिकृत दुकानों से ही दवा लेने की सलाह दी जा रही है।

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