मेडिकल स्टोर की आड़ में नशे का काला कारोबार! हरिद्वार पुलिस ने 1680 नशीली गोलियां-कैप्सूल के साथ दो तस्करों को दबोचा, हरिद्वार ड्रग विभाग की निगरानी पर भी उठे सवाल

मेडिकल स्टोर की आड़ में नशे का काला कारोबार! हरिद्वार पुलिस ने 1680 नशीली गोलियां-कैप्सूल के साथ दो तस्करों को दबोचा, हरिद्वार ड्रग विभाग की निगरानी पर भी उठे सवाल

‘ऑपरेशन प्रहार-2026’ के तहत बड़ी कार्रवाई, सिडकुल क्षेत्र में मजदूरों को सप्लाई की आशंका; पुलिस के शिकंजे के बाद ड्रग विभाग की जांच पर निगाहें

हरिद्वार। धर्मनगरी हरिद्वार में नशीली दवाओं के बढ़ते अवैध कारोबार के खिलाफ चल रही मुहिम के बीच बहादराबाद पुलिस ने एक ऐसी कार्रवाई को अंजाम दिया है जिसने न केवल नशे के नेटवर्क की परतें खोल दी हैं, बल्कि दवाओं की निगरानी व्यवस्था और ड्रग विभाग की कार्यप्रणाली पर भी कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस ने दो आरोपितों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से 1680 नशीली गोलियां और कैप्सूल बरामद किए हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि पूछताछ में आरोपितों ने खुद को मेडिकल स्टोर से जुड़ा बताया है।

उत्तराखंड पुलिस मुख्यालय द्वारा संचालित “ऑपरेशन प्रहार-2026” के तहत वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक हरिद्वार के निर्देशन में जिलेभर में नशे, अवैध शराब, मादक पदार्थों, जुआ और सट्टे के खिलाफ विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में प्रभारी निरीक्षक कोतवाली बहादराबाद के नेतृत्व में गठित पुलिस टीम ने 29 जून को गश्त और चेकिंग के दौरान पीपल चौक से आगे नहर पटरी मार्ग पर एक संदिग्ध बलिनो कार को रोककर तलाशी ली।

तलाशी के दौरान पुलिस को वाहन से भारी मात्रा में प्रतिबंधित और नशीली दवाएं मिलीं। बरामद दवाओं में ट्रामाडोल युक्त PROXIOHM-SPAS के 480 कैप्सूल तथा अल्प्राजोलम 0.5 एमजी की 1200 टैबलेट शामिल हैं। मौके से पुलिस ने दो आरोपितों इस्लाम पुत्र शादी और सद्दाम पुत्र रियाज, निवासी ग्राम गढ़, रानीपुर को गिरफ्तार कर लिया।

पूछताछ में आरोपितों ने जो खुलासा किया, उसने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया। आरोपितों ने बताया कि उनका सिडकुल क्षेत्र में मेडिकल स्टोर है और वहां कार्यरत मजदूरों के बीच नशीली दवाओं की मांग अधिक होने के कारण उन्होंने लालच में आकर इस कारोबार में कदम रखा। पुलिस ने दोनों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश शुरू कर दी है।

नशे का नया चेहरा: मेडिकल स्टोर से सड़क तक

हरिद्वार में अब तक नशे की तस्करी के मामलों में स्मैक, चरस, गांजा और अवैध शराब की बरामदगी की खबरें सामने आती रही हैं, लेकिन इस मामले ने यह संकेत दिया है कि नशीली दवाओं के जरिए भी युवाओं और मजदूर वर्ग को नशे की गिरफ्त में धकेला जा रहा है। ट्रामाडोल और अल्प्राजोलम जैसी दवाएं चिकित्सकीय उपयोग के लिए निर्धारित हैं, लेकिन इनका दुरुपयोग नशे के रूप में किया जाना लंबे समय से चिंता का विषय रहा है।

विशेषज्ञों के अनुसार ऐसी दवाओं की अनियंत्रित बिक्री व्यक्ति को मानसिक और शारीरिक रूप से गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है। यही कारण है कि इन दवाओं की खरीद, भंडारण और बिक्री के लिए कड़े नियम बनाए गए हैं।

ड्रग विभाग की निगरानी पर उठे बड़े सवाल

पुलिस कार्रवाई के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यदि आरोपित वास्तव में मेडिकल स्टोर संचालित करते हैं, तो इतनी बड़ी मात्रा में नशीली दवाएं उनके पास कैसे पहुंचीं? क्या इन दवाओं का स्टॉक वैध रूप से खरीदा गया था? यदि हां, तो उनका रिकॉर्ड कहां है? और यदि नहीं, तो सप्लाई चेन में कौन-कौन लोग शामिल हैं?

मामले ने हरिद्वार के ड्रग विभाग की निगरानी व्यवस्था को भी कटघरे में खड़ा कर दिया है। दवा कारोबार से जुड़े जानकारों का कहना है कि ट्रामाडोल और अल्प्राजोलम जैसी नियंत्रित दवाओं की बिक्री का पूरा रिकॉर्ड रखा जाना अनिवार्य होता है। ऐसे में यह जांच का विषय है कि संबंधित मेडिकल स्टोर के स्टॉक रजिस्टर, खरीद-बिक्री दस्तावेज और लाइसेंस संबंधी रिकॉर्ड नियमों के अनुरूप हैं या नहीं।

यह भी सवाल उठ रहा है कि संबंधित मेडिकल स्टोर का आखिरी निरीक्षण कब किया गया था और क्या निरीक्षण के दौरान किसी प्रकार की अनियमितता सामने आई थी। यदि रिकॉर्ड में गड़बड़ी मिलती है तो ड्रग विभाग के पास लाइसेंस निलंबित करने से लेकर निरस्त करने तक की कार्रवाई का अधिकार है।

सप्लाई चेन की जांच होगी अहम

पुलिस सूत्रों के अनुसार अब जांच का फोकस केवल बरामद दवाओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह पता लगाने का प्रयास किया जाएगा कि ये दवाएं कहां से खरीदी गईं, किस वितरक या सप्लायर के माध्यम से आरोपितों तक पहुंचीं और इनकी बिक्री किन-किन लोगों को की जा रही थी। जांच में यदि कोई बड़ा नेटवर्क सामने आता है तो कई अन्य लोगों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

नशे के खिलाफ लगातार जारी है अभियान

हरिद्वार पुलिस ने स्पष्ट किया है कि जिले में नशीली दवाओं, मादक पदार्थों और अवैध नशे के कारोबार के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा। ऑपरेशन प्रहार-2026 के तहत पुलिस की टीमें लगातार चेकिंग और निगरानी कर रही हैं तथा युवाओं को नशे के जाल से बचाने के लिए सख्त कार्रवाई की जा रही है।

इस कार्रवाई को अंजाम देने वाली पुलिस टीम में उपनिरीक्षक विकास रावत, कांस्टेबल वीरेन्द्र सिंह, कांस्टेबल सतेन्द्र चौधरी और कांस्टेबल बलवन्त सिंह शामिल रहे।

हरिद्वार पुलिस की इस कार्रवाई ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि नशे का कारोबार अब केवल तस्करों तक सीमित नहीं है, बल्कि कुछ लोग चिकित्सा व्यवस्था और मेडिकल स्टोर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों का भी दुरुपयोग कर रहे हैं। ऐसे में पुलिस जांच के साथ-साथ ड्रग विभाग की कार्रवाई भी बेहद महत्वपूर्ण होगी। यदि समय रहते पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश नहीं हुआ तो नशीली दवाओं का यह कारोबार समाज, खासकर युवाओं और मजदूर वर्ग के लिए बड़ा खतरा बन सकता है।

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