फर्जी डेटा देने वाली दवा कंपनियों पर केंद्र का बड़ा प्रहार, लाइसेंस के साथ भविष्य के आवेदन पर भी लगेगी रोक

फर्जी डेटा देने वाली दवा कंपनियों पर केंद्र का बड़ा प्रहार, लाइसेंस के साथ भविष्य के आवेदन पर भी लगेगी रोक

नई दिल्ली।  देश में दवा कंपनियों की जवाबदेही तय करने और मरीजों तक सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण दवाएं पहुंचाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने बड़ा नियामकीय बदलाव किया है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने ड्रग्स रूल्स, 1945 में संशोधन करते हुए ऐसे आवेदकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का रास्ता साफ कर दिया है, जो लाइसेंस या नियामकीय मंजूरी प्राप्त करने के लिए फर्जी, मनगढ़ंत या भ्रामक वैज्ञानिक डेटा प्रस्तुत करते हैं।

सरकार द्वारा जारी अधिसूचना जीएसआर 756(ई) के तहत अब संबंधित केंद्रीय या राज्य लाइसेंसिंग अथॉरिटी को यह अधिकार मिल गया है कि वह गलत जानकारी देने वाले आवेदकों के न केवल आवेदन खारिज कर सकेगी या उनका लाइसेंस रद्द कर सकेगी, बल्कि उन्हें एक निश्चित अवधि तक नए आवेदन करने से भी प्रतिबंधित कर सकेगी।

यह संशोधन भारत की दवा नियामक प्रणाली को अधिक पारदर्शी, विश्वसनीय और जवाबदेह बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

अब सिर्फ लाइसेंस रद्द नहीं, आगे भी नहीं मिलेगा मौका

अब तक ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 के तहत यदि किसी कंपनी द्वारा गलत या फर्जी जानकारी दी जाती थी तो उसका आवेदन अस्वीकार किया जा सकता था या जारी लाइसेंस रद्द किया जा सकता था। लेकिन नए संशोधन के बाद ऐसे मामलों में संबंधित कंपनी या संस्था को तय अवधि तक किसी भी नए लाइसेंस या मंजूरी के लिए आवेदन करने से भी रोका जा सकेगा। इससे नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई पहले से अधिक प्रभावी होगी।

मरीजों की सुरक्षा पर रहेगा फोकस

स्वास्थ्य मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि फर्जी या मनगढ़ंत डेटा के आधार पर दवाओं की मंजूरी मिलने से दवाओं की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं और यह सीधे तौर पर जनस्वास्थ्य के लिए खतरा बन सकता है। इसलिए दवा अनुमोदन प्रक्रिया केवल वैज्ञानिक, प्रमाणित और विश्वसनीय साक्ष्यों के आधार पर ही होनी चाहिए।

मंत्रालय का कहना है कि यह संशोधन दवा उद्योग में ईमानदार और नियमों का पालन करने वाले निर्माताओं को बढ़ावा देगा, जबकि गलत तरीके अपनाने वालों पर प्रभावी अंकुश लगाएगा।

सभी प्रकार के आवेदनों पर लागू होगा नियम

संशोधित नियम ड्रग्स रूल्स, 1945 के तहत दाखिल किए जाने वाले सभी प्रकार के आवेदनों पर लागू होंगे। चाहे आवेदन नई दवा की मंजूरी का हो, निर्माण लाइसेंस का हो या किसी अन्य नियामकीय अनुमति का, यदि उसमें फर्जी या भ्रामक डेटा पाया गया तो संबंधित लाइसेंसिंग अथॉरिटी सख्त कार्रवाई कर सकेगी।

वैश्विक मानकों के अनुरूप मजबूत होगा रेगुलेटरी सिस्टम

विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भारत की दवा नियामक व्यवस्था को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप मजबूत करेगा। हाल के वर्षों में केंद्र सरकार दवा गुणवत्ता, निरीक्षण व्यवस्था, निगरानी और नियामकीय सुधारों पर लगातार जोर दे रही है। नया संशोधन भी उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

क्या होगा असर?

  • फर्जी या मनगढ़ंत डेटा देने वाली कंपनियों पर कड़ी कार्रवाई होगी।
  • लाइसेंस रद्द होने के साथ भविष्य के आवेदन पर भी रोक लग सकेगी।
  • दवा मंजूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बनेगी।
  • मरीजों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण दवाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
  • नियमों का पालन करने वाली कंपनियों को बढ़ावा मिलेगा।
  • भारत की फार्मा नियामक व्यवस्था वैश्विक स्तर पर और मजबूत होगी।

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