निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर में एक्सपायर्ड दवाओं का आरोप: बच्चों की सेहत से खिलवाड़ पर ग्रामीणों का हंगामा, जांच शुरू
आगरा, शमसाबाद। आगरा जिले के शमसाबाद क्षेत्र स्थित नगला बीच गांव में आयोजित एक निःशुल्क बाल स्वास्थ्य शिविर उस समय विवादों में घिर गया जब ग्रामीणों ने बच्चों को कथित रूप से एक्सपायरी डेट की दवाएं वितरित किए जाने का आरोप लगाया। मामले के सामने आते ही गांव में आक्रोश फैल गया और बड़ी संख्या में ग्रामीण प्राथमिक विद्यालय पहुंचकर विरोध प्रदर्शन करने लगे। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और शिविर में मौजूद कर्मचारियों को पूछताछ के लिए थाने ले गई। वहीं, औषधि नियंत्रण विभाग (Drug Control Department) को भी जांच के लिए सूचित कर दिया गया है।
बाल चिकित्सा शिविर में बांटी जा रही थीं दवाएं
मंगलवार को नगला बीच के प्राथमिक विद्यालय में एक फाउंडेशन द्वारा निःशुल्क बाल चिकित्सा एवं स्वास्थ्य जांच शिविर आयोजित किया गया था। शिविर में बच्चों की स्वास्थ्य जांच, रक्त परीक्षण तथा विभिन्न दवाओं का वितरण किया जा रहा था। गांव के कई परिवार अपने बच्चों को जांच के लिए लेकर पहुंचे थे।
ग्रामीणों के अनुसार, एक माह से छह वर्ष तक के बच्चों को पेट के कीड़े मारने वाली दवा (एल्बेंडाजोल सिरप), विभिन्न प्रकार के सिरप तथा अन्य दवाएं वितरित की जा रही थीं। कार्यक्रम को स्वास्थ्य सेवा के रूप में प्रस्तुत किया गया था, इसलिए अभिभावकों ने भरोसे के साथ दवाएं स्वीकार कर लीं।
घर पहुंचकर खुली कथित लापरवाही की पोल
मामला तब सामने आया जब गांव निवासी माता प्रसाद की पत्नी अपने पोते-पोतियों के लिए मिली दवाएं घर लेकर पहुंचीं। उनके पुत्र सौरभ ने दवाओं की पैकिंग और एक्सपायरी डेट की जांच की। आरोप है कि कुछ दवाओं की वैधता अवधि समाप्त हो चुकी थी।
सौरभ ने इसकी जानकारी अन्य ग्रामीणों को दी। इसके बाद गांव निवासी पंकज ने भी अपने बच्चे को मिली दवा की जांच की, जो कथित रूप से एक्सपायर्ड पाई गई। सूचना फैलते ही ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ गई और दर्जनों लोग दवाइयों के पैकेट लेकर विद्यालय पहुंच गए।
ग्रामीणों का प्रदर्शन, बच्चों की सुरक्षा पर उठे सवाल
ग्रामीणों ने विद्यालय परिसर में हंगामा करते हुए आरोप लगाया कि स्वास्थ्य शिविर के नाम पर बच्चों के जीवन और स्वास्थ्य के साथ गंभीर लापरवाही की गई है। उनका कहना था कि यदि अभिभावक दवाओं की जांच न करते तो छोटे बच्चों को एक्सपायर्ड दवाएं दी जा सकती थीं, जिससे गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा हो सकता था।
ग्रामीणों ने जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि ऐसे मामलों में केवल चेतावनी पर्याप्त नहीं है, बल्कि जवाबदेही तय होनी चाहिए।
पुलिस और ड्रग विभाग हरकत में
स्थिति बिगड़ती देख शमसाबाद पुलिस मौके पर पहुंची और ग्रामीणों को शांत कराया। ग्रामीणों ने थाने में लिखित तहरीर देकर फाउंडेशन के कर्मचारी प्रदीप, सत्येंद्र, पारुल तथा दो अज्ञात महिला कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
शमसाबाद थाना प्रभारी सुरेंद्र राव ने बताया कि मामला बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़ा होने के कारण तत्काल औषधि नियंत्रण विभाग को सूचित किया गया है। विभागीय अधिकारी दवाओं के नमूने लेकर उनकी वैधता, गुणवत्ता तथा वितरण प्रक्रिया की जांच करेंगे। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
फाउंडेशन ने मानी गलती, कहा—पुरानी दवाएं वाहन में रह गई थीं
विवाद बढ़ने के बाद संबंधित फाउंडेशन की ओर से भी स्पष्टीकरण जारी किया गया। फाउंडेशन के कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) हेड पीके झा ने कहा कि हाउसकीपिंग स्टाफ की त्रुटि के कारण कुछ पुरानी दवाएं वाहन में रह गई थीं और गलती से वितरण सामग्री के साथ पहुंच गईं।
उन्होंने बताया कि शिकायत मिलते ही टीम गांव पहुंची और संबंधित दवाओं को वापस एकत्रित कर लिया गया। विशेष रूप से एल्बेंडाजोल सिरप सहित उन दवाओं को तत्काल वापस लेने की कार्रवाई की गई जिन पर आपत्ति जताई गई थी। फाउंडेशन ने आंतरिक जांच शुरू करने की भी बात कही है।
विशेषज्ञों की राय: एक्सपायर्ड दवा वितरण गंभीर अपराध
औषधि विशेषज्ञों के अनुसार एक्सपायर्ड दवाओं का वितरण केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं बल्कि गंभीर नियामकीय उल्लंघन माना जाता है। बच्चों को दी जाने वाली दवाओं में गुणवत्ता और वैधता की विशेष जांच आवश्यक होती है। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित व्यक्तियों और संस्थाओं पर ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स अधिनियम के तहत कार्रवाई हो सकती है।
मुख्य बिंदु
- निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर में बच्चों को कथित रूप से एक्सपायर्ड दवाएं वितरित की गईं।
- अभिभावकों द्वारा दवाओं की जांच के बाद मामला सामने आया।
- ग्रामीणों ने विद्यालय पहुंचकर विरोध प्रदर्शन किया।
- पुलिस ने कर्मचारियों को पूछताछ के लिए थाने बुलाया।
- ड्रग विभाग को जांच के लिए सूचित किया गया।
- फाउंडेशन ने हाउसकीपिंग स्टाफ की गलती बताते हुए दवाएं वापस लेने की बात स्वीकार की।
- जांच रिपोर्ट के बाद आगे की कार्रवाई होगी।



