आयुर्वेदिक दवाओं के नाम पर बड़ा खेल! घर में बन रही थी पैकिंग, कई जिलों तक सप्लाई का शक

आयुर्वेदिक दवाओं के नाम पर बड़ा खेल! घर में बन रही थी पैकिंग, कई जिलों तक सप्लाई का शक

जलालपुर के गोपरीचांदपुर में छापा, हजारों स्टीकर-होलोग्राम और बिना लेबल की टैबलेट बरामद—चार पर मुकदमा, मुख्य आरोपी गिरफ्तार

जलालपुर। आयुर्वेदिक दवाओं की आड़ में कथित तौर पर नकली दवाओं की पैकिंग, भंडारण और सप्लाई किए जाने के मामले ने स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। जलालपुर के जैतपुर क्षेत्र स्थित गोपरीचांदपुर गांव में जिला प्रशासन, पुलिस और क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी विभाग की संयुक्त टीम ने छापा मारकर बड़ी मात्रा में पैकेजिंग सामग्री बरामद की। मौके से अलग-अलग कंपनियों के नाम के स्टीकर, एमआरपी स्टीकर, होलोग्राम, खाली डिब्बियां, बिना लेबल की टैबलेट, पॉलीथीन और दवाओं की पैकिंग में इस्तेमाल होने वाली हीट श्रिंक मशीन मिली है।

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कार्रवाई के बाद पुलिस ने मामले में चार लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। मकान मालिक और कथित मुख्य संचालक शिवम पांडेय को गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस पूरे नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल हैं और कथित तौर पर तैयार की जा रही दवाओं की सप्लाई किन-किन जिलों तक पहुंच रही थी।

शिकायत के बाद प्रशासन ने की कार्रवाई

क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डॉ. रणजीत कुमार की तहरीर के अनुसार, दिल्ली स्थित योगीराज आयुर्वेदिक दवा कंपनी की ओर से जिलाधिकारी ईशा प्रिया के समक्ष शिकायत की गई थी। शिकायत में कंपनी के नाम से कथित रूप से नकली और डुप्लीकेट दवाओं के निर्माण, पैकिंग, भंडारण और आपूर्ति का आरोप लगाया गया था।

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शिकायत को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी के निर्देश पर आठ सितंबर को एसडीएम जलालपुर मधुमिता सिंह, जलालपुर कोतवाली प्रभारी अजय प्रताप सिंह यादव, जैतपुर थाना प्रभारी प्रेमचंद तथा आयुर्वेद विभाग के अधिकारियों की संयुक्त टीम ने गोपरीचांदपुर निवासी शिवम पांडेय के मकान पर छापा मारा।

हजारों स्टीकर और होलोग्राम देखकर टीम भी हैरान

जांच के दौरान टीम को बड़ी संख्या में पैकेजिंग सामग्री मिली। बरामद सामान में न्यू आर्थो पावर के 27,918 स्टीकर और योगीराज के 58,672 एमआरपी स्टीकर शामिल बताए गए हैं।

इसके अलावा योगीराज गाउट वटी के स्टीकर, प्रचार सामग्री, होलोग्राम, पैकेजिंग पॉलीथीन, खाली प्लास्टिक डिब्बियां और ढक्कन भी मिले। बड़ी संख्या में ऐसी टैबलेट भी बरामद हुईं, जिन पर कोई लेबल नहीं था।

सबसे महत्वपूर्ण बरामदगी में दवाओं की पैकिंग में इस्तेमाल होने वाली हीट श्रिंक मशीन भी शामिल है। इससे जांच एजेंसियों को यह संदेह हुआ कि मौके पर केवल दवाओं का भंडारण नहीं, बल्कि उनकी पैकेजिंग का काम भी किया जा रहा था।

हालांकि, बरामद टैबलेट वास्तव में किस दवा की हैं और उनकी गुणवत्ता एवं संरचना क्या है, यह प्रयोगशाला जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।

एक नहीं, कई कंपनियों के नाम की सामग्री

छापे के दौरान केवल एक कंपनी से संबंधित सामग्री नहीं मिली। टीम को श्री श्याम आयुर्वेद भवन, गोरखपुर समेत अन्य कंपनियों के नाम वाली दवाओं और पैकेजिंग सामग्री भी मिली।

यही बिंदु जांच को और गंभीर बनाता है। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि अलग-अलग कंपनियों के नाम की पैकेजिंग सामग्री एक ही स्थान पर कैसे पहुंची और इसका इस्तेमाल कहां किया जाना था।

पूछताछ में सामने आए तीन और नाम

पुलिस के अनुसार, पूछताछ में शिवम पांडेय ने कथित तौर पर बताया कि बरामद पैकेजिंग सामग्री और अन्य सामान शिव चतुर्वेदी, उसके पुत्र उत्तम चतुर्वेदी निवासी चौबुलिया, अहरौला, आजमगढ़ और हरिलाल पांडेय निवासी ऊसर कुड़वा, महराजगंज, आजमगढ़ की ओर से उसके मकान पर भेजा जाता था।

पुलिस के मुताबिक, यहां सामान का भंडारण करने के साथ दवाओं की पैकिंग और बिक्री किए जाने की बात भी सामने आई है। इसके आधार पर पुलिस ने शिवम पांडेय, शिव चतुर्वेदी, उत्तम चतुर्वेदी और हरिलाल पांडेय के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।

अब जांच का बड़ा सवाल यह है कि इन लोगों के बीच दवाओं की खरीद, पैकिंग, पैकेजिंग सामग्री और सप्लाई का नेटवर्क किस तरह काम कर रहा था।

आजमगढ़ तक पहुंची कार्रवाई

जलालपुर में कार्रवाई के बाद मामले के तार आजमगढ़ से जुड़े होने की जानकारी सामने आने पर जिलाधिकारी ईशा प्रिया ने आजमगढ़ जिला प्रशासन से संपर्क किया।

इसके बाद अहरौला और महराजगंज क्षेत्र में भी स्थानीय प्रशासन की टीमों ने छापेमारी की। वहां से भी दवाओं का जखीरा और पैकेजिंग से संबंधित सामग्री मिलने की बात सामने आई है।

इससे जांच का दायरा अब जलालपुर तक सीमित नहीं रह गया है। प्रशासन और पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि कथित नेटवर्क का वास्तविक संचालन कहां से हो रहा था।

कई जिलों में सप्लाई का शक

प्रारंभिक जांच में दवाओं की कथित आपूर्ति अंबेडकरनगर के साथ सुल्तानपुर, आजमगढ़, गोरखपुर, जौनपुर और अन्य जिलों तक किए जाने की बात सामने आई है।

अगर जांच में यह बात प्रमाणित होती है तो यह मामला केवल एक मकान में अवैध पैकिंग का नहीं, बल्कि कई जिलों में फैले सप्लाई नेटवर्क का रूप ले सकता है।

अब पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती उन दुकानदारों, वितरकों और अन्य लोगों तक पहुंचना है, जहां से इन कथित दवाओं की बिक्री हुई हो सकती है।

ई-रिक्शा भी जांच के घेरे में

पुलिस ने उस ऑटो ई-रिक्शा संख्या यूपी 45 बीटी 3519 को भी जांच के दायरे में लिया है, जिसके बारे में बताया गया है कि इसका इस्तेमाल बरामद सामग्री के परिवहन और दवाओं के प्रचार-प्रसार में किया जाता था।

जांच एजेंसियां अब वाहन की आवाजाही, उसके चालक और उसके जरिए किन स्थानों पर सामान पहुंचाया गया, इसकी जानकारी जुटा सकती हैं। इससे कथित सप्लाई चेन की कड़ियां जोड़ने में मदद मिल सकती है।

सबसे बड़ा सवाल—बिना लेबल की टैबलेट आखिर किसकी?

छापे में बड़ी संख्या में बिना लेबल की टैबलेट मिलना जांच का अहम बिंदु है। इन टैबलेट की पहचान, गुणवत्ता और स्रोत की जांच बेहद महत्वपूर्ण होगी।

यदि प्रयोगशाला जांच में दवाओं की गुणवत्ता मानकों के विपरीत पाई जाती है या उनकी पहचान संदिग्ध निकलती है, तो मामला और गंभीर हो सकता है। इसके साथ यह भी जांच जरूरी होगी कि इन टैबलेट को किन कंपनियों के नाम से पैक किया जाना था।

सिर्फ पैकिंग सेंटर या पूरा नेटवर्क?

मामले में अब जांच का फोकस केवल बरामद सामान तक सीमित नहीं रहेगा। पुलिस और संबंधित विभाग को यह पता लगाना होगा कि—

  • दवाओं या टैबलेट की आपूर्ति कहां से होती थी?
  • पैकेजिंग सामग्री किसने उपलब्ध कराई?
  • अलग-अलग कंपनियों के नाम के स्टीकर और होलोग्राम कहां से आए?
  • बिना लेबल वाली टैबलेट किसकी थीं?
  • तैयार दवाएं किन जिलों में भेजी जाती थीं?
  • किन दुकानों या वितरकों के माध्यम से बिक्री होती थी?
  • पैकेजिंग में इस्तेमाल मशीन कब से वहां मौजूद थी?
  • क्या इससे पहले भी इसी तरह की दवाओं की सप्लाई की जा चुकी है?

इन सवालों के जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे।

स्वास्थ्य सुरक्षा से जुड़ा मामला

दवाओं की नकली पैकिंग और कथित फर्जी ब्रांडिंग का मामला सीधे लोगों के स्वास्थ्य से जुड़ा है। आयुर्वेदिक दवा को भी उपभोक्ता बीमारी के इलाज के भरोसे से इस्तेमाल करता है। ऐसे में यदि किसी असली कंपनी के नाम पर बिना अनुमति या गलत तरीके से दवा तैयार कर बाजार में भेजी जाती है, तो उपभोक्ताओं के साथ धोखाधड़ी के साथ स्वास्थ्य पर भी गंभीर असर पड़ सकता है।

फिलहाल प्रशासन ने कार्रवाई शुरू कर दी है और पुलिस आगे की जांच में जुटी है। बरामद दवाओं और टैबलेट की जांच रिपोर्ट तथा पूछताछ से यह स्पष्ट होगा कि गोपरीचांदपुर में चल रहा कथित कारोबार कितना बड़ा था और इसकी सप्लाई चेन कहां तक फैली हुई थी।

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