नकली दवाओं का नेटवर्क लखनऊ से सहारनपुर और रुड़की तक!
नागल के मकान के तहखाने में चल रहा था पैकिंग का खेल, 32.555 किलो दवा स्ट्रिप्स समेत मशीनें और प्रिंटेड पैकेजिंग जब्त
सहारनपुर/रुड़की। उत्तर प्रदेश में नकली दवाओं की सप्लाई के मामले की जांच अब सहारनपुर से होते हुए रुड़की तक पहुंच गई है। लखनऊ के अमीनाबाद में दर्ज मुकदमे में गिरफ्तार सहारनपुर निवासी एजाज से पूछताछ के बाद एफएसडीए की टीम ने नागल क्षेत्र में छापेमारी की। ग्राम कोटा में एक मकान के तहखाने से दवाओं की पैकिंग का पूरा सेटअप मिलने से हड़कंप मच गया।
तहखाने से स्ट्रिपिंग मशीन, बैच स्टीरियो, अलग-अलग डाई-पंच, प्रिंटेड एल्युमिनियम फॉयल और करीब 32.555 किलो दवा स्ट्रिप्स बरामद की गईं। इसके अलावा बड़ी संख्या में प्रिंटेड कार्टन और गोलियां भी मिली हैं। बरामद सामग्री को टीम ने सील कर दिया है।
लखनऊ में गिरफ्तारी के बाद खुली सहारनपुर की कड़ी
अमीनाबाद थाने में दर्ज एफआईआर में सहारनपुर निवासी एजाज का नाम सामने आया है। आरोप है कि वह सस्ती और नकली दवाओं की सप्लाई से जुड़ा था। लखनऊ एसओजी और पुलिस की कार्रवाई के बाद उससे पूछताछ की गई।
पूछताछ में मिली जानकारी के आधार पर एफएसडीए टीम सहारनपुर के नागल क्षेत्र स्थित ग्राम कोटा पहुंची। यहां एक मकान की जांच के दौरान 41 लुपिन और दो मैक्लिओड्स के कॉरुगेटेड बॉक्स मिले। इनके नीचे बने तहखाने में दवाओं की पैकिंग से संबंधित मशीनें और अन्य सामग्री रखी मिली।
पूछताछ में विनोद नाम के व्यक्ति ने तहखाने में दवाओं की पैकिंग किए जाने की जानकारी दी।
32.555 किलो डिफकॉर्ट-6 स्ट्रिप्स बरामद
कार्रवाई के दौरान टीम को डिफकॉर्ट-6 की करीब 32.555 किलो स्ट्रिप्स मिलीं। इसके अलावा डिफकॉर्ट-6 के 973 प्रिंटेड कार्टन और रोसुवास एफ-10 के 472 प्रिंटेड कार्टन भी बरामद किए गए।
मौके से करीब 6.950 किलो पीली और 4.900 किलो सफेद गोलियां भी मिली हैं। एफएसडीए ने चार दवाओं के नमूने जांच के लिए लिए हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद यह स्पष्ट होगा कि बरामद दवाओं की गुणवत्ता और उनकी वास्तविकता क्या है।
लेवेरा-500 के दो बैच जांच में फेल
लखनऊ के अमीनाबाद मामले की जांच में लेवेरा-500 के दो बैच के नमूने राजकीय प्रयोगशाला भेजे गए थे। जांच में दोनों नमूनों को ‘प्रकृति से असली नहीं’ पाया गया।
जांच में दवाओं के खरीद-बिक्री रिकॉर्ड में भी अंतर सामने आया। रिकॉर्ड के अनुसार करीब 76,790 स्ट्रिप्स की खरीद दिखाई गई, जबकि बिक्री और स्टॉक को मिलाकर 85,832 स्ट्रिप्स दर्ज मिलीं। यानी रिकॉर्ड में करीब 9,042 स्ट्रिप्स का अंतर सामने आया है। जांच एजेंसियां इस अंतर की भी पड़ताल कर रही हैं।
रुड़की की तीन फर्में भी जांच के दायरे में
पूछताछ के दौरान मामले की कड़ी रुड़की तक पहुंचने की बात सामने आई है। जांच में प्रिजार्क हेल्थकेयर, रेडिएंट प्रिंटो पैक और वी-ब्रोस लाइफसाइंसेज समेत अन्य लोगों और ठिकानों का जिक्र आया है।
अब एफएसडीए इन संस्थानों की भूमिका की भी जांच कर रहा है। खासतौर पर यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि दवाओं की पैकिंग, प्रिंटेड पैकेजिंग सामग्री और सप्लाई चेन में किन-किन लोगों की भूमिका रही।
जांच बढ़ी तो सामने आ सकते हैं कई और नाम
लखनऊ से शुरू हुई जांच में सहारनपुर के नागल में पैकिंग सेटअप मिलने और इसके बाद रुड़की की फर्मों का नाम सामने आने से मामले की गंभीरता बढ़ गई है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि बरामद दवाएं कहां तैयार की गईं, उनकी पैकिंग कहां हुई और इन्हें किन-किन राज्यों में सप्लाई किया गया।
फिलहाल लखनऊ और सहारनपुर दोनों मामलों में एफआईआर दर्ज है और जांच जारी है। नमूनों की प्रयोगशाला रिपोर्ट तथा पूछताछ से सामने आने वाली जानकारी के आधार पर नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों पर भी कार्रवाई की संभावना है।



