30 नई दवाओं की कीमतों पर सरकार का बड़ा फैसला, BP-डायबिटीज से लेकर इम्यूनोसप्रेसेंट दवाएं हुईं नियंत्रित
नई दिल्ली। देश में दवाओं की कीमतों को नियंत्रित करने वाली सरकारी संस्था (NPPA) ने 30 नई दवाओं की खुदरा कीमतें तय कर दी हैं। यह फैसला Drugs Prices Control Order (DPCO), 2013 के तहत लिया गया है। नई कीमतों में ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, कोलेस्ट्रॉल, एंटीबायोटिक, एंटी-इन्फ्लेमेटरी और पोषण संबंधी दवाएं शामिल हैं।
NPPA की 26 मई को हुई बैठक में इन दवाओं की कीमतें तय की गईं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मरीजों को आवश्यक दवाएं उचित और नियंत्रित कीमत पर उपलब्ध हों तथा कंपनियां मनमाने दाम न वसूल सकें।
किन कंपनियों की दवाएं शामिल?
इस सूची में देश की प्रमुख फार्मा कंपनियों की दवाएं शामिल हैं, जिनमें , , , , , और प्रमुख हैं।
इन कंपनियों की कई नई दवा संयोजन (Fixed Dose Combinations) और संशोधित डोज वाली दवाओं की खुदरा कीमतें निर्धारित की गई हैं।
मरीजों को किन दवाओं में मिलेगा फायदा?
कीमत तय होने वाली प्रमुख दवाओं में शामिल हैं:
- हाई ब्लड प्रेशर की दवाएं
- डायबिटीज नियंत्रण की दवाएं
- कोलेस्ट्रॉल कम करने वाली दवाएं
- एंटीबायोटिक दवाएं
- दर्द और सूजन कम करने वाली दवाएं
- पोषण संबंधी सप्लीमेंट्स
- PCOS प्रबंधन के लिए उपयोगी उत्पाद
- अंग प्रत्यारोपण के बाद दी जाने वाली इम्यूनोसप्रेसेंट दवाएं
विशेष रूप से Tacrolimus Prolonged Release Capsules की कीमत ₹127 प्रति कैप्सूल (GST अतिरिक्त) तय की गई है। यह दवा किडनी, लिवर और अन्य अंग प्रत्यारोपण के बाद मरीजों में प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को नियंत्रित करने के लिए उपयोग की जाती है।
लगातार बढ़ रही है निगरानी
NPPA इस वर्ष लगातार नई दवाओं की कीमतें तय कर रही है। वर्ष 2026 में अब तक:
- जनवरी में 37 नई दवाएं
- फरवरी में 20 नई दवाएं
- मार्च में 31 नई दवाएं
- अप्रैल में 42 नई दवाएं
- मई में 30 नई दवाएं
की कीमतें निर्धारित की जा चुकी हैं।
इससे स्पष्ट है कि सरकार दवा बाजार पर निगरानी बढ़ा रही है और मूल्य नियंत्रण व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दे रही है।
क्या है DPCO के तहत “नई दवा”?
DPCO-2013 के अनुसार, यदि कोई कंपनी किसी आवश्यक दवा को नई ताकत (Strength), नई डोज या किसी अन्य दवा के साथ मिलाकर बाजार में उतारती है, तो उसे “नई दवा” माना जाता है। ऐसी दवाओं को बाजार में लाने से पहले उनकी कीमत NPPA से अनुमोदित करानी होती है।
नियम तोड़ने पर होगी कार्रवाई
NPPA ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई कंपनी निर्धारित कीमत से अधिक दर पर दवा बेचती है, तो उसे अतिरिक्त वसूली गई राशि ब्याज सहित जमा करनी होगी। यह कार्रवाई Essential Commodities Act, 1955 और DPCO-2013 के तहत की जा सकती है।
उत्तराखंड के लिए क्यों महत्वपूर्ण?
उत्तराखंड के हरिद्वार, देहरादून, रुड़की और सिडकुल क्षेत्रों में बड़ी संख्या में फार्मा निर्माण इकाइयां संचालित हैं। इनमें से कई कंपनियां राष्ट्रीय स्तर पर दवाओं की आपूर्ति करती हैं। ऐसे में NPPA द्वारा नई दवाओं की कीमत तय किए जाने का सीधा असर राज्य के फार्मा उद्योग, वितरकों और मरीजों पर पड़ेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम दवा बाजार में पारदर्शिता बढ़ाने, ओवरचार्जिंग रोकने और मरीजों को सस्ती दवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा।



