नकली Buprenorphine इंजेक्शन का खुलासा, CDSCO जांच में फर्जी बैच पकड़ा गया
/नई दिल्ली, देश में दवा सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। Buprenorphine Injection IP 2ml के एक बैच LM1889 को लेकर केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) की जांच में इसे नकली (स्प्यूरियस) होने की आशंका जताई गई है। यह मामला स्वास्थ्य विभाग और दवा नियंत्रण एजेंसियों के लिए बड़ी चिंता का विषय बन गया है।
जांच में क्या सामने आया
कोलकाता स्थित सेंट्रल ड्रग्स लैब (CDL) द्वारा मार्च 2026 में की गई जांच में पाया गया कि:
- इंजेक्शन पर निर्माण तिथि दिसंबर 2023 और समाप्ति तिथि नवंबर 2029 अंकित है
- लेकिन लेबल पर दर्ज कंपनी ने साफ तौर पर कहा है कि यह बैच उन्होंने कभी तैयार ही नहीं किया
- रिपोर्ट में इस दवा को “स्प्यूरियस” यानी नकली होने की श्रेणी में संदिग्ध बताया गया है
अधिकारियों के अनुसार, यह मामला अब विस्तृत जांच के अधीन है और अंतिम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।
क्यों गंभीर है मामला
Buprenorphine एक नियंत्रित दवा है, जिसका उपयोग:
- नशा मुक्ति उपचार (ओपिओइड निर्भरता)
- दर्द प्रबंधन
में किया जाता है। ऐसे में इस दवा का नकली होना सीधे तौर पर मरीजों के जीवन के लिए खतरा बन सकता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि नकली इंजेक्शन के इस्तेमाल से:
- मरीज को सही इलाज नहीं मिल पाता
- गंभीर साइड इफेक्ट हो सकते हैं
- ओवरडोज या जान का खतरा भी बन सकता है
ड्रग माफिया की आशंका
प्रारंभिक संकेतों से यह मामला संगठित दवा माफिया की गतिविधियों से जुड़ा हो सकता है। महंगी और नियंत्रित दवाओं की नकली सप्लाई कर अवैध मुनाफा कमाने की आशंका जताई जा रही है। यह भी जांच का विषय है कि यह फर्जी बैच बाजार तक कैसे पहुंचा।
प्रशासन अलर्ट मोड में
CDSCO और संबंधित राज्य दवा नियंत्रण विभागों ने:
- सप्लाई चेन की जांच शुरू कर दी है
- मेडिकल स्टोर्स और अस्पतालों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं
- संदिग्ध स्टॉक को तुरंत हटाने की कार्रवाई जारी है
जनता के लिए चेतावनी
स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि:
- बैच नंबर LM1889 का इंजेक्शन इस्तेमाल न करें
- दवा केवल लाइसेंसधारी दुकानों से ही खरीदें
- किसी भी संदिग्ध दवा की सूचना तुरंत संबंधित अधिकारियों को दें
Buprenorphine इंजेक्शन का यह मामला केवल एक नकली बैच तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दवा वितरण प्रणाली में मौजूद खामियों को उजागर करता है। यदि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो ऐसे मामले आगे और बढ़ सकते हैं, जिससे आम जनता की सेहत पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है।



