इलाज की जगह पर हंगामे का आरोप, अस्पताल स्टाफ ने भीम आर्मी नेता तेज प्रताप सैनी के होटल के बाहर खोला मोर्चा

इलाज की जगह पर हंगामे का आरोप, अस्पताल स्टाफ ने भीम आर्मी नेता तेज प्रताप सैनी के होटल के बाहर खोला मोर्चा

मरीज की मौत के बाद अस्पताल में हुए प्रदर्शन से भड़के डॉक्टर-कर्मचारी, बोले—अस्पताल को राजनीति का अखाड़ा न बनाया जाए

हरिद्वार:  हरिद्वार के बहादराबाद क्षेत्र में स्थित जया मैक्सवेल अस्पताल और भीम आर्मी के बीच शुरू हुआ विवाद अब खुलकर सड़क पर आ गया है। अस्पताल परिसर में लगातार हो रहे हंगामे और दबाव की राजनीति से नाराज डॉक्टरों और कर्मचारियों का गुस्सा रविवार को फूट पड़ा। बड़ी संख्या में अस्पताल स्टाफ भीम आर्मी नेता तेज प्रताप सैनी के होटल के बाहर पहुंच गया और जोरदार प्रदर्शन करते हुए नारेबाजी की।

अस्पताल कर्मचारियों का आरोप है कि पिछले कुछ समय से अस्पताल में किसी भी घटना या विवाद के बाद कुछ संगठन बड़ी संख्या में पहुंच जाते हैं और अस्पताल परिसर में हंगामा शुरू कर देते हैं। इससे अस्पताल का माहौल बिगड़ जाता है और इलाज की व्यवस्था प्रभावित होती है। कर्मचारियों का कहना है कि अस्पताल एक संवेदनशील स्थान होता है, जहां हर समय गंभीर मरीजों का इलाज चलता रहता है। ऐसे माहौल में भीड़ और हंगामा मरीजों की जान के लिए खतरा बन सकता है।

दरअसल विवाद की शुरुआत उस समय हुई जब कुछ दिन पहले जया मैक्सवेल अस्पताल में भर्ती एक मरीज की इलाज के दौरान मौत हो गई थी। मरीज की मौत के बाद उसके परिजनों के साथ भीम आर्मी के कुछ कार्यकर्ता अस्पताल पहुंच गए और लापरवाही का आरोप लगाते हुए अस्पताल परिसर में प्रदर्शन करने लगे। कर्मचारियों का आरोप है कि उस दौरान काफी देर तक अस्पताल में नारेबाजी और हंगामा चलता रहा, जिससे वहां भर्ती मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

अस्पताल कर्मचारियों का कहना है कि मरीज की मौत दुखद घटना होती है और अस्पताल भी ऐसी घटनाओं से दुखी होता है। लेकिन किसी भी घटना के बाद अस्पताल में भीड़ के साथ पहुंचकर हंगामा करना और डॉक्टरों पर दबाव बनाना सही तरीका नहीं है। उनका कहना है कि अगर किसी को इलाज को लेकर शिकायत है तो उसके लिए कानूनी व्यवस्था मौजूद है और जांच कराई जा सकती है।

इसी नाराजगी के चलते रविवार को अस्पताल के डॉक्टर और कर्मचारी एकजुट हो गए। इसके बाद सभी लोग बहादराबाद क्षेत्र में स्थित भीम आर्मी नेता तेज प्रताप सैनी के होटल के बाहर पहुंच गए और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। कर्मचारियों ने वहां जमकर नारेबाजी की और आरोप लगाया कि अस्पताल में बार-बार इस तरह के प्रदर्शन से डॉक्टरों पर अनावश्यक दबाव बनाया जा रहा है।

प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों का कहना था कि अगर अस्पतालों में इसी तरह भीड़ का दबाव बनाया जाएगा तो डॉक्टर खुलकर अपना काम नहीं कर पाएंगे। उनका कहना था कि अस्पताल इलाज की जगह है, न कि किसी तरह की राजनीति या शक्ति प्रदर्शन का मंच। डॉक्टरों ने प्रशासन से मांग की कि अस्पतालों में इस तरह के हस्तक्षेप को रोका जाए और चिकित्सा संस्थानों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।

प्रदर्शन के दौरान माहौल उस समय और अधिक तनावपूर्ण हो गया जब तेज प्रताप सैनी अपने समर्थकों के साथ मौके पर पहुंच गए। दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई। आरोप है कि इस दौरान तेज प्रताप सैनी और उनके कुछ समर्थकों ने अस्पताल कर्मचारियों के साथ अभद्र व्यवहार किया और हाथापाई की कोशिश भी की। इससे मौके पर कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

स्थिति बिगड़ती देख किसी ने तुरंत पुलिस को सूचना दे दी। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंच गई और दोनों पक्षों को समझाने की कोशिश की। पुलिस की मौजूदगी में स्थिति को नियंत्रित किया गया और किसी तरह बड़ा टकराव होने से टल गया।

पुलिस अधिकारियों ने दोनों पक्षों को साफ चेतावनी दी कि कानून को हाथ में लेने की अनुमति किसी को नहीं दी जाएगी। एहतियात के तौर पर इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल भी तैनात कर दिया गया है ताकि दोबारा किसी तरह का विवाद न हो सके।

जया मैक्सवेल अस्पताल के डॉक्टर प्रभात ने कहा कि अस्पताल में डॉक्टर और कर्मचारी दिन-रात मरीजों की सेवा में लगे रहते हैं। लेकिन जब बार-बार अस्पताल में भीड़ आकर हंगामा करती है तो इससे इलाज की प्रक्रिया प्रभावित होती है। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि अस्पतालों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जाए ताकि डॉक्टर बिना किसी दबाव के अपना काम कर सकें।

अस्पताल की डॉक्टर गौरी ने कहा कि किसी भी मरीज की मौत दुखद होती है और अस्पताल हमेशा बेहतर इलाज देने की कोशिश करता है। लेकिन बिना पूरी जानकारी के अस्पताल पर आरोप लगाना और भीड़ के साथ आकर हंगामा करना गलत है। उन्होंने कहा कि अगर किसी को शिकायत है तो वह कानूनी तरीके से जांच की मांग कर सकता है।

वहीं डॉ. शमीम ने भी इस पूरे मामले पर चिंता जताई। उनका कहना है कि अस्पताल में भर्ती कई मरीज गंभीर हालत में होते हैं और उन्हें शांत वातावरण की जरूरत होती है। ऐसे में अगर अस्पताल में शोर-शराबा और हंगामा होगा तो इसका सीधा असर मरीजों के इलाज पर पड़ेगा।

 

फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। दोनों पक्षों से बातचीत की जा रही है और घटना से जुड़े सभी पहलुओं को खंगाला जा रहा है। पुलिस का कहना है कि अगर किसी ने कानून व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश की है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

हरिद्वार में अस्पताल और सामाजिक संगठन के बीच बढ़ता यह विवाद अब चर्चा का विषय बन गया है। अस्पताल कर्मचारियों का कहना है कि डॉक्टरों को डर और दबाव के माहौल में नहीं बल्कि सुरक्षित और शांत वातावरण में काम करने का अवसर मिलना चाहिए, ताकि मरीजों को बेहतर इलाज मिल सके।

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