हरिद्वार में बनी थायरॉयड की दवा पहले जांच में फेल, कोर्ट के आदेश पर दोबारा टेस्ट में निकली मानकों पर खरी
राजस्थान में लिए गए सैंपल को पहले लैब ने बताया ‘नॉट ऑफ स्टैंडर्ड क्वालिटी’, कंपनी की चुनौती के बाद केंद्रीय लैब में सही पाई गई दवा
झालावाड़/हरिद्वार। थायरॉयड की बीमारी में इस्तेमाल होने वाली एक महत्वपूर्ण दवा को लेकर दिलचस्प मामला सामने आया है। पहले सरकारी लैब की जांच में यह दवा मानकों पर खरी नहीं उतरी और इसे “नॉट ऑफ स्टैंडर्ड क्वालिटी” घोषित कर दिया गया। हालांकि दवा बनाने वाली कंपनी ने इस रिपोर्ट को चुनौती दी, जिसके बाद कोर्ट के आदेश पर उसी सैंपल की दोबारा जांच कराई गई। दूसरी जांच में वही सैंपल सभी मानकों पर खरा पाया गया।
जानकारी के अनुसार थायरॉक्सिन सोडियम टैबलेट IP 50 माइक्रोग्राम का सैंपल राजस्थान के झालावाड़ जिले से लिया गया था। यह दवा Matins Healthcare Pvt. Ltd. द्वारा निर्मित बताई गई है, जिसकी निर्माण इकाई SIDCUL हरिद्वार में स्थित है।
दवा का विवरण इस प्रकार है:
- बैच नंबर: MT-240043
- निर्माण तिथि: जनवरी 2024
- एक्सपायरी: दिसंबर 2025
पहली जांच में सैंपल हुआ फेल
दवा का सैंपल राजस्थान की ड्रग्स टेस्टिंग लैब, जयपुर भेजा गया था। यहां की जांच रिपोर्ट में बताया गया कि दवा दिसॉल्यूशन टेस्ट में मानकों के अनुरूप नहीं पाई गई।
रिपोर्ट के अनुसार दवा का दिसॉल्यूशन स्तर निर्धारित मानक से कम पाया गया, जिसके आधार पर सरकारी विश्लेषक ने इसे मानक गुणवत्ता की नहीं (Not of Standard Quality) घोषित कर दिया। इसके बाद मामला कानूनी प्रक्रिया में पहुंच गया।
कंपनी ने रिपोर्ट को दी चुनौती
दवा बनाने वाली कंपनी Matins Healthcare Pvt. Ltd. ने सरकारी लैब की रिपोर्ट पर आपत्ति जताते हुए इसे चुनौती दी। कंपनी का कहना था कि:
- संबंधित बैच के मैन्युफैक्चरिंग रिकॉर्ड और गुणवत्ता परीक्षण की दोबारा जांच की गई।
- कंपनी के पास मौजूद कंट्रोल सैंपल की जांच में दवा पूरी तरह मानकों के अनुरूप पाई गई।
इसी आधार पर कंपनी ने सरकारी लैब की रिपोर्ट को चुनौती देते हुए दोबारा परीक्षण की मांग की।
कोर्ट के आदेश पर फिर हुई जांच
मामला झालावाड़ के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) की अदालत में पहुंचा। अदालत के निर्देश पर उसी सैंपल को दोबारा जांच के लिए केंद्रीय औषधि प्रयोगशाला, कोलकाता भेजा गया।
दूसरी जांच में दवा निकली मानकों पर खरी
कोलकाता स्थित केंद्रीय औषधि प्रयोगशाला में दोबारा परीक्षण के दौरान दिसॉल्यूशन टेस्ट किया गया। जांच रिपोर्ट में पाया गया कि:
- दवा का औसत ड्रग रिलीज लगभग 92.59 प्रतिशत रहा।
- जबकि मानक के अनुसार कम से कम 70 प्रतिशत दवा का रिलीज होना आवश्यक होता है।
इस आधार पर केंद्रीय लैब ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया कि दवा का सैंपल परीक्षण में मानकों के अनुरूप पाया गया।
उठे कई सवाल
एक ही सैंपल की दो अलग-अलग जांच रिपोर्ट सामने आने से दवा परीक्षण प्रणाली को लेकर सवाल भी खड़े हो गए हैं। पहले जहां सरकारी लैब ने सैंपल को फेल घोषित किया था, वहीं बाद में केंद्रीय लैब की जांच में वही सैंपल मानकों पर खरा पाया गया।



