देश में फिर नकली दवाओं का खतरा! तीन बड़ी दवाएं जांच में फर्जी पाई गईं, CDSCO की सख्त कार्रवाई शुरू
नई दिल्ली,। देश में एक बार फिर नकली दवाओं का बड़ा मामला सामने आया है। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन Central Drugs Standard Control Organization (CDSCO) की लैब जांच में तीन महत्वपूर्ण दवाएं संदिग्ध और संभावित रूप से स्प्यूरियस (नकली) पाई गई हैं। मामला इतना गंभीर है कि दवा बनाने और सप्लाई करने वाली कंपनियां फिलहाल “Under Investigation” बताई गई हैं।
सरकारी लैब की रिपोर्ट के बाद दवा बाजार में हड़कंप मच गया है।
1️⃣ Azithromycin USP/EP/IP – एंटीबायोटिक पर सवाल
- बैच नंबर: 129-250324-1
- मैन्युफैक्चरिंग डेट: मार्च 2025
- एक्सपायरी: मार्च 2029
- जांच लैब: CDTL, मुंबई (CDSCO Labs)
- रिपोर्टिंग माह: जनवरी 2026
NSQ टिप्पणी: यह दवा संभावित रूप से नकली (Spurious) है, अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद आएगा।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि लेबल पर जिस आयातक (Importer) का नाम लिखा है, उसने साफ कहा है कि यह बैच उन्होंने सप्लाई ही नहीं किया। यानी बाजार में किसी ने उनके नाम से नकली दवा बेच दी।
👉 Azithromycin एक आम और महत्वपूर्ण एंटीबायोटिक है, जिसका इस्तेमाल गले, फेफड़ों और कई बैक्टीरियल संक्रमण में होता है। अगर यह दवा नकली निकली, तो मरीजों की सेहत पर सीधा खतरा है।
2️⃣ Trypsin-Chymotrypsin Tablets – दर्द और सूजन की दवा भी शक के घेरे में
- बैच नंबर: 2KU6L050
- मैन्युफैक्चरिंग डेट: दिसंबर 2024
- एक्सपायरी: नवंबर 2027
- जांच लैब: CDL, कोलकाता
- रिपोर्टिंग माह: जनवरी 2026
यह दवा आमतौर पर सर्जरी के बाद सूजन और दर्द में दी जाती है।
लेबल पर जिस निर्माता कंपनी का नाम है, उसने जांच एजेंसियों को लिखित में बताया है कि यह बैच उन्होंने बनाया ही नहीं। यानी यह दवा भी नकली होने की आशंका में है।
3️⃣ Ofloxacin + Ornidazole Tablets IP – पेट और संक्रमण की दवा भी फर्जी?
- बैच नंबर: E-50032
- मैन्युफैक्चरिंग डेट: जनवरी 2025
- एक्सपायरी: दिसंबर 2028
- जांच: स्टेट लैब, पश्चिम बंगाल
- रिपोर्टिंग माह: जनवरी 2026
यह दवा पेट के संक्रमण और डायरिया जैसी समस्याओं में दी जाती है।
यहां भी कंपनी ने साफ कहा है कि संबंधित बैच उन्होंने तैयार नहीं किया। यानी बाजार में किसी ने उनके नाम का दुरुपयोग कर नकली दवा बेची।
क्या है “Spurious Drug”?
जब कोई दवा किसी असली कंपनी के नाम और लेबल का इस्तेमाल करके बनाई जाए, लेकिन वह असली कंपनी द्वारा निर्मित न हो — उसे स्प्यूरियस (नकली) दवा कहा जाता है।
ऐसी दवाएं:
- असर नहीं करतीं
- गलत रसायन हो सकते हैं
- गंभीर साइड इफेक्ट दे सकती हैं
- मरीज की जान तक खतरे में डाल सकती हैं
सरकार की कार्रवाई
Central Drugs Standard Control Organization (CDSCO) ने तीनों मामलों में विस्तृत जांच शुरू कर दी है।
- सप्लाई चेन की जांच
- गोदामों और डिस्ट्रीब्यूटर्स पर निगरानी
- जिम्मेदार लोगों पर कानूनी कार्रवाई की तैयारी
यदि जांच में दवाएं नकली साबित होती हैं तो संबंधित लोगों पर ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के तहत कड़ी सजा हो सकती है।
आम लोगों के लिए जरूरी सलाह
✔ दवा खरीदते समय बिल जरूर लें
✔ पैकेट पर बैच नंबर और कंपनी का नाम जांचें
✔ संदिग्ध दवा दिखे तो ड्रग इंस्पेक्टर को सूचना दें
✔ डॉक्टर की सलाह के बिना एंटीबायोटिक न लें
बड़ा सवाल
जब महत्वपूर्ण एंटीबायोटिक और संक्रमण की दवाएं तक नकली मिल रही हैं, तो दवा बाजार की निगरानी कितनी मजबूत है?
जनवरी 2026 की यह रिपोर्ट साफ संकेत देती है कि नकली दवाओं का जाल अब भी सक्रिय है — और इस पर सख्त लगाम लगाने की जरूरत है।



