इंजेक्शन से ब्यूटी ट्रीटमेंट पर केंद्र सरकार का बड़ा एक्शन: CDSCO की सख्त चेतावनी, “कॉस्मेटिक को इंजेक्शन बनाकर इस्तेमाल करना गैरकानूनी”
देशभर में तेजी से बढ़ रहे ब्यूटी क्लीनिक, ग्लो इंजेक्शन, स्किन व्हाइटनिंग और एंटी-एजिंग ट्रीटमेंट के कारोबार पर अब केंद्र सरकार ने बड़ा और सख्त रुख अपनाया है। (CDSCO) ने एक अहम पब्लिक नोटिस जारी कर साफ कर दिया है कि किसी भी कॉस्मेटिक उत्पाद को इंजेक्शन के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। सरकार ने चेतावनी दी है कि ऐसा करना सीधे तौर पर Drugs and Cosmetics Act एवं Cosmetics Rules, 2020 का उल्लंघन माना जाएगा।
यह नोटिस ऐसे समय में आया है जब देशभर में “ग्लो इंजेक्शन”, “स्किन बूस्टर”, “फेयरनेस इंजेक्शन” और “यंग स्किन थेरेपी” के नाम पर ब्यूटी इंडस्ट्री का बड़ा नेटवर्क तेजी से फैल रहा है। कई जगहों पर बिना वैज्ञानिक प्रमाण और बिना वैध अनुमति के कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स को इंजेक्शन के जरिए शरीर में पहुंचाया जा रहा है, जिससे गंभीर स्वास्थ्य खतरे पैदा हो रहे हैं।
CDSCO ने क्या कहा?
CDSCO के अनुसार, कानून में कॉस्मेटिक की स्पष्ट परिभाषा दी गई है। कॉस्मेटिक केवल उन उत्पादों को कहा जाएगा जो शरीर पर बाहर से लगाए जाएं—जैसे कि त्वचा पर रगड़ना, छिड़कना, स्प्रे करना या सौंदर्य बढ़ाने के लिए बाहरी उपयोग करना।
सरकार ने स्पष्ट किया कि:
- कोई भी कॉस्मेटिक इंजेक्शन के रूप में उपयोग नहीं किया जा सकता।
- ब्यूटी क्लीनिक, एस्थेटिक सेंटर या प्रोफेशनल्स द्वारा कॉस्मेटिक का इंजेक्शन के रूप में उपयोग अवैध है।
- कॉस्मेटिक उत्पादों को “इलाज” या “ट्रीटमेंट” के रूप में प्रचारित करना भी नियमों के खिलाफ है।
- लेबल पर भ्रामक दावे करना या निर्माता की जानकारी मिटाना भी गंभीर अपराध माना जाएगा।
“ब्यूटी के नाम पर खतरा”
विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में सोशल मीडिया और ग्लैमर इंडस्ट्री के प्रभाव के कारण इंजेक्टेबल ब्यूटी प्रोडक्ट्स का बाजार तेजी से बढ़ा है। कई छोटे क्लीनिक और अनट्रेंड ऑपरेटर “इंस्टेंट ग्लो”, “स्किन व्हाइटनिंग”, “एंटी-एजिंग रिजल्ट” जैसे दावे कर लोगों को आकर्षित कर रहे हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक ऐसे इंजेक्शन से:
- एलर्जी,
- स्किन डैमेज,
- इंफेक्शन,
- किडनी और लीवर पर असर,
- यहां तक कि जानलेवा रिएक्शन तक हो सकते हैं।
BIS की सूची का भी उल्लेख
CDSCO ने अपने नोटिस में यह भी कहा कि कई ऐसे इंग्रीडिएंट्स हैं जिन्हें Bureau of Indian Standards ने “Generally Not Recognised As Safe (GNRAS)” या प्रतिबंधित श्रेणी में रखा है। ऐसे पदार्थों का कॉस्मेटिक में उपयोग भी नियमों का उल्लंघन माना जाएगा।
द्वारा जारी मानकों के अनुसार कंपनियों को सुरक्षित सामग्री का ही इस्तेमाल करना होगा।
देशभर के क्लीनिकों पर बढ़ सकती है कार्रवाई
इस नोटिस के बाद अब राज्यों के ड्रग कंट्रोल विभाग, ब्यूटी क्लीनिक, स्किन सेंटर और एस्थेटिक चेन की जांच तेज कर सकते हैं। सूत्रों के अनुसार कई राज्यों में ऐसे क्लीनिकों की सूची तैयार की जा रही है जो इंजेक्टेबल कॉस्मेटिक सेवाएं दे रहे हैं।
विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले दिनों में:
- फर्जी स्किन क्लीनिकों पर छापे,
- बिना लाइसेंस ब्यूटी सेंटरों की जांच,
- और भ्रामक विज्ञापनों पर कार्रवाई बढ़ सकती है।
जनता से भी मांगी मदद
CDSCO ने आम लोगों से अपील की है कि यदि कहीं कॉस्मेटिक इंजेक्शन, भ्रामक ब्यूटी ट्रीटमेंट या संदिग्ध उत्पादों का इस्तेमाल होता दिखे तो उसकी जानकारी Regulatory Authority को दी जाए।
सरकार ने इसके लिए आधिकारिक ईमेल भी जारी किया है: cosmetics@cdsco.nic.in
बड़ा सवाल: क्या ब्यूटी इंडस्ट्री पर लगेगा ब्रेक?
सरकार के इस नोटिस ने देश की तेजी से बढ़ती एस्थेटिक और कॉस्मेटिक इंडस्ट्री में हलचल मचा दी है। करोड़ों रुपये के इस कारोबार में अब नियमों का पालन, वैज्ञानिक प्रमाण और उपभोक्ता सुरक्षा सबसे बड़ा मुद्दा बनते दिखाई दे रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर सख्ती से नियम लागू हुए तो “इंस्टेंट ब्यूटी” के नाम पर चल रहे कई अवैध कारोबार बंद हो सकते हैं।



