297 डे-केयर कैंसर सेंटरों को मंजूरी: जिला अस्पतालों में ही मिलेगा इलाज, मरीजों को बड़ी राहत

297 डे-केयर कैंसर सेंटरों को मंजूरी: जिला अस्पतालों में ही मिलेगा इलाज, मरीजों को बड़ी राहत

नई दिल्ली। कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा और राहतभरा कदम उठाया है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान देशभर में 297 डे-केयर कैंसर सेंटर (DCCC) को मंजूरी दे दी है। सरकार का लक्ष्य है कि अगले तीन वर्षों में देश के सभी जिला अस्पतालों में ऐसे सेंटर स्थापित किए जाएं, ताकि मरीजों को अपने ही जिले में इलाज मिल सके और उन्हें बड़े शहरों के चक्कर न लगाने पड़ें।

क्या होता है डे-केयर कैंसर सेंटर?

डे-केयर कैंसर सेंटर ऐसे विशेष इलाज केंद्र होते हैं, जहां कैंसर मरीजों को कीमोथेरेपी और अन्य जरूरी उपचार उसी दिन देकर घर भेज दिया जाता है। मरीज को कई दिनों तक अस्पताल में भर्ती रहने की जरूरत नहीं होती। इससे अस्पतालों का बोझ भी कम होता है और मरीजों को भी सुविधा मिलती है।

इन केंद्रों को जिला अस्पतालों के परिसर में ही बनाया जाएगा। हर सेंटर में 4 से 6 बिस्तरों की व्यवस्था रहेगी। जरूरत पड़ने पर राज्य सरकारें बिस्तरों की संख्या बढ़ा सकती हैं।

कितने केंद्र चालू, कितने मंजूर?

स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, 23 राज्यों और 7 केंद्र शासित प्रदेशों में कुल 297 सेंटरों को मंजूरी दी गई है। इनमें से 13 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में 102 सेंटर पहले ही काम शुरू कर चुके हैं। बाकी केंद्रों पर तेजी से काम चल रहा है।

सरकार का इरादा था कि साल 2025-26 में 200 सेंटर स्थापित किए जाएंगे, लेकिन मंजूरी की संख्या 297 तक पहुंच गई है। इससे साफ है कि योजना को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है।

किन राज्यों को मिला सबसे ज्यादा फायदा?

जिन राज्यों में कैंसर के मामले ज्यादा हैं, वहां प्राथमिकता दी गई है।

  • उत्तर प्रदेश को सबसे ज्यादा 67 सेंटर मिले हैं।
  • तेलंगाना को 27
  • महाराष्ट्र को 26
  • बिहार को 21
  • हिमाचल प्रदेश को 18
  • झारखंड और कर्नाटक को 16-16
  • आंध्र प्रदेश को 14

इन आंकड़ों से पता चलता है कि सरकार ने उन जिलों को प्राथमिकता दी है जहां मरीजों की संख्या अधिक है और इलाज की सुविधा कम है।

कितनी है लागत?

प्रत्येक डे-केयर कैंसर सेंटर पर करीब 2.41 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

  • लगभग 91 लाख रुपये एकमुश्त खर्च (भवन, उपकरण आदि)
  • करीब 1.49 करोड़ रुपये सालाना संचालन के लिए

यह धनराशि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत राज्यों को दी जा रही है।

योजना कैसे बनी?

इस योजना को तैयार करने के लिए सरकार ने भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) के कैंसर रजिस्ट्रेशन डेटा का सहारा लिया। इससे यह पता लगाया गया कि किन जिलों में कैंसर के मरीज ज्यादा हैं और कहां इलाज की सुविधा कम है। उसके बाद राज्यों से प्रस्ताव लेकर अंतिम सूची तैयार की गई।

सरकार का कहना है कि कोशिश की गई है कि जहां पहले से बड़ी सुविधाएं मौजूद हैं, वहां दोहराव न हो और संसाधनों का सही उपयोग हो।

मरीजों को क्या होगा फायदा?

अब तक कैंसर मरीजों को कीमोथेरेपी या अन्य इलाज के लिए बड़े शहरों जैसे दिल्ली, मुंबई या राज्य की राजधानी में जाना पड़ता था। इससे इलाज का खर्च कई गुना बढ़ जाता था। यात्रा, रहने और खाने का खर्च अलग से जुड़ जाता था।

अब जिला स्तर पर ही इलाज मिलने से:

  • मरीज और उनके परिवार का खर्च कम होगा
  • इलाज समय पर शुरू हो सकेगा
  • अस्पतालों में भीड़ कम होगी
  • ग्रामीण और दूर-दराज के क्षेत्रों के मरीजों को राहत मिलेगी

स्वास्थ्य ढांचे में बड़ा बदलाव

सरकार का लक्ष्य है कि अगले तीन वर्षों में हर जिला अस्पताल में डे-केयर कैंसर सेंटर हो। इससे देश का स्वास्थ्य ढांचा मजबूत होगा और कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से लड़ने की क्षमता बढ़ेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ये सभी सेंटर समय पर पूरी क्षमता से काम करने लगते हैं, तो कैंसर मरीजों की मृत्यु दर कम करने में भी मदद मिलेगी। जल्दी जांच और समय पर इलाज से बीमारी को शुरुआती अवस्था में ही नियंत्रित किया जा सकता है।

कुल मिलाकर 297 डे-केयर कैंसर सेंटरों को मंजूरी मिलना देश के स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। यह कदम उन लाखों परिवारों के लिए उम्मीद की किरण है, जो कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं।

अगर योजना तय समय पर पूरी होती है, तो आने वाले वर्षों में कैंसर इलाज की तस्वीर बदली हुई नजर आएगी — जहां इलाज के लिए बड़े शहरों पर निर्भरता कम होगी और हर जिले में आधुनिक सुविधा उपलब्ध होगी। यह पहल न सिर्फ इलाज को आसान बनाएगी, बल्कि मरीजों को मानसिक और आर्थिक राहत भी देगी।

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