फार्मा कंपनियों को GST में बड़ी राहत, एक्सपायरी दवाओं और मुफ्त सैंपल पर ITC देने की सिफारिश

फार्मा कंपनियों को GST में बड़ी राहत, एक्सपायरी दवाओं और मुफ्त सैंपल पर ITC देने की सिफारिश

जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक में कई अहम प्रस्ताव, रिफंड प्रक्रिया आसान करने और छोटे टैक्स विवादों में राहत देने की भी तैयारी

नई दिल्ली। देश के दवा उद्योग को जीएसटी के मोर्चे पर राहत देने के लिए जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक में कई महत्वपूर्ण बदलावों की सिफारिश की गई है। इनमें एक्सपायरी होने वाली दवाओं और मुफ्त दिए जाने वाले दवा सैंपल पर इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) से जुड़ी राहत, अनुसंधान एवं विकास की प्रक्रिया को सरल बनाने और कंपनियों के फंसे हुए टैक्स रिफंड को आसान करने जैसे प्रस्ताव शामिल हैं।

इन बदलावों का उद्देश्य दवा कंपनियों पर पड़ने वाले अतिरिक्त वित्तीय बोझ को कम करना और टैक्स संबंधी प्रक्रियाओं को सरल बनाना है। हालांकि, इन सिफारिशों को लागू करने के लिए संबंधित कानूनी संशोधन और अधिसूचनाएं जारी करना जरूरी होगा।

एक्सपायरी दवाओं पर ITC की रोक हटाने का प्रस्ताव

जीएसटी परिषद ने केंद्रीय जीएसटी कानून की धारा 17(5) में संशोधन की सिफारिश की है। इसके तहत मुफ्त दवा सैंपल और शेल्फ लाइफ समाप्त होने के कारण नष्ट की गई या खातों से हटाई गई वस्तुओं पर इनपुट टैक्स क्रेडिट लेने से जुड़ी रोक हटाने का प्रस्ताव है।

दवा कंपनियों को एक्सपायरी होने वाली दवाओं का नियमानुसार निपटान करना पड़ता है। वहीं, डॉक्टरों और स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े लोगों को जानकारी देने के उद्देश्य से कंपनियां मुफ्त दवा सैंपल भी उपलब्ध कराती हैं। ऐसे मामलों में टैक्स क्रेडिट से संबंधित राहत मिलने पर कंपनियों के वित्तीय बोझ में कमी आ सकती है।

हालांकि, एक्सपायरी दवाओं के मामले में यह प्रस्ताव उन्हें बेचने या इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं देता। दवाओं की गुणवत्ता और सुरक्षा से जुड़े नियमों का पालन करना अनिवार्य रहेगा।

रिसर्च करने वाली संस्थाओं को भी राहत

परिषद ने अनुसंधान एवं विकास यानी रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) से जुड़ी सेवाओं के लिए स्व-प्रमाणन की सरल व्यवस्था की सिफारिश की है। इसके तहत संबंधित संस्थानों और संगठनों के प्रमुख यह प्रमाणित कर सकेंगे कि उनकी गतिविधियां वास्तविक अनुसंधान एवं विकास से जुड़ी हैं, न कि परामर्श सेवाएं हैं।

इससे पात्र संस्थानों को जीएसटी छूट से संबंधित प्रक्रिया पूरी करने में सुविधा मिल सकती है। दवा उद्योग में नई दवाओं के विकास और परीक्षण के लिए अनुसंधान महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में प्रक्रिया सरल होने से संबंधित संस्थानों की अनुपालन संबंधी परेशानियां कम हो सकती हैं।

फंसे हुए टैक्स रिफंड को निकालने की तैयारी

जीएसटी परिषद ने कंपनियों की कार्यशील पूंजी पर दबाव कम करने के लिए इनपुट टैक्स क्रेडिट के रिफंड से जुड़े बदलावों की भी सिफारिश की है। प्रस्ताव के अनुसार, एक नवंबर 2026 से इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर के मामलों में इनपुट सेवाओं पर जमा पात्र ITC के रिफंड की व्यवस्था प्रस्तावित है।

वहीं, एक अप्रैल 2027 से जीरो-रेटेड सप्लाई और इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर के कुछ मामलों में पूंजीगत वस्तुओं पर ITC के रिफंड की व्यवस्था प्रस्तावित है। इसके अलावा, पात्र निर्यात संबंधी मामलों में 90 प्रतिशत तक अनंतिम रिफंड को स्वचालित रूप से मंजूर करने की व्यवस्था की सिफारिश की गई है।

इससे उन कंपनियों को फायदा मिल सकता है जिनकी बड़ी रकम टैक्स क्रेडिट या रिफंड के रूप में फंसी रहती है।

टैक्स कार्रवाई और जुर्माने के नियमों में बदलाव

परिषद की सिफारिशों में जीएसटी कानून के तहत गिरफ्तारी और अभियोजन से जुड़े प्रावधानों में बदलाव भी शामिल हैं। अभियोजन शुरू करने की वित्तीय सीमा को एक करोड़ रुपये से बढ़ाकर पांच करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव रखा गया है। साथ ही, धारा 69 के तहत गिरफ्तारी की शक्तियों से संबंधित प्रावधान हटाने की सिफारिश भी की गई है।

छोटे टैक्स विवादों को कम करने के उद्देश्य से 10 हजार रुपये की न्यूनतम सीमा वाले शो-कॉज नोटिस का प्रस्ताव भी शामिल है। इसके अलावा, सामान्य जुर्माने को 25 हजार रुपये से घटाकर 10 हजार रुपये करने और केवल जुर्माने से जुड़े अपील मामलों में प्री-डिपॉजिट की अधिकतम सीमा 40 करोड़ रुपये निर्धारित करने की सिफारिश की गई है।

दवा उद्योग को क्या होगा फायदा?

फार्मा उद्योग में उत्पादन से लेकर पैकेजिंग, गुणवत्ता जांच, अनुसंधान और दवाओं के वितरण तक कई स्तरों पर खर्च होता है। एक्सपायरी दवाओं और मुफ्त सैंपल पर ITC से जुड़ी राहत तथा रिफंड प्रक्रिया आसान होने से कंपनियों की लागत और नकदी प्रबंधन पर सकारात्मक असर पड़ सकता है।

हालांकि, इन प्रस्तावों से दवाओं की कीमतें तुरंत कम होंगी, यह कहना अभी उचित नहीं होगा। इसका वास्तविक असर संबंधित नियमों के लागू होने और कंपनियों की लागत में होने वाले बदलावों के बाद ही स्पष्ट होगा।

जीएसटी परिषद की सिफारिशों को लागू करने के लिए आधिकारिक अधिसूचनाओं और आवश्यक कानूनी संशोधनों का इंतजार करना होगा।

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