पिरान कलियर में मेडिकल स्टोर पर STF और FDA की छापेमारी, ट्रामाडोल कैप्सूल व कोडीन युक्त कफ सिरप बरामद

पिरान कलियर में मेडिकल स्टोर पर STF और FDA की छापेमारी, ट्रामाडोल कैप्सूल व कोडीन युक्त कफ सिरप बरामद

1150 बिना लेबल वाले कैप्सूल और कोडीन युक्त कफ सिरप की 10 बोतलें मिलीं, खरीद-बिक्री का रिकॉर्ड और वैध दस्तावेज नहीं दिखा सका मेडिकल स्टोर संचालक

हरिद्वार/रुड़की,  उत्तराखंड में मादक एवं मनःप्रभावी दवाओं के अवैध कारोबार के खिलाफ चल रही कार्रवाई के बीच पिरान कलियर क्षेत्र में एसटीएफ देहरादून और खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FDA) की संयुक्त टीम ने एक मेडिकल स्टोर पर छापेमारी की। कार्रवाई में कोडीन युक्त कफ सिरप की 10 बोतलें और 1150 संदिग्ध कैप्सूल बरामद किए गए।

यह कार्रवाई 15 सितंबर 2026 को विश्वसनीय मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर एम/एस मोनी मेडिकल स्टोर, सोहलपुर रोड, पिरान कलियर, तहसील रुड़की, जनपद हरिद्वार में की गई।

गुप्त सूचना पर पहुंची संयुक्त टीम

प्राप्त जानकारी के अनुसार मेडिकल स्टोर से मादक एवं मनःप्रभावी औषधियों के कथित अवैध भंडारण और बिक्री की सूचना STF को मिली थी। इसके बाद STF देहरादून और FDA के अधिकारियों ने संयुक्त रूप से मेडिकल स्टोर की तलाशी ली।

कार्रवाई में STF देहरादून के साथ औषधि निरीक्षक विनोद जगूड़ी, देहरादून तथा औषधि निरीक्षक हरीश सिंह, हरिद्वार शामिल रहे।

1150 कैप्सूल मूल पैकिंग से बाहर मिले

तलाशी के दौरान टीम को “Puroxowin” अंकित 1150 मैरून रंग के कैप्सूल मिले। प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार ये कैप्सूल अपनी मूल पैकिंग या ब्लिस्टर में नहीं थे, बल्कि डिफॉइल अवस्था में पाए गए।

मामले का यह पहलू जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि दवाओं की पहचान, स्रोत और वैध आपूर्ति श्रृंखला की जांच के लिए उनकी पैकिंग और दस्तावेज महत्वपूर्ण होते हैं।

कोडीन युक्त कफ सिरप भी बरामद

छापेमारी के दौरान Codectus-TR कफ सिरप की 10 बोतलें भी बरामद हुईं। प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक यह कफ सिरप कोडीन युक्त है।

कोडीन युक्त दवाओं के भंडारण और बिक्री को लेकर निर्धारित कानूनी प्रावधानों का पालन जरूरी होता है। ऐसे में टीम ने बरामद दवाओं के स्रोत और मेडिकल स्टोर पर उनके रखे जाने की वैधता की जांच शुरू कर दी है।

न खरीद का बिल, न स्टॉक रजिस्टर और न पर्चे

निरीक्षण के दौरान मेडिकल स्टोर संचालक से बरामद दवाओं के संबंध में क्रय-विक्रय अभिलेख, स्टॉक रजिस्टर, चिकित्सकीय पर्चे अथवा वैध कब्जे से संबंधित दस्तावेज मांगे गए।

प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार संचालक इन दवाओं के संबंध में आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका।

इसके बाद टीम ने बरामद सभी औषधियों की मौके पर इन्वेंटरी तैयार की और उन्हें विधिक कार्रवाई के लिए अपने कब्जे में ले लिया।

NDPS Act में FIR, अब जांच से खुलेगा पूरा नेटवर्क

बरामदगी के आधार पर STF देहरादून द्वारा NDPS Act, 1985 के अंतर्गत FIR दर्ज कर अग्रिम विवेचना शुरू कर दी गई है।

अब जांच में यह पता लगाया जाएगा कि बरामद कैप्सूल और कफ सिरप कहां से खरीदे गए, किसके माध्यम से मेडिकल स्टोर तक पहुंचे और इनकी बिक्री किन लोगों को की जा रही थी।

इसके साथ ही जांच एजेंसियां यह भी देख सकती हैं कि दवाओं की सप्लाई से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध हैं या नहीं और कहीं इसके पीछे कोई बड़ा सप्लाई नेटवर्क तो सक्रिय नहीं है।

मेडिकल स्टोरों पर निगरानी बढ़ने के संकेत

ट्रामाडोल और कोडीन जैसी दवाओं के दुरुपयोग को लेकर सुरक्षा एजेंसियां और औषधि प्रशासन लगातार कार्रवाई करते रहे हैं। पिरान कलियर की यह कार्रवाई भी इसी दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

खासकर ऐसी दवाएं यदि बिना उचित रिकॉर्ड, मूल पैकिंग अथवा वैध चिकित्सकीय दस्तावेजों के साथ मिलती हैं, तो उनके स्रोत और वितरण की जांच महत्वपूर्ण हो जाती है।

फिलहाल मामले में FIR दर्ज होने के बाद आगे की जांच STF द्वारा की जा रही है। बरामद कैप्सूल की वास्तविक दवा/सक्रिय घटक और उसकी कानूनी स्थिति से संबंधित अंतिम निष्कर्ष जांच और आवश्यक परीक्षण/दस्तावेजी सत्यापन के आधार पर ही सामने आएगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *