हरिद्वार के एमसीएच विंग में पहली बड़ी सफलता: जच्चा-बच्चा सुरक्षित, तकनीकी समस्याओं के बीच डॉक्टरों ने संभाला मोर्च

हरिद्वार के एमसीएच विंग में पहली बड़ी सफलता: जच्चा-बच्चा सुरक्षित, तकनीकी समस्याओं के बीच डॉक्टरों ने संभाला मोर्च

हरिद्वार। जिले के महिला चिकित्सालय स्थित मातृत्व एवं शिशु स्वास्थ्य (MCH) विंग में शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण चिकित्सीय उपलब्धि दर्ज की गई। नवस पैथोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड द्वारा संचालित एमसीएच विंग में पहली बार एक सफल एलएससीएस (Lower Segment Cesarean Section) ऑपरेशन किया गया, जिसमें जच्चा और बच्चा दोनों सुरक्षित हैं। हालांकि इस दौरान अस्पताल प्रशासन को एमसीए किटिंग पोर्टल से जुड़ी तकनीकी समस्याओं का भी सामना करना पड़ा, जिसके समाधान के लिए मुख्य चिकित्सा अधिकारी को पत्र भेजकर हस्तक्षेप की मांग की गई है।

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प्राप्त जानकारी के अनुसार हरिपुर कलां निवासी 24 वर्षीय काजल पाठक को प्रसव पीड़ा होने पर शुक्रवार दोपहर एमसीएच विंग में भर्ती कराया गया। महिला को प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग में भर्ती कर तत्काल चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया। मरीज का उपचार डॉ. सुरभि खेतवाल (एमबीबीएस, एमएस) की देखरेख में किया गया।

अस्पताल द्वारा जारी आईपीडी एडमिशन समरी के अनुसार महिला का सफल ऑपरेशन कर स्वस्थ बच्ची का जन्म कराया गया। यह एमसीएच विंग का पहला आईपीडी और पहला एलएससीएस केस बताया जा रहा है, जिसे अस्पताल प्रशासन अपनी बड़ी उपलब्धि मान रहा है।

तकनीकी समस्या बनी चुनौती

सूत्रों के अनुसार ऑपरेशन के दौरान और बाद में एमसीए किटिंग पोर्टल पर तकनीकी दिक्कतें सामने आईं। इसी संबंध में नवस पैथोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड की ओर से मुख्य चिकित्सा अधिकारी को पत्र भेजा गया। पत्र में कहा गया कि पोर्टल पर लगातार तकनीकी समस्या आने से प्रक्रिया प्रभावित हो रही है और समय पर एंट्री तथा आवश्यक कार्यवाही में बाधा उत्पन्न हो रही है।

पत्र में यह भी उल्लेख किया गया कि मरीज के अस्पताल पहुंचते ही क्लिनिकल टीम ने तुरंत सक्रिय होकर आवश्यक चिकित्सा प्रक्रिया शुरू की, जिसके बाद सफल ऑपरेशन कर बच्ची को सुरक्षित जन्म दिलाया गया। वर्तमान में मां और नवजात दोनों चिकित्सकीय निगरानी में हैं।

अस्पताल प्रबंधन ने सीएमओ से अनुरोध किया है कि इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए जल्द समाधान कराया जाए ताकि भविष्य में मरीजों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।

पीपीपी मॉडल पर संचालित हो रहा है एमसीएच विंग

गौरतलब है कि हरिद्वार जिला महिला अस्पताल के एमसीएच विंग का संचालन पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत किया जा रहा है। इस परियोजना का संचालन नवस पैथोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड द्वारा किया जा रहा है। अस्पताल प्रशासन का दावा है कि इस व्यवस्था से मरीजों को बेहतर सुविधाएं, आधुनिक चिकित्सा उपकरण और विशेषज्ञ चिकित्सकीय सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

बताया जा रहा है कि अस्पताल में अत्याधुनिक मातृत्व सेवाएं, नवजात शिशु देखभाल, आपातकालीन प्रसूति सुविधाएं और विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती की गई है। प्रशासन इसे हरिद्वार की स्वास्थ्य सेवाओं के लिए बड़ा कदम मान रहा है।

पहली डिलीवरी बनी चर्चा का विषय

एमसीएच विंग में हुए पहले सफल ऑपरेशन और बच्ची के जन्म को लेकर अस्पताल स्टाफ में उत्साह देखा गया। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का मानना है कि यदि तकनीकी व्यवस्थाएं सुचारु रहीं तो आने वाले समय में यह केंद्र हरिद्वार और आसपास के क्षेत्रों की महिलाओं के लिए बड़ी राहत साबित हो सकता है।

जानकारों का कहना है कि सरकारी अस्पतालों में आधुनिक मातृत्व सेवाओं की कमी लंबे समय से महसूस की जा रही थी। ऐसे में पीपीपी मॉडल पर संचालित यह परियोजना स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास मानी जा रही है।

अधिकारियों को भेजी गई प्रतिलिपि

सीएमओ को भेजे गए पत्र की प्रतिलिपि जिलाधिकारी हरिद्वार, निदेशक पीपीपी चिकित्सा परियोजना, प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक सहित अन्य संबंधित अधिकारियों को भी भेजी गई है। इससे स्पष्ट है कि अस्पताल प्रशासन इस तकनीकी समस्या को गंभीर मानते हुए उच्च स्तर पर समाधान चाहता है।

स्वास्थ्य सेवाओं पर उठ रहे सवाल

हालांकि इस सफलता के बीच तकनीकी खामियों ने स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की तैयारियों पर सवाल भी खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जब किसी अस्पताल में नई परियोजना शुरू होती है तो डिजिटल पोर्टल और तकनीकी सिस्टम पूरी तरह सक्रिय होना बेहद आवश्यक होता है। यदि शुरुआती चरण में ही पोर्टल संबंधी समस्याएं सामने आती हैं तो इसका असर मरीजों की सेवाओं पर पड़ सकता है।

फिलहाल जच्चा और बच्चा दोनों सुरक्षित बताए जा रहे हैं और अस्पताल प्रशासन इसे सफल शुरुआत के रूप में प्रस्तुत कर रहा है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि स्वास्थ्य विभाग तकनीकी समस्याओं का समाधान कितनी तेजी से करता है और यह नई व्यवस्था आम लोगों के लिए कितनी कारगर साबित होती है।

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