दिल्ली में मौत का कारोबार! नकली कैंसर दवाइयों के रैकेट का भंडाफोड़, 10 करोड़ की फर्जी दवाएं बरामद

दिल्ली में मौत का कारोबार! नकली कैंसर दवाइयों के रैकेट का भंडाफोड़, 10 करोड़ की फर्जी दवाएं बरामद

गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़, पुलिस ने 4 आरोपियों को दबोचा; 90 हजार से ज्यादा कैप्सूल और मशीनें जब्त

दिल्ली :-   देश की राजधानी दिल्ली में नकली दवाइयों के एक ऐसे खतरनाक नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है, जिसने पूरे स्वास्थ्य तंत्र को हिलाकर रख दिया है। कैंसर, लीवर और दूसरी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ करने वाले एक बड़े गिरोह का पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। इस मामले में मास्टरमाइंड समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने छापेमारी के दौरान 90 हजार से ज्यादा नकली कैप्सूल, भारी मात्रा में दवाइयां, पैकेजिंग सामग्री और मशीनें बरामद की हैं, जिनकी बाजार कीमत करीब 10 करोड़ रुपये बताई जा रही है।

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इस खुलासे ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर मरीजों तक पहुंच रही दवाइयां कितनी सुरक्षित हैं? खासकर तब, जब नकली दवाओं का यह जाल कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों तक फैल चुका हो।

पुलिस जांच के अनुसार, इस पूरे रैकेट का मास्टरमाइंड मनोज कुमार मिश्रा है, जो मूल रूप से मणिपुर का रहने वाला बताया गया है। आरोपी ने कोरोना महामारी के दौरान ग्लव्स और मास्क बनाने का काम शुरू किया था। लेकिन महामारी के बाद कारोबार में घाटा होने पर उसने अपराध की दुनिया में कदम रख दिया और नकली दवाइयों का धंधा शुरू कर दिया।

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बताया जा रहा है कि वर्ष 2022 में उसने “यूनिटेल फार्मा” नाम से नेटवर्क तैयार किया और गंभीर बीमारियों में इस्तेमाल होने वाली नकली दवाओं का निर्माण शुरू कर दिया। जांच एजेंसियों के मुताबिक, आरोपी असली कंपनियों की पैकेजिंग की हूबहू कॉपी तैयार करते थे, जिससे मरीजों और मेडिकल स्टोर संचालकों को जरा भी शक नहीं होता था।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह गिरोह कैंसर थेरेपी में इस्तेमाल होने वाली महंगी दवाइयों को भी नकली रूप में बाजार में उतार रहा था। ऐसे मरीज, जो जिंदगी बचाने की उम्मीद में लाखों रुपये खर्च कर दवाइयां खरीदते हैं, उन्हें असली इलाज की जगह जहर परोसा जा रहा था।

पुलिस के मुताबिक, इस रैकेट का नेटवर्क केवल दिल्ली तक सीमित नहीं था। नकली दवाइयों की सप्लाई पूर्वोत्तर और पूर्वी भारत के कई राज्यों तक की जा रही थी। आशंका है कि यह गिरोह लंबे समय से सक्रिय था और करोड़ों रुपये का अवैध कारोबार कर चुका है।

इस मामले में गिरफ्तार अन्य आरोपियों की पहचान राजू मिश्रा, विक्रम सिंह और वतन सैनी के रूप में हुई है। जांच में सामने आया है कि विक्रम सिंह और वतन सैनी कथित रूप से CGHS सप्लाई से जुड़ी दवाओं को डायवर्ट कर मुख्य आरोपी तक पहुंचाते थे। इससे यह शक भी गहरा गया है कि कहीं सरकारी दवा आपूर्ति प्रणाली में भी बड़ा भ्रष्ट नेटवर्क सक्रिय तो नहीं।

अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि क्या सरकारी सप्लाई चैन से जुड़े अन्य लोग भी इस गिरोह का हिस्सा थे। अगर ऐसा साबित होता है तो यह मामला केवल नकली दवाओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था में बड़े घोटाले का रूप ले सकता है।

छापेमारी के दौरान पुलिस ने जिस मात्रा में नकली दवाइयां बरामद की हैं, उसने अधिकारियों को भी हैरान कर दिया। मौके से दवा निर्माण में इस्तेमाल होने वाली मशीनें, रैपर, फर्जी लेबल, पैकेजिंग सामग्री और कई संदिग्ध दस्तावेज जब्त किए गए हैं। शुरुआती जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि आरोपी बेहद संगठित तरीके से काम कर रहे थे और अलग-अलग राज्यों में सप्लाई चैन बना चुके थे।

विशेषज्ञों का कहना है कि नकली दवाइयां केवल आर्थिक अपराध नहीं, बल्कि “साइलेंट मर्डर” जैसी स्थिति पैदा करती हैं। खासकर कैंसर और लीवर जैसी गंभीर बीमारियों में अगर मरीज को असली दवा की जगह नकली दवा मिल जाए, तो उसका इलाज पूरी तरह फेल हो सकता है। कई मामलों में मरीज की मौत तक हो सकती है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, नकली दवाओं का बाजार लगातार बढ़ता जा रहा है क्योंकि महंगी दवाओं की मांग बहुत ज्यादा है और मरीज किसी भी कीमत पर इलाज करवाने को मजबूर होते हैं। इसी मजबूरी का फायदा उठाकर ऐसे गिरोह लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ करते हैं।

दिल्ली पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि किन-किन मेडिकल स्टोर्स, एजेंटों और सप्लाई चैन के जरिए ये नकली दवाइयां बाजार तक पहुंच रही थीं।

इस सनसनीखेज खुलासे ने देशभर में दवा सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। सवाल यह भी है कि आखिर इतनी बड़ी मात्रा में नकली दवाइयों का कारोबार लंबे समय तक बिना किसी निगरानी के कैसे चलता रहा? अब लोगों की नजर पुलिस जांच और स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई पर टिकी है।

फिलहाल, दिल्ली पुलिस की इस कार्रवाई को नकली दवाओं के खिलाफ बड़ी सफलता माना जा रहा है, लेकिन यह मामला साफ संकेत देता है कि देश में दवा माफिया का नेटवर्क बेहद गहरा और खतरनाक हो चुका है।

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