देश में नकली दवाओं का बड़ा खेल बेनकाब! 4 अहम दवाएं ‘स्प्यूरियस’ के शक में, जांच के बाद चौंकाने वाले खुलासे संभव
CDSCO अलर्ट से मचा हड़कंप—जिन कंपनियों के नाम पर दवाएं बिक रहीं, उन्होंने ही खड़े किए हाथ
देश में दवा सुरक्षा को लेकर एक बार फिर बड़ा खतरा सामने आया है। Central Drugs Standard Control Organisation (CDSCO) की ताजा NSQ (Not of Standard Quality) अलर्ट रिपोर्ट में 4 महत्वपूर्ण दवाओं को स्प्यूरियस (नकली) होने के शक में चिन्हित किया गया है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिन कंपनियों के नाम इन दवाओं के लेबल पर लिखे गए हैं, उन्होंने साफ कह दिया है—“यह दवा हमने बनाई ही नहीं”।
कौन-कौन सी दवाएं शक के घेरे में?
फरवरी 2026 की रिपोर्ट में शामिल दवाएं:
- Betamethasone + Clioquinol Cream
- Urseodeoxycholic Acid Tablets 300 mg
- Clobetasol + Gentamicin Cream
- Amoxycillin + Clavulanate Tablets
इन सभी दवाओं के बैच नंबर, निर्माण और एक्सपायरी डेट तक फर्जी तरीके से इस्तेमाल किए गए हैं।
जांच में क्या सामने आया?
- कोलकाता और असम की सरकारी लैब्स में टेस्टिंग के दौरान मामला पकड़ा गया
- हर केस में मैन्युफैक्चरर “Under Investigation” पाया गया
- असली कंपनियों ने जवाब दिया—
👉 “यह बैच हमारा नहीं है, यह पूरी तरह नकली (Spurious) है”
यानी साफ है कि ब्रांड का नाम चुराकर बाजार में नकली दवाएं बेची जा रही हैं
“स्प्यूरियस दवा” क्या होती है?
ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट 1940 के सेक्शन 17-B के अनुसार:
- किसी दूसरी कंपनी के नाम से बनाई गई दवा
- असली जैसी दिखने वाली नकली दवा
- फर्जी कंपनी के नाम पर बनी दवा
- या असली दवा की जगह कुछ और मिलाकर बनाई गई दवा
👉 ये सभी स्प्यूरियस (नकली) दवा की श्रेणी में आती हैं
क्यों खतरनाक है ये मामला?
- ये दवाएं स्किन, लिवर और इन्फेक्शन जैसी गंभीर बीमारियों में इस्तेमाल होती हैं
- नकली दवा लेने से:
- इलाज फेल हो सकता है
- रिएक्शन या साइड इफेक्ट बढ़ सकते हैं
- मरीज की जान तक खतरे में पड़ सकती है
सिस्टम पर भी सवाल
- अगर ये दवाएं बाजार में पहुंच गईं, तो ड्रग इंस्पेक्शन सिस्टम कहां था?
- क्या होलसेल-रिटेल चैन में निगरानी कमजोर है?
- क्या ऑनलाइन और छोटे सप्लायर्स के जरिए नकली दवाओं का नेटवर्क फैल रहा है?
अब क्या होगा आगे?
- CDSCO ने जांच तेज कर दी है
- संबंधित राज्यों को कार्रवाई के निर्देश
- मैन्युफैक्चरिंग सोर्स और सप्लाई चैन की ट्रेसिंग शुरू
बड़ी चेतावनी
यह मामला सिर्फ 4 दवाओं तक सीमित नहीं है—
यह संकेत है कि देश में नकली दवाओं का संगठित नेटवर्क सक्रिय है
जनता के लिए सलाह
- बिना बिल के दवा न खरीदें
- पैकिंग और बैच नंबर जरूर जांचें
- शक होने पर तुरंत ड्रग विभाग को सूचना दें
दवा, जो जिंदगी बचाने का जरिया होती है, अगर वही नकली निकले तो यह सिर्फ अपराध नहीं—जनता की जान से खिलवाड़ है। अब सवाल यह है कि क्या सिस्टम इस “जहर के कारोबार” पर लगाम लगा पाएगा या नहीं?



