स्वास्थ्य से समझौता या मुनाफे का सौदा? संसद में उठा फार्मा कंपनियों का खतरनाक सच

 


स्वास्थ्य से समझौता या मुनाफे का सौदा? संसद में उठा फार्मा कंपनियों का खतरनाक सच

मुनाफे की खातिर पेरिस की सैर! 2 करोड़ खर्च कर 30 डॉक्टरों को विदेश घुमाया, फार्मा कंपनियों का खतरनाक खेल बेनकाब

नई दिल्ली। देश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर एक बार फिर गंभीर और असहज करने वाले सवाल खड़े हो गए हैं। राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल ने संसद और सोशल मीडिया के ज़रिए फार्मा कंपनियों के उस काले सच को सामने रखा है, जिसमें मरीजों की सेहत से ज़्यादा मुनाफे को प्राथमिकता दी जा रही है।

सांसद ने खुलासा किया कि वर्ष 2024 में एक बड़ी फार्मा कंपनी ने करीब 2 करोड़ रुपये खर्च कर भारत के 30 डॉक्टरों को पेरिस घुमाया, ताकि वे कंपनी की दवाएं और इंजेक्शन मरीजों को अधिक से अधिक लिखें।

स्वाति मालीवाल ने इस पूरे मामले से जुड़ा वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर साझा करते हुए इसे गैर-कानूनी, अनैतिक और मरीजों के साथ खुला धोखा करार दिया


लालच की दवा, विदेश की टिकट!

सांसद ने अपने पोस्ट में साफ कहा कि यह कोई अकेला या नया मामला नहीं है। उनके मुताबिक फार्मा कंपनियां लंबे समय से डॉक्टरों और अस्पतालों को तरह-तरह के लालच देती आ रही हैं, जिनमें शामिल हैं—

  • महंगी विदेश यात्राएं
  • कीमती गिफ्ट और सुविधाएं
  • कैश इंसेंटिव
  • हर इंजेक्शन या दवा पर सीधा कमीशन

शर्त सिर्फ एक— मरीज को वही दवा या इंजेक्शन लिखिए, चाहे उसकी वास्तविक ज़रूरत हो या नहीं।


“ज्यादा इंजेक्शन लिखो, पेरिस पक्का”

स्वाति मालीवाल ने वीडियो में चौंकाने वाला दावा करते हुए कहा कि कई मामलों में डॉक्टरों से यह तक कहा जाता है कि यदि किसी खास इंजेक्शन या दवा की सेल्स वॉल्यूम बढ़ी, तो उनकी विदेश यात्रा तय मानी जाएगी।

यह पूरा सिस्टम मरीजों की जेब ही नहीं, बल्कि उनकी सेहत पर भी सीधा हमला है।


मरीज बन रहा है मुनाफे का साधन

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की प्रैक्टिस का सीधा असर आम मरीजों पर पड़ता है—

  • मरीजों को अनावश्यक और महंगी दवाएं दी जाती हैं
  • इलाज का खर्च कई गुना बढ़ जाता है
  • डॉक्टर-मरीज के भरोसेमंद रिश्ते की नींव कमजोर पड़ती है

यह सिर्फ भ्रष्टाचार नहीं, बल्कि स्वास्थ्य के नाम पर अपराध है।


संसद में सरकार से सीधे और तीखे सवाल

राज्यसभा सांसद ने सरकार से साफ-साफ पूछा—

  1. उस फार्मा कंपनी के खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई की गई, जिसने डॉक्टरों को फ्रांस घुमाया?
  2. क्या सरकार डॉक्टरों और फार्मा कंपनियों की मिलीभगत पर लगाम लगाने के लिए कोई सख्त कानून लाने जा रही है?
  3. मरीजों को इस लूट से बचाने के लिए ठोस और प्रभावी नियम कब लागू होंगे?

कानून मौजूद, लेकिन कार्रवाई नदारद

गौरतलब है कि मेडिकल काउंसिल और ड्रग कानूनों में डॉक्टरों को उपहार, ट्रैवल और नकद लाभ लेने से रोकने के प्रावधान पहले से मौजूद हैं, लेकिन ज़मीनी स्तर पर इनका पालन बेहद कमजोर है।


पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था कटघरे में

यह मामला सिर्फ एक कंपनी या कुछ डॉक्टरों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश की पूरी हेल्थकेयर व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है—
क्या अब इलाज बीमारी के आधार पर होगा या कमीशन के हिसाब से?


जनता को जवाब चाहिए

स्वाति मालीवाल का यह खुलासा एक साफ चेतावनी है। अगर समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो आम मरीज इलाज के साथ-साथ इंसाफ के लिए भी भटकता नजर आएगा।


 

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