मिलावटी दवाओं पर केंद्र की सख्ती: 905 इकाइयों का निरीक्षण, 694 पर कार्रवाई, क्यूआर कोड से होगी पहचान
नई दिल्ली, —देश में मिलावटी, नकली और मानक गुणवत्ता से कम दर्जे की दवाओं के खिलाफ केंद्र सरकार ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय और केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) ने राज्य नियामक एजेंसियों के साथ मिलकर देशभर में जोखिम-आधारित निरीक्षण किए, जिसमें 905 दवा निर्माण इकाइयों की जांच की गई और 694 पर सख्त प्रवर्तन कार्रवाइयां की गईं। इन कार्रवाइयों में उत्पादन रोकने के आदेश, लाइसेंस निलंबन/रद्दीकरण, चेतावनी पत्र और कारण बताओ नोटिस शामिल हैं।
सरकार का कहना है कि यह मुहिम सिर्फ दवा फैक्ट्रियों तक सीमित नहीं है, बल्कि दवा की पैकेजिंग, ट्रैकिंग और उपभोक्ताओं द्वारा उसकी प्रामाणिकता की पुष्टि तक फैली हुई है। इसके लिए दवाओं और सक्रिय औषधि संघटकों (एपीआई) पर अनिवार्य क्यूआर/बारकोड सिस्टम लागू किया गया है, जिससे मोबाइल एप्लिकेशन के जरिये दवा की जानकारी और असली-नकली की पहचान तुरंत की जा सकेगी।
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निरीक्षण का नया मॉडल: जोखिम-आधारित जांच
दिसंबर 2022 में सीडीएससीओ और राज्य औषधि नियामकों ने संयुक्त रूप से जोखिम-आधारित निरीक्षण प्रणाली शुरू की थी। इसके तहत, उन निर्माण इकाइयों को प्राथमिकता से जांचा गया जिन पर गुणवत्ता को लेकर संदेह था या जिनका अतीत संदिग्ध रहा है। अब तक की कार्रवाई में:
905 दवा इकाइयों का निरीक्षण
694 प्रवर्तन कार्रवाइयां — जिसमें
उत्पादन रोकने के आदेश (SPO)
परीक्षण रोकने के आदेश (STO)
लाइसेंस निलंबन या रद्दीकरण
चेतावनी पत्र
कारण बताओ नोटिस
सरकार का कहना है कि इस प्रक्रिया ने जमीनी हकीकत उजागर की है और सुधारात्मक कदम उठाने का मौका दिया है, जिससे नियामक ढांचा मजबूत हुआ है।
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क्यूआर कोड से नकली दवा की पहचान
17 नवंबर 2022 को अधिसूचना जीएसआर 823 (ई) के तहत औषधि नियमावली, 1945 में संशोधन किया गया, जो 1 अगस्त 2023 से लागू हो गया। इसके अनुसार, अनुसूची-एच2 में सूचीबद्ध शीर्ष 300 ब्रांडों के दवा उत्पादों के निर्माता को अपने प्राथमिक पैकेजिंग लेबल पर क्यूआर/बारकोड लगाना अनिवार्य है।
यदि प्राथमिक पैक में जगह कम हो तो इसे द्वितीयक पैक पर लगाया जा सकता है। यह कोड एक सॉफ्टवेयर एप्लिकेशन द्वारा पढ़ा जा सकेगा और इसमें बैच नंबर, निर्माण तिथि, समाप्ति तिथि, उत्पाद आईडी आदि जरूरी जानकारी होगी।
18 जनवरी 2022 को जीएसआर 20 (ई) अधिसूचना के तहत सभी एपीआई पर भी यही नियम लागू किया गया।
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जन जागरूकता और उपभोक्ता सहभागिता
सीडीएससीओ ने अपनी वेबसाइट पर सभी अधिसूचनाएं प्रकाशित की हैं और उद्योग जगत को जन जागरूकता अभियान चलाने की सलाह दी है। साथ ही, उपभोक्ताओं को बताया गया है कि वे बारकोड या क्यूआर कोड स्कैन कर दवा की असलियत जांच सकते हैं।
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गुणवत्ता निगरानी और ड्रग अलर्ट सिस्टम
मासिक ड्रग अलर्ट — जिन नमूनों की गुणवत्ता जांच में कमी पाई जाती है, उनकी सूची सार्वजनिक रूप से वेबसाइट पर जारी होती है।
तत्काल रीकॉल — मानक से कम गुणवत्ता पाई जाने पर कंपनियों को तुरंत बाजार से दवा हटाने का आदेश।
लाइसेंस निलंबन/रद्दीकरण — गंभीर मामलों में सीधा लाइसेंस निरस्त।
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नई अनुसूची-एम और जीएमपी मानक
28 दिसंबर 2023 को जीएसआर 922 (ई) के तहत औषधि नियम 1945 में संशोधन कर अनुसूची-एम में बदलाव किए गए।
₹250 करोड़ से अधिक कारोबार वाले निर्माता — 29 जून 2024 से नए मानक लागू।
₹250 करोड़ से कम कारोबार वाले निर्माता — 31 दिसंबर 2025 तक सशर्त विस्तार, बशर्ते उन्नयन योजना प्रस्तुत की हो।
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मानकीकृत नमूनाकरण दिशानिर्देश
फरवरी 2024 में, दवा, कॉस्मेटिक और चिकित्सा उपकरणों के नमूने लेने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर एक समान प्रक्रिया जारी की गई, जिसमें:
जोखिम-आधारित चयन
ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों से सैंपल
तय संख्या और मात्रा
परीक्षण प्रयोगशालाओं की सख्त भूमिका
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‘सुगम लैब्स’ पोर्टल
सितंबर 2023 से लागू यह ऑनलाइन पोर्टल देशभर की दवा परीक्षण प्रयोगशालाओं को जोड़ता है। इससे परीक्षण की पूरी प्रक्रिया स्वचालित और पारदर्शी हो गई है।
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कड़े दंड और विशेष न्यायालय
2008 में कानून संशोधन कर नकली/मिलावटी दवाओं के निर्माण के लिए सख्त सजा और कई अपराधों को गैर-जमानती बनाया गया।
राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में विशेष न्यायालय स्थापित।
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मानव संसाधन और प्रशिक्षण में वृद्धि
पिछले 10 वर्षों में सीडीएससीओ में स्वीकृत पदों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है।
2023-24 में 22,854 लोगों को प्रशिक्षण
2024-25 में लक्ष्य 20,551 लोगों का प्रशिक्षण
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भविष्य की दिशा
केंद्र सरकार का मानना है कि
1. तकनीकी समाधान (क्यूआर कोड, ऑनलाइन पोर्टल)
2. कानूनी सख्ती
3. उपभोक्ता सहभागिता
4. राज्यों के साथ समन्वय
— ये सभी मिलकर देश में नकली और मिलावटी दवाओं के बाजार को समाप्त करने में अहम भूमिका निभाएंगे।
राज्यसभा में राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने कहा,
> “जनता का स्वास्थ्य सर्वोपरि है। हम मिलावटी और नकली दवाओं के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रहे हैं और यह मुहिम लगातार जारी रहेगी।”