हरिद्वार में रियल एस्टेट का दोहरा खेल: HRDA की आड़, RERA से दूरी, रजिस्ट्री से वैधता—खरीदारों के साथ बड़ा धोखा
HRDA अप्रूवल दिखाकर बिना RERA बेचे जा रहे प्लॉट, रजिस्ट्रेशन विभाग की लापरवाही से बढ़ा अवैध कारोबार
सोशल मीडिया, वेबसाइट और होर्डिंग से खुला प्रचार—प्रशासन की निष्क्रियता पर उठे सवाल
हरिद्वार, धार्मिक और तेजी से विकसित हो रहे शहर हरिद्वार में रियल एस्टेट सेक्टर इन दिनों गंभीर अनियमितताओं के दौर से गुजर रहा है। Real Estate Regulatory Authority (RERA) कानून लागू होने के बावजूद जिले में अवैध प्लॉटिंग और बिना रजिस्ट्रेशन प्रॉपर्टी बिक्री का खेल तेजी से फैल रहा है। अब इस पूरे मामले में एक नया और चिंताजनक ट्रेंड सामने आया है—जहां कॉलोनाइजर Haridwar-Roorkee Development Authority (HRDA) से किसी स्तर की स्वीकृति लेकर RERA से बचते हुए खुलेआम प्लॉट बेच रहे हैं, और रजिस्ट्रेशन विभाग की कार्यप्रणाली इस पूरे खेल को अप्रत्यक्ष रूप से बढ़ावा देती नजर आ रही है।
HRDA की मंजूरी, RERA से बचाव—कैसे चल रहा खेल
हरिद्वार के बहादराबाद, लक्सर रोड, रुड़की रोड, सिडकुल और आसपास के क्षेत्रों में कई कॉलोनाइजर पहले HRDA से कॉलोनी का लेआउट या नक्शा पास करा लेते हैं। इसके बाद उसी अप्रूवल को आधार बनाकर प्रोजेक्ट को “पूरी तरह वैध” बताकर प्रचार किया जाता है।
लेकिन वास्तविकता यह है कि RERA कानून के तहत ऐसे किसी भी प्रोजेक्ट का पंजीकरण अनिवार्य होता है, यदि वह निर्धारित क्षेत्रफल या प्लॉटिंग के दायरे में आता है। इसके बावजूद, कई प्रोजेक्ट बिना RERA रजिस्ट्रेशन के ही बाजार में उतार दिए जाते हैं और प्लॉटों की बिक्री शुरू कर दी जाती है।
ग्राहकों को भ्रमित करने की रणनीति
कॉलोनाइजर और प्रॉपर्टी डीलर इस पूरे खेल में सबसे बड़ा हथियार “HRDA approved” शब्द को बना चुके हैं।
- विज्ञापनों में बड़े अक्षरों में HRDA अप्रूवल दिखाया जाता है
- RERA रजिस्ट्रेशन का जिक्र जानबूझकर नहीं किया जाता
- ग्राहकों को यह समझाया जाता है कि HRDA से पास होना ही पर्याप्त है
इससे आम खरीदार यह मान लेता है कि प्रोजेक्ट पूरी तरह सुरक्षित और वैध है, जबकि RERA की अनुपस्थिति में उसकी कानूनी सुरक्षा अधूरी रह जाती है।
रजिस्ट्रेशन विभाग की लापरवाही से मिला सहारा
इस पूरे मामले में प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन विभाग की भूमिका भी गंभीर सवालों के घेरे में है।
सूत्रों के अनुसार, कई ऐसे प्लॉट्स की रजिस्ट्री हो रही है जो RERA में पंजीकृत नहीं हैं। रजिस्ट्री के दौरान न तो RERA नंबर की अनिवार्य जांच की जा रही है और न ही प्रोजेक्ट की वैधता का पूरा सत्यापन हो रहा है।
यही वह कड़ी है, जो अवैध कारोबार को मजबूती देती है। रजिस्ट्री हो जाने के बाद खरीदार को यह भरोसा हो जाता है कि उसकी संपत्ति सुरक्षित है, जबकि हकीकत में वह कई कानूनी जोखिमों से घिरी होती है।
सोशल मीडिया से लेकर होर्डिंग तक खुला प्रचार
हरिद्वार में अवैध प्लॉटिंग अब पूरी तरह संगठित कारोबार बन चुका है।
- फेसबुक और इंस्टाग्राम पर “HRDA approved plots” के नाम से विज्ञापन
- यूट्यूब पर साइट विजिट और ग्राहक टेस्टिमोनियल वीडियो
- शहर और हाईवे किनारे बड़े-बड़े होर्डिंग
- प्रॉपर्टी वेबसाइट्स पर आकर्षक ऑफर्स
इन सभी माध्यमों में एक बात कॉमन है—RERA रजिस्ट्रेशन का अभाव।
खरीदारों के लिए गंभीर खतरा
इस पूरे सिस्टम में सबसे बड़ा नुकसान आम निवेशक को उठाना पड़ रहा है।
HRDA अप्रूवल और रजिस्ट्री के कारण वह खुद को सुरक्षित समझता है, लेकिन RERA न होने के कारण:
- प्रोजेक्ट अधूरा रह सकता है
- कॉलोनी का विकास नहीं हो पाता
- बिजली, पानी और सड़क जैसी सुविधाएं नहीं मिलतीं
- जमीन पर कानूनी विवाद हो सकते हैं
- भविष्य में निर्माण या पुनर्विक्रय में दिक्कत आती है
यानी “सपनों का प्लॉट” कई बार “मुसीबत की जमीन” बन जाता है।
प्रशासन और सिस्टम पर उठते सवाल
जब HRDA अप्रूवल, बिना RERA बिक्री और रजिस्ट्री—तीनों एक साथ हो रहे हों, तो यह केवल नियमों की अनदेखी नहीं, बल्कि सिस्टम की बड़ी विफलता को दर्शाता है।
स्थानीय लोगों और विशेषज्ञों का मानना है कि या तो विभागों के बीच समन्वय की कमी है या फिर निगरानी तंत्र पूरी तरह कमजोर हो चुका है। कुछ मामलों में मिलीभगत की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा रहा।
समाधान क्या हो सकता है?
विशेषज्ञों के अनुसार इस समस्या को रोकने के लिए ठोस कदम जरूरी हैं:
- RERA और HRDA के बीच डेटा इंटीग्रेशन किया जाए
- प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन से पहले RERA सत्यापन अनिवार्य किया जाए
- बिना RERA प्रोजेक्ट्स की रजिस्ट्री पर तत्काल रोक लगे
- अवैध कॉलोनियों के खिलाफ अभियान चलाया जाए
- दोषी अधिकारियों और कॉलोनाइजरों पर सख्त कार्रवाई होहरिद्वार में HRDA की मंजूरी को ढाल बनाकर RERA नियमों से बचने और रजिस्ट्री के जरिए वैधता हासिल करने का यह खेल अब गंभीर रूप ले चुका है।
यह सिर्फ कानून का उल्लंघन नहीं, बल्कि आम लोगों के भरोसे और उनकी जीवन भर की कमाई के साथ सीधा धोखा है।
यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो यह समस्या आने वाले समय में बड़े रियल एस्टेट घोटाले का रूप ले सकती है—जिसका खामियाजा हजारों परिवारों को भुगतना पड़ सकता है।



