उत्तराखंड एसटीएफ का बड़ा खुलासा: हिमाचल से नकली दवा बनाने वाले गिरोह का सदस्य गिरफ्तार
देहरादून। उत्तराखंड पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने नकली दवाइयों के रैकेट का बड़ा पर्दाफाश करते हुए एक और सफलता हासिल की है। टीम ने हिमाचल प्रदेश के बद्दी से एसवी फायल कंपनी के मालिक विजय कुमार पांडेय को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि वह नकली दवाइयों के लिए रैपर और क्यूआर कोड की प्रिंटिंग करता था। यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब नकली दवाइयों का कारोबार देशभर में गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है।
फैक्ट्री से होती थी नकली रैपर और क्यूआर कोड की सप्लाई
एसटीएफ अधिकारियों के अनुसार, विजय कुमार पांडेय मूल रूप से बिहार के मधुबनी जिले का रहने वाला है और वर्तमान में हिमाचल प्रदेश के बद्दी में रहता है। वह अपनी फैक्ट्री में ब्रांडेड कंपनियों के नाम और क्यूआर कोड की हूबहू नकल तैयार करता था। इन नकली रैपर और एल्युमिनियम फॉयल पर छपे कोड के जरिए गिरोह जीवन रक्षक दवाइयों की नकली पैकेजिंग कर उन्हें बाजार में बेचता था।
पहले ही छह आरोपी पकड़े जा चुके
एसटीएफ ने बताया कि अब तक इस रैकेट से जुड़े संतोष कुमार, नवीन बंसल, आदित्य काला, देवी दयाल गुप्ता और पंकज शर्मा सहित छह लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। जांच में सामने आया कि नवीन बंसल ही गिरोह का अहम चेहरा था, जो नकली दवाइयों को स्ट्रिप में पैक कर बाजार में उतारता था। अब विजय कुमार पांडेय की गिरफ्तारी से यह साफ हो गया है कि गिरोह का नेटवर्क हिमाचल तक फैला हुआ था।
2021 से सक्रिय था नेटवर्क
जांच में एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। वर्ष 2021 में विजय कुमार पांडेय ने फर्जी आईडी पर मोबाइल सिम निकालकर आरोपी नवीन बंसल को दिया था। उसी सिम का उपयोग गिरोह नकली दवा कारोबार से जुड़े नेटवर्क को संचालित करने में करता था।
पूछताछ में अहम खुलासे की उम्मीद
एसएसपी एसटीएफ नवनीत भुल्लर ने बताया कि आरोपी से पूछताछ जारी है। उम्मीद है कि रैकेट से जुड़े अन्य लोगों और उनके नेटवर्क के बारे में भी अहम जानकारी सामने आएगी। भुल्लर ने कहा कि नकली दवाइयां न केवल लोगों के स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हैं, बल्कि इससे सरकार के राजस्व को भी भारी नुकसान होता है।
पहले भी हुआ था बड़ा खुलासा
गौरतलब है कि इसी प्रकरण में बीते 1 जून को सेलाकुई क्षेत्र से एसटीएफ ने संतोष कुमार को पकड़ा था, जिसके पास से नकली रैपर, आउटर बॉक्स, लेबल और क्यूआर कोड बरामद हुए थे। इस मामले की विवेचना इंस्पेक्टर यशपाल सिंह बिष्ट को सौंपी गई है।
नकली दवाइयों से बढ़ता खतरा
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि नकली दवाइयां सीधे तौर पर मरीजों के जीवन को खतरे में डालती हैं। कई बार मरीज को असली दवा की जगह नकली दवा मिलने से इलाज प्रभावित हो जाता है और गंभीर परिणाम सामने आते हैं।
आगे की कार्रवाई
एसटीएफ अब विजय कुमार पांडेय से जुड़े वित्तीय लेनदेन और फैक्ट्री संचालन से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि गिरोह ने किन-किन राज्यों में नकली दवाइयों की सप्लाई की है।