उत्तराखंड में नशे का बड़ा खुलासा: मेडिकल स्टोर की आड़ में चल रहा था जहर का कारोबार
उत्तराखंड में नशे के खिलाफ चल रही मुहिम के बीच 2 मार्च को ऊधमसिंह नगर जिले के गदरपुर से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई। कुमाऊं यूनिट की स्पेशल टास्क फोर्स (STF), ड्रग विभाग और स्थानीय पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में मेन मार्केट स्थित “कुमार मेडिकल हॉल” से 10 हजार से अधिक प्रतिबंधित और नशीली दवाएं बरामद की गईं। पुलिस का दावा है कि साल 2026 में राज्य के भीतर यह अब तक की सबसे बड़ी बरामदगी है।
पुख्ता सूचना पर पड़ा छापा
सूत्रों के अनुसार, STF को लंबे समय से सूचना मिल रही थी कि गदरपुर के एक मेडिकल स्टोर से अवैध नशीली दवाओं की सप्लाई की जा रही है। इसी सूचना के आधार पर ड्रग इंस्पेक्टर निधि शर्मा और STF इंस्पेक्टर विकास चौधरी की टीम ने 2 मार्च को दुकान पर अचानक छापा मारा। उस समय मेडिकल स्टोर का मालिक राजकुमार काउंटर पर मौजूद था।
जैसे ही टीम ने तलाशी शुरू की, काउंटर के पास रखे एक थैले में भारी मात्रा में प्रतिबंधित कैप्सूल और गोलियां बरामद हुईं। शुरुआती बरामदगी ने ही टीम को शक पक्का कर दिया कि मामला छोटा नहीं है। सख्त पूछताछ के बाद आरोपी ने दुकान के पीछे बने स्टोर रूम की जानकारी दी, जहां असली “खजाना” छिपा था।
स्टोर रूम में मिला नशे का जखीरा
स्टोर रूम में प्लास्टिक के कट्टों और गत्ते की पेटियों में हजारों की संख्या में नशीली दवाएं छिपाकर रखी गई थीं। टीम ने जब पूरा स्टॉक गिना तो आंकड़ा 10 हजार से पार चला गया।
बरामद दवाओं में शामिल हैं:
9,416 कैप्सूल स्पास्मो प्रॉक्सीवॉन व अन्य ब्रांड
1,300 प्रतिबंधित मानसिक शांति की गोलियां
51 बोतल कोडीन फॉस्फेट युक्त कफ सिरप
इन दवाओं का उपयोग अक्सर नशे के लिए किया जाता है। खासतौर पर कोडीन युक्त कफ सिरप और कुछ पेनकिलर कैप्सूल युवाओं में नशे के रूप में तेजी से फैल रहे हैं। इतनी बड़ी मात्रा में एक ही मेडिकल स्टोर से इनका मिलना यह संकेत देता है कि यह केवल खुदरा बिक्री नहीं, बल्कि थोक स्तर का अवैध नेटवर्क हो सकता है।
दस्तावेज नहीं, सीधा मुरादाबाद कनेक्शन
छापेमारी के दौरान जब ड्रग इंस्पेक्टर ने इन दवाओं के खरीद बिल, स्टॉक रजिस्टर और वैध दस्तावेज मांगे, तो आरोपी कोई भी कागज पेश नहीं कर सका। पूछताछ में उसने स्वीकार किया कि यह माल उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद से एक सप्लायर द्वारा भेजा जाता था।
इस खुलासे ने जांच को और गंभीर बना दिया है। अब मामला केवल गदरपुर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के बीच फैले एक संगठित नेटवर्क की आशंका जताई जा रही है। पुलिस सप्लाई चेन की कड़ियां जोड़ रही है और मुरादाबाद के कथित सप्लायर की तलाश जारी है।
एनडीपीएस एक्ट में केस दर्ज
आरोपी राजकुमार के खिलाफ NDPS Act की धारा 8/22 के तहत गदरपुर कोतवाली में मुकदमा दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया गया है। एनडीपीएस एक्ट के तहत दोषी पाए जाने पर सख्त सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान है, खासकर जब बरामदगी की मात्रा बड़ी हो।
पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि क्या इस मेडिकल स्टोर से आसपास के इलाकों, स्कूल-कॉलेजों या अन्य जिलों में भी सप्लाई की जा रही थी।
मेडिकल स्टोर या नशे का अड्डा?
यह मामला एक बड़ा सवाल खड़ा करता है — क्या कुछ मेडिकल स्टोर दवा की आड़ में नशे का कारोबार चला रहे हैं? राज्य में पहले भी कई बार ऐसी शिकायतें सामने आई हैं कि बिना डॉक्टर की पर्ची के प्रतिबंधित दवाएं बेची जा रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि ड्रग विभाग की नियमित जांच और स्टॉक ऑडिट अगर सख्ती से हों, तो इस तरह के मामलों पर काफी हद तक रोक लगाई जा सकती है। हालांकि, STF की इस कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि सरकार अब नशे के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति पर काम कर रही है।
एसएसपी की अपील
STF के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय सिंह ने टीम की सराहना करते हुए कहा कि नशा तस्करों के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा। उन्होंने आम जनता से अपील की कि यदि कहीं भी नशीली दवाओं की अवैध बिक्री की जानकारी मिले तो तुरंत STF या एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स को सूचित करें। सूचना देने वाले की पहचान गोपनीय रखी जाएगी।
युवाओं पर पड़ रहा असर
विशेषज्ञों के अनुसार, कोडीन युक्त सिरप और कुछ पेनकिलर दवाएं सस्ती और आसानी से उपलब्ध होने के कारण युवाओं में तेजी से लोकप्रिय हो रही हैं। यह न केवल स्वास्थ्य के लिए घातक है, बल्कि अपराध और सामाजिक विघटन को भी बढ़ावा देता है।
गदरपुर की यह कार्रवाई एक चेतावनी है कि नशे का नेटवर्क कितनी गहराई तक फैल चुका है। अब देखना होगा कि जांच में और कौन-कौन से नाम सामने आते हैं और क्या इस गिरोह की जड़ तक पहुंचा जा सकेगा।
फिलहाल, पुलिस की इस बड़ी कार्रवाई ने गदरपुर समेत पूरे उत्तराखंड में हड़कंप मचा दिया है।


