उधमसिंह नगर में बड़ा एक्शन: 5 मेडिकल संस्थानों के लाइसेंस निरस्त, ड्रग विभाग की सख्त कार्रवाई से मचा हड़कंप
उत्तराखंड में दवा कारोबार पर निगरानी को लेकर प्रशासन अब पूरी तरह एक्शन मोड में नजर आ रहा है। ताजबर सिंह (अपर आयुक्त, खाद्य एवं औषधि प्रशासन, उत्तराखंड) के निर्देशों के क्रम में उधमसिंह नगर जिले में चलाए गए व्यापक औचक निरीक्षण अभियान के बाद बड़ी कार्रवाई सामने आई है। गंभीर अनियमितताएं पाए जाने पर 5 मेडिकल संस्थानों के लाइसेंस निरस्त कर दिए गए हैं।
इस कार्रवाई के बाद जिले भर में दवा व्यापार से जुड़े प्रतिष्ठानों में हड़कंप की स्थिति है और अन्य संचालकों ने भी अपने रिकॉर्ड दुरुस्त करने की कवायद तेज कर दी है।
इन प्रतिष्ठानों पर गिरी गाज
ड्रग विभाग की टीम ने जिन प्रमुख प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया और जहां गंभीर कमियां पाई गईं, उनमें शामिल हैं:
- GOLDEN AGENCY, वार्ड नं. 3, सिनेमा क्षेत्र, उधम सिंह नगर
- MUSHKAN MEDICAL, प्रीत विहार कॉलोनी, वार्ड नं. 25, उधम सिंह नगर
- SAI MEDICAL STORE, प्रीत विहार कॉलोनी, फाजिलपुर महरोला, वार्ड नं. 25, उधम सिंह नगर
- SANTOSH MEDICAL STORE, बंदिया क्रॉसिंग भट्टा रोड के पास, उधम सिंह नगर
- SUKH MEDICAL STORE, ग्राम कल्याणपुर, ड्योरी मोड़, उधम सिंह नगर
जांच में लाइसेंस की शर्तों का उल्लंघन, रिकॉर्ड में गंभीर गड़बड़ी, शेड्यूल-H और शेड्यूल-X दवाओं के रखरखाव में कमी, तथा दवाओं के भंडारण मानकों की अनदेखी जैसी खामियां सामने आईं। विभागीय प्रक्रिया पूरी करने और संबंधित पक्षों को नियमानुसार अवसर देने के बाद लाइसेंस निरस्तीकरण की कार्रवाई की गई।
क्या-क्या पाया गया जांच में?
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने दस्तावेजों और स्टॉक का विस्तृत मिलान किया। कई स्थानों पर:
- स्टॉक रजिस्टर अद्यतन नहीं मिला
- बिलिंग रिकॉर्ड में विसंगतियां पाई गईं
- पंजीकृत फार्मासिस्ट की अनिवार्य उपस्थिति संदिग्ध पाई गई
- नियंत्रित दवाओं के रिकॉर्ड में कमी देखी गई
कुछ मामलों में दवाओं के नमूने लेकर जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे गए हैं, ताकि गुणवत्ता की पुष्टि की जा सके।
सूत्रों के अनुसार, विभाग को पहले से शिकायतें मिल रही थीं कि कुछ मेडिकल स्टोर्स में बिना पर्ची दवाओं की बिक्री और रिकॉर्ड में अनियमितता हो रही है। इन्हीं शिकायतों के आधार पर यह विशेष अभियान चलाया गया।
सीनियर ड्रग इंस्पेक्टर नीरज कुमार
इस अभियान की निगरानी कर रहे उधमसिंह नगर के सीनियर ड्रग इंस्पेक्टर नीरज कुमार ने स्पष्ट कहा:
“दवा व्यापार पूरी तरह कानून और लाइसेंस की शर्तों के अनुसार संचालित होना चाहिए। यदि कोई प्रतिष्ठान नियमों की अनदेखी करता है या रिकॉर्ड में गंभीर गड़बड़ी पाई जाती है, तो विभाग कार्रवाई करने के लिए बाध्य है। जनता को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण दवाएं उपलब्ध कराना हमारी प्राथमिक जिम्मेदारी है।”
उन्होंने बताया कि कार्रवाई पूरी तरह औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम के प्रावधानों के तहत की गई है और भविष्य में भी औचक निरीक्षण जारी रहेंगे।
स्वास्थ्य सुरक्षा से जुड़ा मामला
विशेषज्ञों का मानना है कि दवा कारोबार में लापरवाही का सीधा असर मरीजों की सेहत पर पड़ता है। बिना पर्ची एंटीबायोटिक की बिक्री से दवा प्रतिरोध (Drug Resistance) जैसी गंभीर समस्या बढ़ती है। वहीं एक्सपायरी या गलत तरीके से रखी गई दवाएं मरीजों के लिए नुकसानदेह साबित हो सकती हैं।
इसी को ध्यान में रखते हुए ड्रग विभाग की यह कार्रवाई केवल प्रशासनिक कदम नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा से जुड़ा अहम निर्णय माना जा रहा है।
आगे भी जारी रहेगा अभियान
विभाग ने संकेत दिए हैं कि यह अभियान आगे भी जारी रहेगा। जिले के अन्य मेडिकल स्टोर्स और थोक विक्रेताओं की भी चरणबद्ध तरीके से जांच की जाएगी। रिकॉर्ड की पारदर्शिता, डिजिटल निगरानी और नियमित निरीक्षण के माध्यम से दवा वितरण व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में काम किया जा रहा है।
उधमसिंह नगर में 5 मेडिकल संस्थानों के लाइसेंस निरस्त होना इस बात का साफ संकेत है कि अब दवा कारोबार में नियमों से कोई समझौता नहीं होगा।
लाइसेंस, रिकॉर्ड, गुणवत्ता और भंडारण—हर मानक का पालन अनिवार्य है।
यह कार्रवाई एक चेतावनी भी है और भरोसे का संदेश भी—
दवा व्यापार लाभ से पहले जिम्मेदारी का विषय है, और स्वास्थ्य सुरक्षा सर्वोपरि।



