TET पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर शैक्षिक महासंघ सक्रिय, केंद्रीय शिक्षा मंत्री से की मुलाकात
पूर्वव्यापी लागू होने से 12 लाख शिक्षकों की सेवा-सुरक्षा पर खतरे की चेतावनी
नई दिल्ली। शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्णय को लेकर अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (ABRSM) ने गंभीर चिंता जताई है। इसी क्रम में महासंघ के एक प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से भेंट कर इस विषय में विस्तृत ज्ञापन सौंपा और समुचित कार्यवाही की मांग की।

महासंघ ने मंत्री को अवगत कराया कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय के दिनांक 01 सितंबर 2025 के निर्णय (सिविल अपील संख्या 1385/2015) को यदि नियुक्ति तिथि की परवाह किए बिना सभी सेवारत शिक्षकों पर पूर्वव्यापी रूप से लागू किया गया, तो इससे देशभर के लगभग 12 लाख शिक्षकों की सेवा-सुरक्षा, वरिष्ठता, पदोन्नति और आजीविका पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) की 23 अगस्त 2010 की अधिसूचना में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि कक्षा I से VIII तक के शिक्षकों के लिए न्यूनतम योग्यताएं अधिसूचना की तिथि से ही प्रभावी होंगी और इससे पूर्व नियुक्त शिक्षकों को TET से छूट प्राप्त रहेगी। ऐसे में वर्षों से वैध शैक्षणिक और व्यावसायिक योग्यताओं के आधार पर सेवा दे रहे अनुभवी शिक्षकों पर इस निर्णय को पूर्वव्यापी रूप से लागू करना न्यायोचित नहीं होगा।
महासंघ ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री से आग्रह किया कि वे इस विषय में हस्तक्षेप कर निर्णय को केवल भावी रूप से लागू कराने, अधिसूचना से पूर्व नियुक्त शिक्षकों की वरिष्ठता, गरिमा और वैध अपेक्षाओं की रक्षा करने तथा संभावित सेवा-समाप्ति और पदोन्नति से वंचित होने जैसी परिस्थितियों से शिक्षकों को बचाने के लिए आवश्यक विधिक एवं प्रशासनिक कदम उठाएं।
इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक का स्वागत करते हुए उसके उद्देश्यों की सराहना की और उसे अधिक प्रभावी, समावेशी और व्यवहारिक बनाने के लिए कुछ महत्वपूर्ण सुझाव भी मंत्री के समक्ष रखे। साथ ही उच्च शिक्षा और विद्यालय शिक्षा से जुड़ी लंबे समय से लंबित समस्याओं के समाधान को लेकर एक विस्तृत मांग-पत्र भी सौंपा गया।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने संगठन द्वारा प्रस्तुत तथ्यों और दस्तावेजों को गंभीरता से लेते हुए राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद के अध्यक्ष और संबंधित अधिकारियों को इस मामले में समुचित एवं आवश्यक कार्यवाही के निर्देश दिए। उन्होंने शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के साथ-साथ शिक्षकों और शैक्षणिक संस्थानों से जुड़े मुद्दों पर संतुलित और सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने का आश्वासन भी दिया।
इस प्रतिनिधिमंडल में ABRSM के अध्यक्ष प्रो. नारायण लाल गुप्ता, महासचिव प्रो. गीता भट्ट, संगठन मंत्री महेंद्र कपूर, सह संगठन मंत्री जी. लक्ष्मण, वरिष्ठ उपाध्यक्ष महेंद्र कुमार, विद्यालय शिक्षा प्रभारी शिवानंद सिंदनकेरा, एनआईटी शिक्षक फोरम के संयोजक प्रो. महेंद्र श्रीमाली, तेलंगाना इकाई के अध्यक्ष हनुमंत राव तथा तमिलनाडु इकाई के महासचिव कंदसामी सहित अन्य पदाधिकारी शामिल रहे।



