Sodium Hyaluronate Eye Drops पर सख्ती, राज्यों को लाइसेंस रद्द करने का आदेश
बिना मंजूरी बन रही आई ड्रॉप्स पर केंद्र का बड़ा एक्शन, Central Drugs Standard Control Organization का देशभर में अलर्ट
नई दिल्ली। देश में दवाओं की गुणवत्ता और मरीजों की सुरक्षा को लेकर केंद्र सरकार ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाया है। Central Drugs Standard Control Organization (CDSCO) ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के ड्रग कंट्रोलर्स को निर्देश जारी करते हुए Sodium Hyaluronate Eye Drops 0.3% w/v के निर्माण और बिक्री पर तत्काल कार्रवाई करने को कहा है।
18 मार्च 2026 को जारी इस आदेश में साफ कहा गया है कि यह दवा अब तक केंद्र से अनुमोदित नहीं है, इसके बावजूद कुछ कंपनियां इसका निर्माण और विपणन कर रही हैं, जो नियमों का सीधा उल्लंघन है।
क्या है पूरा मामला?
CDSCO के अनुसार, Sodium Hyaluronate Eye Drops 0.3% “न्यू ड्रग” की श्रेणी में आता है। यानी इसे बाजार में लाने से पहले केंद्र सरकार से अनुमति लेना अनिवार्य है। लेकिन जांच में सामने आया है कि कई निर्माता बिना मंजूरी के ही इसे बाजार में उतार चुके हैं।
नियम क्या कहते हैं?
New Drugs and Clinical Trials Rules, 2019 के तहत:
- किसी भी “न्यू ड्रग” का निर्माण बिना केंद्रीय लाइसेंस अथॉरिटी की मंजूरी के नहीं किया जा सकता
- इसके लिए Form CT-21 के माध्यम से आवेदन करना जरूरी है
- दवा की गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रभावशीलता की जांच के बाद ही अनुमति मिलती है
राज्यों को क्या निर्देश दिए गए?
CDSCO प्रमुख Dr. Rajeev Singh Raghuvanshi ने राज्यों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि:
- अपने क्षेत्र के सभी निर्माताओं को तत्काल सूचना दें
- इस दवा से जुड़े सभी प्रोडक्ट परमिशन रद्द करें
- की गई कार्रवाई की रिपोर्ट जल्द केंद्र को भेजें
मरीजों के लिए कितना खतरनाक?
विशेषज्ञों का मानना है कि बिना परीक्षण और मंजूरी के आई ड्रॉप्स का इस्तेमाल आंखों के लिए बेहद खतरनाक हो सकता है। इससे इन्फेक्शन, एलर्जी, जलन या स्थायी नुकसान तक हो सकता है।
पहले भी उठे हैं सवाल
देश में हाल के महीनों में अमानक और फेल दवाओं के कई मामले सामने आए हैं। सरकारी अस्पतालों में भी घटिया दवाओं की सप्लाई को लेकर सवाल उठे हैं, जिससे दवा निगरानी तंत्र पर दबाव बढ़ा है।
आगे क्या होगा?
- राज्यों में जांच और छापेमारी तेज होगी
- दोषी कंपनियों पर लाइसेंस रद्द, जुर्माना और कानूनी कार्रवाई संभव
- ड्रग कंट्रोल सिस्टम की जवाबदेही पर भी सवाल उठ सकते हैं
CDSCO का यह आदेश स्पष्ट संकेत है कि अब बिना मंजूरी दवा बनाने और बेचने वालों पर सख्त कार्रवाई तय है। मरीजों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए केंद्र ने सख्ती बढ़ा दी है।
अब नजर इस बात पर है कि राज्यों में इस आदेश पर कितनी तेजी से अमल होता है और कितनी कंपनियां इसके दायरे में आती हैं।



