पैरासिटामोल भी नहीं सुरक्षित! बिना मंजूरी दवाओं का बड़ा खेल बेनकाब:

पैरासिटामोल भी नहीं सुरक्षित! बिना मंजूरी दवाओं का बड़ा खेल बेनकाब:

देशभर में हड़कंप—90 दवाएं जांच में संदिग्ध, केंद्र ने राज्यों को दिए सख्त कार्रवाई के आदेश


नई दिल्ली/  देश में दवाओं की सुरक्षा को लेकर एक बड़ा और चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। जांच में करीब 90 ऐसी दवाएं (FDC) पकड़ी गई हैं, जो बिना सरकारी मंजूरी के बाजार में धड़ल्ले से बेची जा रही थीं। सबसे ज्यादा चिंता की बात ये है कि इनमें पैरासिटामोल जैसी आम और भरोसेमंद दवा भी शामिल है।

इस खुलासे के बाद दवा नियामक ने पूरे देश में अलर्ट जारी करते हुए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को तुरंत जांच और सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। मामले को सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर खतरा माना जा रहा है।


क्या है पूरा मामला?

जांच में सामने आया कि कई दवा कंपनियां Fixed Dose Combination (FDC) यानी दो या उससे ज्यादा दवाओं को मिलाकर बनाई गई दवाएं बिना अनुमति के बेच रही थीं।

नियमों के मुताबिक, ऐसी दवाओं को “न्यू ड्रग” माना जाता है और इन्हें बाजार में लाने से पहले केंद्रीय स्तर पर मंजूरी जरूरी होती है। लेकिन कई कंपनियों ने इस प्रक्रिया को नजरअंदाज किया।


किन दवाओं पर उठा सवाल?

जिन दवाओं के सैंपल जांच में संदिग्ध पाए गए, उनमें शामिल हैं:

  • बुखार की दवा — पैरासिटामोल
  • मल्टीविटामिन और फोलिक एसिड
  • दर्द की दवा — डायक्लोफेनाक
  • पेट दर्द — डाइसाइक्लोमाइन
  • स्किन क्रीम — क्लोट्रिमाजोल + बेटामेथासोन

यानी ऐसी दवाएं जो आम लोग रोजमर्रा में इस्तेमाल करते हैं।


कितना बड़ा खतरा?

सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक, बिना मंजूरी वाली दवाएं सीधे तौर पर लोगों की सेहत के लिए खतरा बन सकती हैं।

इनसे:

  • गलत असर या साइड इफेक्ट हो सकते हैं
  • इलाज का असर कम हो सकता है
  • मरीज की हालत और बिगड़ सकती है

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की लापरवाही लंबे समय में गंभीर स्वास्थ्य संकट पैदा कर सकती है।


सरकार का सख्त रुख

मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्र ने साफ निर्देश दिए हैं कि:

  • सभी राज्य इन दवाओं की जांच करें
  • दोषी कंपनियों और मार्केटिंग एजेंसियों पर कार्रवाई करें
  • सप्लाई चेन से ऐसी दवाओं को तुरंत हटाया जाए
  • और जल्द से जल्द रिपोर्ट केंद्र को भेजी जाए

सरकार ने इसे टॉप प्रायोरिटी का मामला बताया है।


कंपनियों पर क्या असर पड़ेगा?

अगर जांच में कंपनियां दोषी पाई जाती हैं, तो उनके खिलाफ:

  • लाइसेंस रद्द
  • भारी जुर्माना
  • और कानूनी कार्रवाई जैसे कदम उठाए जा सकते हैं

आम लोगों के लिए जरूरी सावधानी

  • डॉक्टर की सलाह के बिना दवा न लें
  • दवा खरीदते समय ब्रांड और कंपनी जरूर जांचें
  • सस्ती या अनजान दवाओं से बचें
  • किसी भी असामान्य असर पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें

बड़ा सवाल

सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर इतनी बड़ी संख्या में बिना मंजूरी वाली दवाएं बाजार तक पहुंचीं कैसे?

क्या निगरानी तंत्र कमजोर है या फिर नियमों का खुला उल्लंघन हो रहा है?

सरकार की कार्रवाई शुरू हो चुकी है, लेकिन असली परीक्षा अब यह है कि क्या इस बार दवा बाजार में पारदर्शिता और भरोसा बहाल हो पाएगा या नहीं।

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