प्रतिबंधित दवाओं पर सरकार का बड़ा खुलासा: 5 साल में 211 दवाओं पर लगा प्रतिबंध, गैरकानूनी बिक्री पर सख्त कार्रवाई के निर्देश
नई दिल्ली। देश में आम लोगों की सेहत से जुड़े दवा कारोबार पर केंद्र सरकार ने बड़ा और अहम खुलासा किया है। सरकार ने बताया है कि बीते पांच वर्षों में मानव और पशु उपयोग की कुल 211 दवाओं पर प्रतिबंध लगाया गया है। यह जानकारी केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा ने लोकसभा में लिखित जवाब के जरिए दी।
सरकार का कहना है कि इन दवाओं को मरीजों के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक, गैर-जरूरी या वैज्ञानिक मानकों पर खरा न उतरने के कारण प्रतिबंधित किया गया है।
वर्षवार कितनी दवाएं हुईं प्रतिबंधित
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार—
- 2021 और 2022 में कोई भी दवा प्रतिबंधित नहीं की गई।
- 2023 में मानव उपयोग की 14 दवाएं और पशु उपयोग की 2 दवाएं प्रतिबंधित की गईं।
- 2024 में सबसे ज्यादा कार्रवाई हुई। इस वर्ष मानव उपयोग की 157 दवाएं और पशु उपयोग की 1 दवा पर प्रतिबंध लगाया गया।
- 2025 में मानव उपयोग की 1 दवा और पशु उपयोग की 36 दवाएं प्रतिबंधित की गईं।
इन आंकड़ों से साफ है कि 2024 में दवा बाजार पर सबसे बड़ा शिकंजा कसा गया।
फिक्स्ड डोज कॉम्बिनेशन (FDC) दवाओं पर विवाद
सरकार ने यह भी स्वीकार किया कि कई प्रतिबंधित दवाएं फिक्स्ड डोज कॉम्बिनेशन (FDC) श्रेणी की थीं।
इन दवाओं पर लगाए गए प्रतिबंध को लेकर देश के अलग-अलग उच्च न्यायालयों में कई याचिकाएं दाखिल की गईं।
न्यायालयों ने कुछ मामलों में उन दवाओं को अंतरिम संरक्षण दिया, जो पहले से बाजार और वितरण नेटवर्क में मौजूद थीं। इसके कारण कई जगहों पर भ्रम की स्थिति बनी कि कौन-सी दवा वैध है और कौन-सी प्रतिबंधित।
प्रतिबंधित दवाओं की बिक्री है अपराध
केंद्र सरकार ने साफ शब्दों में कहा है कि—
- प्रतिबंधित दवाओं का निर्माण, बिक्री और वितरण
- ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 के तहत दंडनीय अपराध है
इस तरह के मामलों में कार्रवाई का अधिकार राज्य सरकारों द्वारा नियुक्त राज्य लाइसेंसिंग प्राधिकरण (SLA) के पास होता है।
दोषी पाए जाने पर दवा कंपनी, थोक विक्रेता या मेडिकल स्टोर का लाइसेंस रद्द, जुर्माना और कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
शिकायत मिलते ही CDSCO करता है कार्रवाई
यदि देश के किसी भी हिस्से से प्रतिबंधित दवाओं की बिक्री या उपयोग की शिकायत मिलती है तो—
- शिकायत केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) को भेजी जाती है
- इसके बाद मामला संबंधित राज्य औषधि नियंत्रक के पास कार्रवाई के लिए भेजा जाता है
सरकार का कहना है कि अब ऐसी शिकायतों पर तेजी से कार्रवाई की जा रही है।
दवा के फार्मूले में बदलाव पर सख्त नियम
सरकार ने दवा कंपनियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि—
- किसी भी दवा के सक्रिय घटक (Active Ingredients) में बदलाव करने से पहले
- CDSCO से नई दवा की अनुमति लेना अनिवार्य है
यह प्रक्रिया नई दवा एवं नैदानिक परीक्षण नियम, 2019 के तहत की जाती है।
बिना अनुमति बदलाव करने पर संबंधित कंपनी और लाइसेंसधारी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
दवाओं के नाम को लेकर भी सख्ती
दवाओं के नाम को लेकर मरीजों में होने वाले भ्रम को रोकने के लिए सरकार ने नियमों में बदलाव किया है।
अब यदि कोई कंपनी किसी दवा को ब्रांड नाम या व्यापार नाम से बाजार में उतारना चाहती है, तो उसे—
- प्रपत्र-51 में एक लिखित उपक्रम देना होगा
- यह प्रमाणित करना होगा कि प्रस्तावित नाम पहले से किसी अन्य दवा से मिलता-जुलता नहीं है
सरकार का मानना है कि इससे गलत दवा दिए जाने की घटनाओं पर रोक लगेगी।
मरीजों की सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता
केंद्र सरकार ने दो टूक कहा है कि मरीजों की सेहत से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
प्रतिबंधित और गैर-मानक दवाओं के खिलाफ कार्रवाई को आगे और तेज किया जाएगा।
सरकार का यह कदम दवा उद्योग के लिए सख्त चेतावनी माना जा रहा है कि नियमों का उल्लंघन अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
बड़ा सवाल
हालांकि आंकड़े और नियम सख्त हैं, लेकिन बड़ा सवाल यही है—
क्या ज़मीनी स्तर पर भी प्रतिबंधित दवाओं की बिक्री पूरी तरह रुकेगी?
या फिर नियम सिर्फ कागजों तक ही सीमित रहेंगे?
आने वाले समय में सरकार की सख्ती और राज्यों की कार्रवाई ही इसका जवाब देगी।


