नशीली दवाओं के धंधे में लिप्त दो महिलाओं को 12-12 साल की सख्त जेल
नैनीताल की NDPS कोर्ट का कड़ा फैसला, जुर्माना भी भारी
नैनीताल। नशीली और प्रतिबंधित दवाओं के अवैध कारोबार पर नैनीताल की अदालत ने कड़ा रुख अपनाया है। बनभूलपुरा क्षेत्र की रहने वाली साजिया और आशिया नाम की दो महिलाओं को कोर्ट ने दोषी मानते हुए 12-12 साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही दोनों पर 1 लाख 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। जुर्माना न भरने की स्थिति में उन्हें 8 महीने की अतिरिक्त जेल भी काटनी होगी।
यह फैसला नैनीताल के विशेष एनडीपीएस जज एवं प्रथम अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश संजीव कुमार की अदालत ने सुनाया।
कैसे सामने आया पूरा मामला
मामला थाना बनभूलपुरा, जिला नैनीताल का है। 7 मार्च 2019 को औषधि निरीक्षक मीना बिष्ट की शिकायत पर एफआईआर संख्या 80/2019 दर्ज की गई थी। शिकायत के आधार पर पुलिस और औषधि विभाग की टीम ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए दोनों महिलाओं को पकड़ा।
जांच के दौरान अभियुक्त महिलाओं के कब्जे से—
- 150 प्रतिबंधित नशीली पैराडोल टैबलेट
- 32 प्रतिबंधित नशीले इंजेक्शन
बरामद किए गए। जांच में यह साफ हुआ कि ये दवाएं आम इलाज के लिए नहीं, बल्कि नशे के रूप में इस्तेमाल की जा रही थीं।
जांच में क्या खुलासा हुआ
जांच एजेंसियों ने कोर्ट को बताया कि बरामद दवाएं व्यावसायिक मात्रा में थीं, यानी इन्हें बेचने के इरादे से रखा गया था। अभियोजन पक्ष के अनुसार, इस तरह की नशीली दवाओं को खासकर युवाओं को नशे का आदी बनाने के लिए बेचा जाता है, जिससे समाज पर बुरा असर पड़ता है।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी
कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि—
“नशीली दवाओं का अवैध कारोबार समाज के लिए बेहद खतरनाक है। इससे युवा पीढ़ी बर्बाद हो रही है। ऐसे मामलों में सख्त सजा देना जरूरी है।”
अदालत ने यह भी माना कि यह अपराध गंभीर, समाज विरोधी और जनहित के खिलाफ है।
बचाव पक्ष की दलीलें नहीं आईं काम
सजा के वक्त बचाव पक्ष की ओर से कहा गया कि दोनों महिलाएं हैं, उनका यह पहला अपराध है और उनके छोटे बच्चे हैं जिनकी देखभाल करने वाला कोई नहीं है।
लेकिन कोर्ट ने साफ कहा कि अपराध की गंभीरता को देखते हुए इन कारणों से कोई राहत नहीं दी जा सकती।
करीब 7 साल बाद आया फैसला
इस मामले में—
- 7 मार्च 2019 को केस दर्ज हुआ
- 20 सितंबर 2019 को चार्जशीट दाखिल की गई
- 2021 से गवाहों की गवाही शुरू हुई
- 19 दिसंबर 2025 को बहस पूरी हुई
- और 5 जनवरी 2026 को सजा सुनाई गई
करीब 7 साल तक चले इस केस में सभी सबूतों और गवाहों के आधार पर अदालत ने यह फैसला दिया।
जेल भेजने और दवाएं नष्ट करने के आदेश
कोर्ट ने आदेश दिया है कि दोनों दोषी महिलाओं को तुरंत जेल भेजा जाए। साथ ही मामले में जब्त की गई सभी नशीली और प्रतिबंधित दवाओं को कानून के मुताबिक नष्ट किया जाएगा।
समाज के लिए कड़ा संदेश
इस फैसले से यह साफ संदेश गया है कि नशीली दवाओं के धंधे में शामिल लोगों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। आसान कमाई के लालच में ऐसे अपराध करने वालों को लंबी जेल और भारी जुर्माने का सामना करना पड़ेगा।



