महंगी होंगी दवाएं! सरकार ने दी कीमत बढ़ाने की मंजूरी, आम आदमी पर बढ़ेगा बोझ
नई दिल्ली। देशभर में आम लोगों के लिए जरूरी दवाएं अब थोड़ी महंगी होने जा रही हैं। केंद्र सरकार ने दवाओं की कीमतों में करीब 0.65 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की अनुमति दे दी है। यह फैसला नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (NPPA) द्वारा जारी आदेश के तहत लिया गया है, जिससे दवा कंपनियों को तय फॉर्मूले के अनुसार अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) बढ़ाने की छूट मिल गई है।
सरकार के इस निर्णय के बाद अब कंपनियों को दवाओं के दाम बढ़ाने के लिए अलग से अनुमति लेने की जरूरत नहीं होगी। इससे बुखार, दर्द, एंटीबायोटिक समेत कई जरूरी दवाएं थोड़ी महंगी हो सकती हैं।
महंगाई के आधार पर बढ़े दाम
दवाओं की कीमतों में यह बढ़ोतरी Wholesale Price Index (WPI) यानी थोक महंगाई दर के आधार पर की गई है। हर साल सरकार इसी इंडेक्स के आधार पर दवा कंपनियों को सीमित बढ़ोतरी की अनुमति देती है। इस बार WPI कम रहने के कारण बढ़ोतरी भी सीमित रखी गई है।
कच्चे माल की कीमतों में उछाल
दवा कंपनियों का कहना है कि उत्पादन लागत में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। दवा बनाने में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल और केमिकल्स की कीमतों में भारी इजाफा हुआ है।
पैरासिटामोल के कच्चे माल में करीब 47 प्रतिशत, डाइक्लोफेनेक में 54 प्रतिशत, अमोक्सिसिलिन में 45 प्रतिशत और सिप्रोफ्लॉक्सासिन में लगभग 60 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की गई है।
पैकेजिंग भी हुई महंगी
दवाओं की कीमत बढ़ने की एक बड़ी वजह पैकेजिंग लागत भी है। प्लास्टिक, एल्यूमिनियम और अन्य पैकिंग मटेरियल के दाम बढ़ने से कंपनियों की लागत पर असर पड़ा है, जिसका बोझ अब उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है।
अंतरराष्ट्रीय हालात का भी असर
विशेषज्ञों के मुताबिक वैश्विक स्तर पर चल रहे तनाव, खासकर ईरान-इजरायल संघर्ष का असर सप्लाई चेन और कच्चे माल की कीमतों पर पड़ा है। हालांकि सरकार ने सीधे तौर पर इसे वजह नहीं बताया, लेकिन बाजार पर इसका अप्रत्यक्ष प्रभाव माना जा रहा है।
मेडिकल उपकरण भी होंगे महंगे
सिर्फ दवाएं ही नहीं, बल्कि सिरिंज, थर्मामीटर और अन्य मेडिकल उपकरणों की कीमतों में भी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। इससे इलाज का कुल खर्च बढ़ने की आशंका है।
आम आदमी पर पड़ेगा असर
भले ही 0.65 प्रतिशत की बढ़ोतरी कम लगे, लेकिन लगातार बढ़ती महंगाई के बीच यह आम लोगों के मासिक मेडिकल बजट पर असर डालेगी। खासकर लंबे समय से दवा लेने वाले मरीजों के लिए खर्च बढ़ सकता है।
सरकार का पक्ष
सरकार का कहना है कि यह बढ़ोतरी नियंत्रित और आवश्यक है, ताकि दवा कंपनियां उत्पादन जारी रख सकें और बाजार में दवाओं की कमी न हो। साथ ही, सस्ती दवाओं के लिए जन औषधि केंद्रों को बढ़ावा दिया जा रहा है।
दवाओं की कीमतों में यह बढ़ोतरी भले ही सीमित हो, लेकिन इसके पीछे महंगाई, कच्चे माल की लागत और वैश्विक परिस्थितियां प्रमुख कारण हैं। आने वाले समय में अगर यही स्थिति बनी रही तो दवाओं के दाम में और इजाफा हो सकता है।



