दवाओं की कीमतों पर सरकार की सख़्त निगरानी, मनमानी बढ़ोतरी पर होगी कार्रवाई
नई दिल्ली, देश में दवाओं की बढ़ती कीमतों को लेकर केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि ब्रांडेड और अन्य दवाओं की कीमतें पूरी तरह सरकार की निगरानी में हैं। सरकार का कहना है कि आम लोगों को ज़रूरी दवाएं उचित दामों पर मिलें, इसके लिए नियम बनाए गए हैं और उनका सख़्ती से पालन कराया जा रहा है।
केंद्र सरकार ने बताया कि राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण नीति, 2012 के तहत औषधि (मूल्य नियंत्रण) आदेश, 2013 (DPCO-2013) लागू है। इसी कानून के अनुसार दवाओं की कीमतें तय और नियंत्रित की जाती हैं।
दवाओं की कीमत कैसे तय होती है
सरकार ने स्पष्ट किया कि दवाओं की कीमत तय करने के लिए कंपनियों के खर्च का हिसाब नहीं रखा जाता, बल्कि बाज़ार में चल रही कीमतों के आधार पर अधिकतम दाम तय किए जाते हैं।
राष्ट्रीय आवश्यक औषधि सूची (NLEM) में शामिल दवाओं के लिए—
- जिन ब्रांडों की बाज़ार हिस्सेदारी 1 प्रतिशत या उससे अधिक होती है
- उनके खुदरा दाम का औसत निकाला जाता है
- उस औसत में 16 प्रतिशत जोड़कर दवा की अधिकतम कीमत तय की जाती है
इसी कीमत से ज़्यादा दाम वसूलना कानूनन अपराध है।
गैर-अनुसूचित दवाओं पर भी नियंत्रण
जो दवाएं आवश्यक दवाओं की सूची में शामिल नहीं हैं, उनके लिए भी नियम तय हैं। ऐसी दवाओं की कीमत एक साल में 10 प्रतिशत से ज़्यादा नहीं बढ़ाई जा सकती। अगर कोई कंपनी इससे ज़्यादा कीमत बढ़ाती है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाती है और अधिक वसूली गई रकम वापस ली जाती है।
एमआरपी दिखाना जरूरी
सरकार ने कहा है कि हर दवा के पैक पर—
- अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP)
- सभी करों सहित
- साफ और स्थायी अक्षरों में छपा होना जरूरी है
अगर कोई दवा बिना सही एमआरपी के बेची जाती है, तो यह कानून का उल्लंघन माना जाएगा।
डॉक्टरों को जेनेरिक नाम लिखने के निर्देश
सरकार ने बताया कि डॉक्टरों को दवाएं जेनेरिक नाम से लिखना अनिवार्य है। भारतीय चिकित्सा परिषद के नियमों के अनुसार डॉक्टरों को दवा का नाम साफ और बड़े अक्षरों में लिखना चाहिए, ताकि मरीज को सही और सस्ती दवा मिल सके।
केंद्र सरकार के अस्पतालों और सीजीएचएस के डॉक्टरों को विशेष रूप से केवल जेनेरिक दवाएं लिखने के निर्देश दिए गए हैं। राज्यों को भी कहा गया है कि सरकारी अस्पतालों में इसकी नियमित जांच की जाए।
नियम तोड़ने वाले डॉक्टरों पर कार्रवाई
अगर कोई डॉक्टर इन नियमों का पालन नहीं करता है तो राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग अधिनियम, 2019 के तहत उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है। यह कार्रवाई राज्य चिकित्सा परिषद या राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग द्वारा की जाएगी।
603 मानव दवाएं और 40 पशु दवाएं प्रतिबंधित
सरकार ने यह भी जानकारी दी कि अब तक—
- मानव उपयोग की 603 दवाएं
- पशुओं के इलाज में इस्तेमाल होने वाली 40 दवाएं
देश में पूरी तरह प्रतिबंधित की जा चुकी हैं। इन दवाओं का बनाना, बेचना या इस्तेमाल करना कानूनन अपराध है।
प्रतिबंधित दवाओं पर सख़्त कार्रवाई
प्रतिबंधित दवाओं की बिक्री या वितरण ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 के तहत दंडनीय अपराध है। ऐसी शिकायत मिलने पर राज्य औषधि नियंत्रक और सीडीएससीओ कार्रवाई करते हैं।
लोकसभा में दी गई जानकारी
केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा ने लोकसभा में यह जानकारी देते हुए कहा कि सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हर नागरिक को सुरक्षित, असरदार और सस्ती दवाएं मिलें।
सरकार ने साफ कर दिया है कि दवाओं की कीमतों में मनमानी नहीं चलने दी जाएगी। चाहे कंपनी हो या डॉक्टर, नियम तोड़ने वालों पर सख़्त कार्रवाई की जाएगी, ताकि आम लोगों को राहत मिल सके।


