नशे का बड़ा खेल बेनकाब: इटावा में 50 लाख का कोडिन सिरप जब्त, देहरादून की बड़ी फार्मा कंपनी भी जांच के घेरे में
इटावा। नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ इटावा पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 50 लाख रुपये कीमत की कोडिनयुक्त प्रतिबंधित कफ सिरप की 40 हजार बोतलें जब्त की हैं। यह खेप देहरादून से बिहार भेजी जा रही थी, जिसे पुलिस ने चेकिंग के दौरान एक मिनी ट्रक से बरामद किया। मामले में तीन तस्करों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से 4.35 लाख रुपये नकद भी बरामद किए गए हैं।
इस कार्रवाई के बाद देहरादून की एक बड़ी फार्मा कंपनी की सप्लाई प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े हो गए हैं, जिसे लेकर पुलिस और औषधि विभाग की संयुक्त जांच शुरू कर दी गई है।
वाहन चेकिंग में खुला नशे का नेटवर्क
सीओ सिटी अभय नारायण राय के अनुसार, गुरुवार रात फ्रेंड्स कॉलोनी थाना प्रभारी अमित मिश्रा एसओजी टीम के साथ भरथना चौराहे पर संदिग्ध वाहनों की जांच कर रहे थे। इसी दौरान सूचना मिली कि गौरापुरा गांव के पास एक मिनी ट्रक संदिग्ध हालात में खड़ा है।
मौके पर पहुंचकर तलाशी ली गई तो ट्रक से 400 पेटियों में भरी 40 हजार कोडिनयुक्त कफ सिरप की शीशियां बरामद हुईं। ट्रक के पास खड़ी बिहार नंबर की कार से तीन लोगों को हिरासत में लिया गया।
गिरफ्तार तस्कर, नकदी भी बरामद
गिरफ्तार आरोपितों की पहचान—
- विकास कुमार, निवासी समस्तीपुर (बिहार)
- सोनू कुमार, निवासी वैशाली (बिहार)
- अरुण राय, निवासी वैशाली (बिहार)
के रूप में हुई है। तलाशी के दौरान उनके पास से 4 लाख 35 हजार रुपये नकद बरामद किए गए।
कागजात सही, लेकिन यहीं फंसा मामला
पूछताछ में आरोपितों ने बताया कि कफ सिरप देहरादून की फार्मा कंपनी से ई-वे बिल के जरिए खरीदा गया था और इसे समस्तीपुर (बिहार) की डिवाइन इंटरप्राइजेज ले जाया जा रहा था।
हालांकि जांच में सामने आया कि बिहार राज्य में इतनी बड़ी मात्रा में कोडिनयुक्त कफ सिरप का परिवहन और बिक्री प्रतिबंधित है। इसी आधार पर पुलिस ने एनडीपीएस एक्ट के तहत कार्रवाई की।
एनडीपीएस एक्ट में मुकदमा
पुलिस ने आरोपितों के खिलाफ—
- धारा 8 (लाइसेंस का अभाव),
- धारा 21 (नशीले पदार्थ का परिवहन),
- धारा 22 (निर्धारित मात्रा से अधिक नशीला पदार्थ)
के तहत मुकदमा दर्ज कर मिनी ट्रक और कार को सीज कर दिया है। तीनों को जेल भेज दिया गया है।
फार्मा कंपनी और ड्रग विभाग जांच में
जिला औषधि निरीक्षक निलेश शर्मा ने बताया कि बरामद कफ सिरप कोडिनयुक्त है, जिसका उपयोग दवा के रूप में होता है, लेकिन इसका दुरुपयोग नशे के लिए किया जाता है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि कागजात फिलहाल सही हैं, लेकिन इतनी बड़ी मात्रा में सप्लाई को लेकर देहरादून और बिहार (समस्तीपुर) के ड्रग विभाग से जवाब मांगा गया है। सिरप के सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं, जिसकी रिपोर्ट करीब 40 दिन में आने की संभावना है।
शराबबंदी से जुड़ा एंगल भी जांच में
पुलिस को आशंका है कि बिहार में शराबबंदी के चलते कोडिनयुक्त कफ सिरप को नशे के विकल्प के रूप में खपाया जा रहा था। इसी एंगल से पूरे नेटवर्क की गहन जांच की जा रही है।



