‘खून बढ़ाने’ की गोली बनी खतरा! स्कूलों में बंटी IFA दवा फेल, 5 बच्चे बीमार – 94 हजार गोलियां सील
कांगड़ा। हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले से एक गंभीर मामला सामने आया है। स्कूलों में एनीमिया (खून की कमी) दूर करने के लिए सरकारी कार्यक्रम के तहत बांटी जा रही आयरन फोलिक एसिड (IFA) की गोलियां गुणवत्ता जांच में फेल पाई गई हैं। लैब रिपोर्ट मिलते ही स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया और संदिग्ध बैच की सप्लाई तत्काल रोक दी गई।
कैसे खुला ‘बीमार गोली’ का राज?
मामले की शुरुआत नूरपुर क्षेत्र के एक निजी स्कूल से हुई। 24 दिसंबर को बच्चों को आयरन फोलिक एसिड की गोलियां दी गईं। दवा खाने के कुछ ही देर बाद 5 बच्चों की तबीयत बिगड़ गई।
बच्चों को उल्टी, घबराहट और बेचैनी की शिकायत होने लगी। स्थिति गंभीर देख स्कूल प्रशासन ने तुरंत उन्हें अस्पताल पहुंचाया। समय पर इलाज मिलने से सभी बच्चों की हालत स्थिर है, लेकिन घटना ने दवा की गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर दिए।
ड्रग इंस्पेक्टर की तत्परता से बड़ी अनहोनी टली
मामले की जानकारी मिलते ही नूरपुर के ड्रग इंस्पेक्टर प्यार चंद ठाकुर ने तुरंत कार्रवाई की। संदिग्ध बैच की करीब 94,400 गोलियां सील कर दी गईं।
यदि यह बैच अन्य स्कूलों में भी वितरित हो जाता, तो कई और बच्चे प्रभावित हो सकते थे। दवाओं के सैंपल जांच के लिए बद्दी स्थित सरकारी प्रयोगशाला भेजे गए।
लैब रिपोर्ट में दवा फेल
जांच रिपोर्ट में बैच नंबर TAF 25006 AL गुणवत्ता मानकों पर फेल पाया गया। रिपोर्ट के अनुसार दवा में आवश्यक तत्व निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं थे।
रिपोर्ट मिलते ही पूरे स्टॉक को जब्त कर लिया गया और अन्य केंद्रों से भी उसी कंपनी की सप्लाई की गई दवाओं की जांच शुरू कर दी गई है।
कंपनी पर कार्रवाई की तैयारी
कांगड़ा के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ. विवेक करोल ने मामले में सख्त रुख अपनाया है।
निर्देश दिए गए हैं कि:
- संबंधित बैच का वितरण तुरंत रोका जाए
- निर्माता कंपनी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की जाए
- जिले में सप्लाई हुई सभी दवाओं का ऑडिट किया जाए
- अन्य बैचों की भी सैंपलिंग की जाए
स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि बच्चों की सेहत के साथ किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।
डॉक्टरों की सलाह
डॉक्टरों का कहना है कि जिन बच्चों ने पहले यह दवा ली और कोई लक्षण नहीं दिखे, उन्हें घबराने की जरूरत नहीं है।
हालांकि यदि किसी बच्चे को उल्टी, चक्कर, पेट दर्द या एलर्जी जैसे लक्षण हों तो तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करना चाहिए।
उठ रहे हैं अहम सवाल
यह घटना कई सवाल खड़े करती है:
- क्या सप्लाई से पहले गुणवत्ता की पर्याप्त जांच हुई थी?
- सरकारी खरीद प्रक्रिया में लापरवाही कहां हुई?
- क्या यही बैच अन्य जिलों में भी भेजा गया?
स्कूल स्वास्थ्य कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों को एनीमिया से बचाना है, लेकिन यदि दवाएं ही मानक पर खरी न उतरें तो यह गंभीर चिंता का विषय है।
स्वास्थ्य तंत्र के लिए चेतावनी
विशेषज्ञों का मानना है कि अब पूरे प्रदेश में आयरन फोलिक एसिड दवाओं की व्यापक जांच होनी चाहिए। सप्लाई चेन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है।
यह घटना केवल एक जिले तक सीमित नहीं है, बल्कि सिस्टम के लिए चेतावनी है कि दवा गुणवत्ता नियंत्रण में किसी भी स्तर पर ढिलाई नहीं बरती जा सकती।
खून बढ़ाने वाली गोली खुद ही गुणवत्ता जांच में फेल निकली — यह स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए बड़ा सबक है। अब सबकी नजर इस पर है कि दोषी कंपनी के खिलाफ क्या ठोस कार्रवाई होती है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या सुधार किए जाते हैं।
बच्चों की सेहत सर्वोपरि है — यही इस पूरे घटनाक्रम का सबसे अहम संदेश है।


