खटीमा शराब कांड से हिला उत्तराखंड: भाजपा नेता ढिल्लू सिंह राणा समेत तीन की मौत, पूरे प्रदेश में शराब की सैंपलिंग के आदेश

 


खटीमा शराब कांड से हिला उत्तराखंड: भाजपा नेता ढिल्लू सिंह राणा समेत तीन की मौत, पूरे प्रदेश में शराब की सैंपलिंग के आदेश

देहरादून/खटीमा।  खटीमा में कथित रूप से शराब पीने के बाद भाजपा नेता ढिल्लू सिंह राणा समेत तीन लोगों की दर्दनाक मौत ने पूरे उत्तराखंड को झकझोर कर रख दिया है। इस सनसनीखेज घटना के बाद राज्य सरकार और आबकारी महकमे में हड़कंप मच गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए आबकारी आयुक्त अनुराधा पाल ने पूरे प्रदेश में शराब की व्यापक सैंपलिंग के आदेश जारी कर दिए हैं।

शुक्रवार को आबकारी विभाग की कई टीमों ने प्रदेशभर में एक साथ अभियान चलाते हुए एक हजार से अधिक शराब के सैंपल एकत्र किए। इन सैंपलों की शनिवार से देहरादून स्थित प्रयोगशाला में जांच शुरू की जाएगी। वहीं, आबकारी मुख्यालय से एक विशेष टीम को स्थलीय जांच के लिए खटीमा भेजा गया है।


शराब पीते ही बिगड़ी हालत, पेट में जलन और फिर मौत

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, खटीमा में मृतकों ने एक विशेष ब्रांड की शराब का सेवन किया था। शराब पीने के कुछ ही देर बाद तीनों के पेट में तेज जलन और बेचैनी शुरू हो गई। हालत तेजी से बिगड़ती चली गई और कुछ समय के भीतर ही तीनों की मौत हो गई।

इस घटना के बाद इलाके में आक्रोश फैल गया। परिजनों और स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि ठेकों पर मिलावटी शराब बेची जा रही है, जिसने जानलेवा रूप ले लिया।


मिलावटी शराब या जहरीला पानी? नई थ्योरी ने बढ़ाया सस्पेंस

हालांकि, प्राथमिक जांच के बाद मामले में एक नया और चौंकाने वाला मोड़ सामने आया है। सूत्रों के मुताबिक, जांच के दौरान एक केमिकल कैन की कहानी भी सामने आई है। बताया जा रहा है कि इस कैन में पानी भरा हुआ था, जिसे शराब में मिलाने के लिए इस्तेमाल किया गया।

शंका जताई जा रही है कि यह पानी किसी जहरीले या केमिकल युक्त स्रोत से भरा हो सकता है, जिसके कारण यह हादसा हुआ। अब जांच का फोकस सिर्फ शराब पर ही नहीं, बल्कि उस पानी और कैन पर भी केंद्रित हो गया है।


खटीमा पहुंची देहरादून से दो अफसरों की विशेष टीम

मामले की निष्पक्ष और गहन जांच के लिए आबकारी मुख्यालय ने देहरादून से दो वरिष्ठ अधिकारियों की टीम खटीमा भेज दी है। यह टीम ठेकों, गोदामों, सप्लाई चेन और संदिग्ध कैन की हर एंगल से जांच कर रही है।

साथ ही, शुक्रवार को पूरे दिन सरकारी ठेकों और गोदामों से विभिन्न ब्रांड की शराब की बोतलों के सैंपल लिए गए, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं राज्य में और जगहों पर भी ऐसी शराब तो नहीं पहुंची।


आबकारी आयुक्त का सख्त रुख: दोषियों को नहीं मिलेगी कोई राहत

आबकारी आयुक्त अनुराधा पाल ने साफ शब्दों में कहा है कि मामले की जांच पूरी निष्पक्षता और पारदर्शिता से की जाएगी।
उन्होंने कहा,

“सभी सैंपलों की लैब जांच शनिवार से शुरू कर दी जाएगी। जो टीम स्थलीय निरीक्षण के लिए भेजी गई है, उससे जल्द रिपोर्ट मांगी गई है। अगर कहीं भी गड़बड़ी या लापरवाही पाई गई, तो संबंधित के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी।”


प्रशासन पर उठे सवाल, लोगों में दहशत

इस घटना ने एक बार फिर राज्य में शराब की गुणवत्ता, निगरानी और सप्लाई सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लोग यह पूछने को मजबूर हैं कि अगर एक भाजपा नेता तक सुरक्षित शराब नहीं पहुंच पा रही, तो आम आदमी की सुरक्षा की गारंटी कौन लेगा?

खटीमा ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश में शराब पीने वालों के बीच दहशत का माहौल है। लोग आशंकित हैं कि कहीं यह मामला सिर्फ एक इलाके तक सीमित न हो।


जांच रिपोर्ट पर टिकी सबकी निगाहें

अब सबकी नजरें देहरादून लैब की जांच रिपोर्ट और खटीमा से आने वाली स्थलीय जांच पर टिकी हैं। यह रिपोर्ट तय करेगी कि मौत की वजह मिलावटी शराब थी, जहरीला पानी, या फिर कोई और खतरनाक केमिकल।

फिलहाल, इतना तय है कि खटीमा की यह घटना उत्तराखंड में शराब माफिया, लापरवाही और सिस्टम की कमजोरी पर एक बड़ा सवाल बनकर खड़ी हो गई है — और अगर दोषी बचे, तो भरोसा भी टूटेगा।

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