कलियर में ढाबे के पीछे मिला नशीली दवाओं का बोरा, उठे कई सवाल
कलियर। बृहस्पतिवार को कलियर क्षेत्र में एक ढाबे के पीछे से प्रतिबंधित नशीली दवाओं से भरा बोरा बरामद होने के बाद मामला केवल बरामदगी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अब ड्रग्स विभाग की कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर भी सवाल उठने लगे हैं। प्रथम दृष्टया यह मामला संदिग्ध परिस्थितियों में सामने आया है, जिससे पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष और गहन जांच की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
सूत्रों के अनुसार ड्रग्स विभाग को मुखबिर के माध्यम से सूचना मिली कि कलियर स्थित एक ढाबे के पीछे नशीली दवाओं से भरा बोरा पड़ा हुआ है। सूचना मिलने के बाद ड्रग्स इंस्पेक्टर हरीश सिंह अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे और ढाबे के पीछे से एक बोरा बरामद किया, जिसमें भारी मात्रा में प्रतिबंधित नशीली दवाएं बताई जा रही हैं। टीम ने मौके पर ही बोरे को कब्जे में लेकर सील कर दिया।
हालांकि जांच के दौरान सामने आई सीसीटीवी फुटेज ने पूरे मामले को और भी रहस्यमय बना दिया है। फुटेज में एक अज्ञात व्यक्ति रात के समय ढाबे के पीछे बोरा डालते हुए दिखाई दे रहा है। इस खुलासे के बाद यह आशंका भी जताई जा रही है कि कहीं किसी रंजिश के चलते ढाबा संचालक को फंसाने के लिए तो यह साजिश नहीं रची गई।
यहीं से कई गंभीर सवाल भी खड़े हो रहे हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब सीसीटीवी फुटेज में कोई व्यक्ति बोरा डालते हुए साफ दिखाई दे रहा है तो उसकी पहचान और गिरफ्तारी के लिए अब तक क्या कार्रवाई की गई है। इसके अलावा यह भी जांच का विषय है कि बरामद दवाएं आखिर कहां से आईं और इतनी बड़ी मात्रा में प्रतिबंधित दवाओं का बोरा किसी सार्वजनिक स्थान पर कैसे पहुंच गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों में ड्रग्स विभाग की जिम्मेदारी केवल बरामदगी तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि पूरे सप्लाई नेटवर्क और स्रोत की भी गहन जांच होनी चाहिए। यदि यह दवाएं वास्तव में प्रतिबंधित हैं तो यह भी पता लगाना जरूरी है कि यह किसी फार्मा सप्लाई चैन से निकली हैं या अवैध तस्करी के जरिए यहां तक पहुंचीं।
वरिष्ठ ड्रग्स इंस्पेक्टर हरीश का कहना है कि बरामद नशीली दवाओं को कब्जे में लेकर सील कर दिया गया है और पूरे मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है। उन्होंने बताया कि सीसीटीवी फुटेज के आधार पर संदिग्ध व्यक्ति की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है और दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल यह मामला केवल एक बरामदगी नहीं बल्कि कई परतों वाला प्रतीत हो रहा है। सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या यह किसी को फंसाने की साजिश है, या फिर इसके पीछे नशीली दवाओं के अवैध कारोबार का कोई बड़ा नेटवर्क सक्रिय है।
अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि ड्रग्स विभाग इस मामले की जांच को कितनी पारदर्शिता और गंभीरता से आगे बढ़ाता है और असली दोषियों तक कब तक पहुंच पाता है।



