आईसीएमआर और सीडीएससीओ ने इन-विट्रो डायग्नॉस्टिक (IVD) जांच के लिए बनाए मानक प्रोटोकॉल, 25 अगस्त तक आमंत्रित किए सुझाव
नई दिल्ली। देश में मेडिकल डिवाइस और डायग्नॉस्टिक किट की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) और केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने मिलकर इन-विट्रो डायग्नॉस्टिक (IVD) जांच के लिए मानक मूल्यांकन प्रोटोकॉल तैयार किए हैं। ये प्रोटोकॉल मेडिकल डिवाइस नियम 2017 के तहत लाइसेंस प्रक्रिया में जरूरी गुणवत्ता और प्रदर्शन आकलन को आसान बनाएंगे।
इन प्रोटोकॉल के तहत फ्लू, कोरोना, मलेरिया, डेंगू, निपाह और अन्य वायरस की पहचान करने वाले विभिन्न प्रकार के टेस्ट—जैसे आरटी-पीसीआर, रैपिड डायग्नॉस्टिक टेस्ट (RDT) और ELISA—की जांच और मूल्यांकन के तरीके तय किए गए हैं। कुल 15 अलग-अलग बीमारियों और टेस्ट प्रकारों के लिए यह मानक प्रक्रिया बनाई गई है।
इनमें शामिल हैं—
इन्फ्लुएंजा, कोरोना और आरएसवी वायरस की पहचान और अंतर बताने वाले टेस्ट
मलेरिया के लिए रैपिड, ELISA और PCR जांच
निपाह और चंडीपुरा वायरस की PCR जांच
डेंगू के लिए विभिन्न एंटीबॉडी टेस्ट
आईसीएमआर और सीडीएससीओ ने इन दस्तावेज़ों को सार्वजनिक कर दिया है और संबंधित कंपनियों, प्रयोगशालाओं व विशेषज्ञों से 25 अगस्त 2025 तक सुझाव मांगे हैं। सुझाव तय ईमेल (ivdevaluation@gmail.com) पर भेजे जा सकते हैं। इसके बाद इन प्रोटोकॉल में बदलाव की गुंजाइश बेहद सीमित होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन मानक प्रक्रियाओं से देश में बने डायग्नॉस्टिक किट की गुणवत्ता और विश्वसनीयता बढ़ेगी, जिससे मरीजों को सही समय पर और सही रिपोर्ट मिल सकेगी।