हिमाचल की फार्मा इंडस्ट्री पर फैली अफवाहों पर सरकार का बड़ा स्पष्टीकरण
80 से ज्यादा दवा इकाइयों के बंद होने का दावा गलत, सिर्फ 10 से कम लाइसेंस रद्द
शिमला/बद्दी। हिमाचल प्रदेश की फार्मास्युटिकल इंडस्ट्री को लेकर हाल के दिनों में फैली अफवाहों पर राज्य ड्रग्स कंट्रोल प्रशासन ने बड़ा और स्पष्ट बयान जारी किया है। सोशल मीडिया और कुछ समाचार माध्यमों में यह दावा किया जा रहा था कि संशोधित शेड्यूल-एम के अनुपालन न होने के कारण राज्य में 80 से अधिक दवा निर्माण इकाइयाँ बंद हो गई हैं, जिससे हजारों युवाओं की नौकरियाँ खतरे में पड़ गई हैं।
ड्रग्स कंट्रोल प्रशासन ने इन दावों को भ्रामक और तथ्यहीन बताते हुए कहा है कि वास्तविक स्थिति इससे बिल्कुल अलग है।
जोखिम आधारित निरीक्षण, स्थायी बंदी नहीं
राज्य औषधि नियंत्रक डॉ. मनीष कपूर ने स्पष्ट किया कि
केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) और हिमाचल प्रदेश ड्रग्स कंट्रोल प्रशासन संयुक्त रूप से दवा इकाइयों का Risk Based Inspection कर रहे हैं।
निरीक्षण के दौरान जिन इकाइयों में कमियाँ पाई जाती हैं, वहां पूरी फैक्ट्री या किसी विशेष सेक्शन में अस्थायी रूप से निर्माण रोकने के आदेश दिए जाते हैं। यह कार्रवाई दंडात्मक नहीं बल्कि सुधारात्मक है।
“यह रोक स्थायी नहीं होती। कमियों के सुधार और प्रशासन द्वारा सत्यापन के बाद निर्माण की अनुमति फिर से दे दी जाती है।”
80 नहीं, 10 से भी कम लाइसेंस रद्द
प्रशासन ने साफ किया कि:
- 80 से अधिक इकाइयों के लाइसेंस रद्द होने की खबर पूरी तरह गलत है
- जिन दवा निर्माण इकाइयों ने लाइसेंस स्वेच्छा से सरेंडर किए हैं या जिनके लाइसेंस रद्द किए गए हैं, उनकी संख्या 10 से अधिक नहीं है
कुछ कंपनियों ने खुद रोका उत्पादन
प्रेस नोट में यह भी बताया गया कि कई दवा कंपनियों ने:
- यूनिट के नवीनीकरण (Renovation)
- तकनीकी उन्नयन (Upgradation)
- संशोधित शेड्यूल-एम के अनुरूप ढांचे में बदलाव
के लिए स्वेच्छा से उत्पादन अस्थायी रूप से बंद किया है। इसे जबरन बंदी के रूप में पेश करना गलत है।
नौकरियों पर खतरे की बात भ्रामक
ड्रग्स कंट्रोल प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि:
- किसी भी स्तर पर फार्मा इंडस्ट्री को बंद करने की नीति नहीं है
- निरीक्षण का उद्देश्य दवा की गुणवत्ता, मरीजों की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन सुनिश्चित करना है
- नौकरियों को लेकर फैलाया जा रहा डर अफवाहों पर आधारित है
राज्य सरकार की सख्ती, लेकिन उद्योग के साथ
विशेषज्ञों का मानना है कि:
- संशोधित शेड्यूल-एम लागू करना केंद्र सरकार की नीति है
- इससे हिमाचल की दवा इंडस्ट्री की साख देश-विदेश में मजबूत होगी
- अल्पकालिक दिक्कतें हो सकती हैं, लेकिन लंबे समय में यह उद्योग और रोजगार दोनों के हित में है
प्रशासन की अपील
ड्रग्स कंट्रोल प्रशासन ने मीडिया और आम जनता से अपील की है कि:
- अप्रमाणित खबरों पर भरोसा न करें
- आधिकारिक सूचनाओं पर ही विश्वास करें
- अफवाहें फैलाकर उद्योग और युवाओं में भ्रम न पैदा करें



