हरिद्वार में बड़ा खुलासा! कई अस्पतालों में डॉक्टरों के दस्तावेज़ का दुरुपयोग — CMO ऑफिस सख्त, IMA को नोटिस, बड़ी कार्रवाई के संकेत

हरिद्वार में बड़ा खुलासा! कई अस्पतालों में डॉक्टरों के दस्तावेज़ का दुरुपयोग — CMO ऑफिस सख्त, IMA को नोटिस, बड़ी कार्रवाई के संकेत

हरिद्वार। जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) कार्यालय द्वारा हाल ही में किए गए औचक निरीक्षण में कई निजी अस्पतालों में गंभीर गड़बड़ियां सामने आई हैं। निरीक्षण टीम ने पाया कि कई अस्पतालों में जिन डॉक्टरों का नाम और दस्तावेज़ लगे हुए थे, वे मौके पर मौजूद ही नहीं थे। यानी अस्पताल की दीवारों पर डॉक्टर के रजिस्ट्रेशन नंबर और सर्टिफिकेट लगे हैं, लेकिन असल में मरीजों को देखने वाला डॉक्टर वहां होता ही नहीं। यह सीधे-सीधे धोखा, दुरुपयोग और कानून के उल्लंघन का मामला है।

जिला रजिस्ट्रीकरण प्राधिकरण के नोडल अधिकारी के अनुसार जांच के दौरान एक और बड़ा मामला सामने आया—एक ही डॉक्टर के दस्तावेज़ कई अस्पतालों में पाए गए। यानी कागज़ों पर डॉक्टर कई जगह तैनात दिख रहा है, लेकिन असल में वह कहीं भी मौजूद नहीं। इससे यह साफ संदेह पैदा हुआ कि अस्पतालों के संचालक डॉक्टरों के डॉक्यूमेंट्स का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं और बिना असली डॉक्टर की तैनाती के अस्पताल चला रहे हैं। यह स्थिति मरीजों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है।

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इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय ने इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) हरिद्वार और रूड़की को कड़ा नोटिस जारी किया है। नोटिस में निर्देश दिया गया है कि जिले में कार्यरत सभी डॉक्टर तुरंत नोटराइज्ड शपथ पत्र के माध्यम से यह जानकारी दें कि वे वास्तव में किस-किस अस्पताल में सेवाएं दे रहे हैं और किस जगह उनकी सेवा समाप्त हो चुकी है। इसका उद्देश्य जिले में डॉक्टरों की तैनाती की वास्तविक स्थिति को स्पष्ट करना है, ताकि फर्जी संचालन पर रोक लग सके।

IMA को यह जिम्मेदारी दी गई है कि वे अपने एसोसिएशन से जुड़े सभी डॉक्टरों से यह जानकारी जल्द से जल्द प्राप्त करके CMO कार्यालय में उपलब्ध कराएं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अब कागज़ों पर दिखाए गए डॉक्टरों की व्यवस्था नहीं चलेगी। हर अस्पताल में वास्तविक और पंजीकृत डॉक्टर की उपस्थिति अनिवार्य है।

इस मामले की प्रतिलिपि जिला अधिकारी हरिद्वार और मुख्य चिकित्सा अधिकारी को भी भेज दी गई है, जिससे यह स्पष्ट है कि शासन-प्रशासन इस मुद्दे को अत्यंत गंभीरता से देख रहा है। आने वाले समय में उन अस्पतालों पर कड़ी कार्रवाई की तैयारी है, जहां डॉक्टरों की अनुपस्थिति साबित होती है। ऐसी संस्थाओं पर लाइसेंस निलंबन, अस्पताल सीलिंग और कानूनी कार्रवाई जैसे कदम उठाए जा सकते हैं।

हरिद्वार में सामने आया यह मामला स्वास्थ्य सेवाओं की विश्वसनीयता पर बड़ा सवाल है। मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जांच रिपोर्ट के बाद प्रशासन का रुख बेहद सख्त दिखाई दे रहा है, और उम्मीद है कि इससे जिले में फर्जी चिकित्सालय संचालन पर रोक लगेगी और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार आएगा।

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