औचक निरीक्षण में खुली कई औषधि कंपनियों की पोल, दो इकाइयों के उत्पादन पर रोक की संस्तुत

औचक निरीक्षण में खुली कई औषधि कंपनियों की पोल, दो इकाइयों के उत्पादन पर रोक की संस्तुत  रुड़की-  राज्य में…
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औचक निरीक्षण में खुली कई औषधि कंपनियों की पोल, दो इकाइयों के उत्पादन पर रोक की संस्तुत

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 रुड़की-  राज्य में औषधियों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने एवं दवा निर्माण कंपनियों को उच्च मानकों पर कार्य करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने सख्ती तेज कर दी है। अपर आयुक्त श्री ताजबर सिंह के निर्देश पर गठित क्विक रिस्पॉन्स टीम ने बुधवार को रुड़की-भगवानपुर क्षेत्र की कई औषधि निर्माण इकाइयों का औचक निरीक्षण किया।

निरीक्षण के दौरान टीम ने Hiral Labs Pvt. Ltd. का भी जायजा लिया। यह कंपनी WHO-GMP प्रमाणित है और हरिद्वार की पहली ऐसी इकाई है जहाँ इंजेक्टेबल एंटी-कैंसर दवाओं का निर्माण किया जा रहा है। कंपनी भविष्य में अपनी दवाओं का निर्यात भी विभिन्न देशों में करने की तैयारी कर रही है।

लेकिन टीम को इस दौरान कुछ कंपनियों की गंभीर अनियमितताएँ भी मिलीं। जांच में पाया गया कि कुछ इकाइयाँ केवल आर्थिक लाभ के लिए नियमों को ताक पर रखकर निम्न स्तर की दवाएँ बना रही हैं। इस पर कार्रवाई करते हुए विभाग ने भगवानपुर क्षेत्र की दो कंपनियों के उत्पादन कार्य पर रोक लगाने की संस्तुति की है। स्पष्ट किया गया है कि जब तक ये इकाइयाँ कमियों को दूर नहीं करेंगी, उन्हें उत्पादन शुरू करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

अधिकारियों ने साफ संदेश दिया कि आने वाले समय में संशोधित GMP नियम (Good Manufacturing Practices) को लागू किया जाएगा। इसका पालन न करने वाली कंपनियों के खिलाफ लाइसेंस निलंबन तक की कार्यवाही होगी।

निरीक्षण दल में शामिल अधिकारी:

सुधीर कुमार, एडीसी गढ़वाल मंडल

अनीता भारती, वरिष्ठ औषधि निरीक्षक, हरिद्वार

हरीश सिंह, औषधि निरीक्षक, हरिद्वार

मेघा, औषधि निरीक्षक, हरिद्वार

ऋषभ धामा, औषधि निरीक्षक, टिहरी

पूजा रानी, औषधि निरीक्षक, बागेश्वर

पूजा जोशी, औषधि निरीक्षक, अल्मोड़ा

 बड़ी बात:

राज्य औषधि विभाग की यह कार्रवाई साफ संकेत है कि अब औषधि कंपनियों की मनमानी नहीं चलेगी। गुणवत्ता से समझौता करने वालों पर गाज गिरना तय है।

 

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