हरिद्वार में फार्मा कंपनी पर FDA की बड़ी कार्रवाई — ताजबर सिंह की ‘जीरो टोलरेंस नीति’ से हड़कंप
हरिद्वार | उत्तराखंड के फार्मा सेक्टर में अब ‘समझौते की गुंजाइश’ खत्म हो चुकी है। FDA के अपर आयुक्त ताजबर सिंह के स्पष्ट निर्देश हैं — “गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं, नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सीधी कार्रवाई।”
इसी नीति के तहत हरिद्वार में एक नामी फार्मा कंपनी पर बड़ी कार्रवाई की गई है, जिसने पूरे औद्योगिक क्षेत्र में हलचल पैदा कर दी है।
बिना बोर्ड, बंद गेट, ताले और अंदर छिपी लापरवाही
FDA की निरीक्षण टीम जब US & VG हेल्थकेयर के प्लांट पर पहुंची, तो कंपनी के बाहर कोई बोर्ड नहीं था। दरवाज़ा अंदर से बंद, और उस पर ताले जड़े थे।
सीनियर ड्रग इंस्पेक्टर अनीता भारती की अगुवाई में टीम ने तुरंत पुलिस बुलाकर ताले तुड़वाए — और अंदर घुसते ही जो कुछ देखा गया, उसने हैरान कर दिया।
अंदर कोई अधिकृत केमिस्ट मौजूद नहीं
गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली पूरी तरह गायब
ISO और GMP सर्टिफिकेट होने के बावजूद उत्पादन पूरी तरह नियमों के खिलाफ
उत्पादन में न तो मानकों का पालन और न ही रिकॉर्ड की पारदर्शिता
FDA ने मौके पर ही रोकी दवाओं की सप्लाई, स्टॉप प्रोडक्शन का आदेश
FDA ने तुरंत कार्रवाई करते हुए प्लांट में दवाओं की सप्लाई पर रोक लगाई और स्टॉप प्रोडक्शन का आदेश जारी कर दिया। यह सिर्फ एक चेतावनी नहीं, बल्कि फार्मा सेक्टर को दिया गया एक कड़ा संदेश था।
ताजबर सिंह का स्पष्ट संदेश: “अब चेतावनी नहीं, कार्रवाई होगी”
FDA के अपर आयुक्त ताजबर सिंह ने साफ कहा है —
“अब वह दौर चला गया जब नोटिस दिए जाते थे और फाइलें बंद हो जाती थीं। अब हर निरीक्षण का मतलब है जवाबदेही। अगर आप मानकों पर खरे नहीं उतरे, तो लाइसेंस बचाना मुश्किल होगा।”
हरिद्वार में ड्रग कंट्रोल टीम लगातार एक्शन में
पहले सुरक्षा फार्मा पर गिरी गाज, जिसे CDSO और राज्य औषधि विभाग ने स्टॉप प्रोडक्शन का आदेश देकर चेतावनी दी थी। अब वहां निर्माण कार्य के बीच कमियां दुरुस्त की जा रही हैं।
इसके बाद THRIPT फार्मा का भी औचक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण में कुछ मामूली खामियां मिलीं, जिन्हें सुधारने के निर्देश दिए गए।
जनहित में FDA का सख्त रुख सराहनीय
जहां एक ओर देशभर में नकली और घटिया दवाइयों को लेकर चिंता बनी हुई है, वहीं हरिद्वार में FDA की यह कार्रवाई जनस्वास्थ्य की रक्षा की दिशा में एक मजबूत कदम मानी जा रही है। यह दिखाता है कि अब दवा इंडस्ट्री को नियमों के खिलाफ चलने की छूट नहीं मिलेगी।
FDA की इस कार्रवाई से न केवल लापरवाह फार्मा कंपनियों को सबक मिला है, बल्कि यह भी संदेश गया है कि दवा निर्माण सिर्फ मुनाफे का धंधा नहीं, बल्कि यह एक जिम्मेदारी है — जनता की सेहत की जिम्मेदारी।
और इस जिम्मेदारी को नजरअंदाज़ करने वालों पर अब ताजबर सिंह की टीम की नजर है — और अगली दस्तक किसी भी गेट पर हो सकती है।