नकली दवाओं का ज़हर! मोहाली में मौत का कारोबार बेनकाब, दो अवैध फैक्ट्रियों पर छापा
गंदगी में बन रहीं एलोपैथिक-आयुर्वेदिक दवाएं, 16 लाख जुर्माना झेल चुका था एक कारखाना
मोहाली/जीरकपुर। पंजाब के मोहाली ज़िले में पुलिस ने नकली दवाओं के खतरनाक नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए जीरकपुर के पभात गोदाम एरिया में मौत का कारोबार चलाने वाली दो फैक्ट्रियों पर बड़ी कार्रवाई की है। देर शाम हुई इस छापेमारी में सामने आया कि यहां बिना किसी वैध लाइसेंस के एलोपैथिक, आयुर्वेदिक दवाएं, फूड सप्लीमेंट्स और ब्यूटी प्रोडक्ट्स तैयार किए जा रहे थे—वह भी अत्यंत गंदे और अमानवीय हालात में।
कार्रवाई की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तुरंत फूड सेफ्टी और ड्रग कंट्रोल विभाग को मौके पर बुलाया। संयुक्त जांच में भारी मात्रा में नकली दवाइयां, रैपर, कच्चा माल और तैयार उत्पाद बरामद किए गए। अधिकारियों के अनुसार, इन उत्पादों का सेवन सीधे मानव स्वास्थ्य के लिए घातक साबित हो सकता है।

पहले भी फेल हो चुके थे सैंपल, फिर भी चलता रहा ज़हर का खेल
प्रारंभिक जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि इनमें से एक फैक्ट्री के सैंपल पहले भी मानकों पर फेल हो चुके थे, जिसके बाद उस पर 16 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया था। सवाल यह है कि इतनी बड़ी कार्रवाई के बावजूद कई वर्षों तक अवैध निर्माण कैसे चलता रहा? क्या सिस्टम की निगरानी में भारी चूक हुई?

6 घंटे तक चली जांच, फैक्ट्री सील
ड्रग कंट्रोल विभाग की टीम ने करीब 6 घंटे तक गहन जांच की और दर्जनों सैंपल एकत्र किए। सभी आवश्यक मानकों को दरकिनार करने के चलते एक फैक्ट्री को मौके पर ही सील कर दिया गया। अधिकारियों का कहना है कि यहां बने उत्पादों का बाज़ार में पहुंचना जनस्वास्थ्य पर सीधा हमला है।
अब पूरे नेटवर्क की जांच, कई राज्यों तक फैली सप्लाई का शक
पुलिस अब इस बात की तह तक जा रही है कि नकली दवाओं की सप्लाई किन-किन राज्यों और इलाकों में की जा रही थी। सभी सैंपल सरकारी लैब भेज दिए गए हैं। लैब रिपोर्ट आने के बाद दोषियों के खिलाफ ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट सहित सख्त धाराओं में मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तारी की जाएगी।
सबसे बड़ा सवाल
👉 जब सैंपल पहले ही फेल हो चुके थे, तो फैक्ट्री दोबारा कैसे चलने दी गई?
👉 क्या नकली दवाओं का यह नेटवर्क और भी शहरों में फैला है?
यह कार्रवाई सिर्फ एक छापा नहीं, बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था की सुरक्षा पर निर्णायक लड़ाई है। अब निगाहें प्रशासन पर हैं—क्या दोषियों को कड़ी सज़ा मिलेगी या यह मामला भी फाइलों में दब जाएगा?



