दिल्ली के पश्चिम विहार में नकली दवाओं का बड़ा रैकेट बेनकाब, कई राज्यों में हो रही थी सप्लाई
नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां नकली दवाओं के एक बड़े रैकेट का भंडाफोड़ हुआ है। दिल्ली पुलिस और ड्रग्स कंट्रोल विभाग की संयुक्त टीम ने सोमवार देर रात पश्चिम विहार इलाके में छापा मारकर इस रैकेट का खुलासा किया।
आवासीय फ्लैट बना था अस्थायी गोदाम
यह गिरोह एक सामान्य आवासीय अपार्टमेंट के अंदर अस्थायी गोदाम बनाकर काम कर रहा था। इस फ्लैट में कई नामी फार्मा कंपनियों के नाम पर नकली दवाएं बनाई और स्टोर की जा रही थीं। इसके बाद इन दवाओं को बड़ी मात्रा में देश के विभिन्न राज्यों में भेजा जा रहा था।
कई बड़ी कंपनियों के नाम पर बेची जा रहीं थीं नकली दवाएं
जांच के दौरान जब्त दवाओं पर जिन नामी कंपनियों के लेबल पाए गए, उनमें शामिल हैं:
Abbott (एबॉट)
MSD
Sanofi (सनोफी)
Macleods (मैक्लॉइड्स)
Dr Reddy’s (डॉ. रेड्डीज़)
Swiss Garnier
MSN Laboratories (एमएसएन लैब्स)
इन नामों का उपयोग कर दवाओं को असली दिखाने का प्रयास किया गया, ताकि वे बाजार में आसानी से बिक सकें और आम लोगों को धोखा दिया जा सके।
सैंपल भेजे गए लैब, पूरे नेटवर्क की जांच जारी
अधिकारियों ने बताया कि प्रारंभिक तौर पर ये दवाएं नकली या संदिग्ध प्रतीत हो रही हैं। उनकी गुणवत्ता और वास्तविकता की पुष्टि के लिए इन्हें परीक्षण हेतु सरकारी प्रयोगशालाओं में भेजा गया है। साथ ही पूरे नेटवर्क की परतें खोलने के लिए जांच तेज कर दी गई है।
कई राज्यों में फैला है रैकेट
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह गिरोह सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं था। इस रैकेट की जड़ें कई राज्यों तक फैली हुई हैं। दिल्ली से बाहर भेजी गई दवाओं की ट्रैकिंग शुरू कर दी गई है और उन स्थानों पर भी छापेमारी की संभावना है।
जनस्वास्थ्य पर गंभीर खतरा
यह मामला न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि करोड़ों लोगों की जान से भी खिलवाड़ है। नकली दवाएं कई बार जानलेवा साबित हो सकती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय पर इस रैकेट का पर्दाफाश न हुआ होता, तो इसके परिणाम भयावह हो सकते थे।
सरकार की कार्रवाई और चेतावनी
ड्रग्स कंट्रोल विभाग और दिल्ली पुलिस अब इस मामले को ‘टॉप प्रायोरिटी केस’ के रूप में देख रहे हैं। इसमें शामिल लोगों की गिरफ्तारी, नेटवर्क का विस्तार, और नकली दवाओं के वितरण में संलिप्त फार्मेसी या एजेंट्स पर भी शिकंजा कसा जाएगा।
यह घटना एक बार फिर से दिखाती है कि फार्मा सेक्टर में निगरानी और गुणवत्ता नियंत्रण कितना जरूरी है। आम नागरिकों को भी सतर्क रहने की जरूरत है – केवल लाइसेंस प्राप्त मेडिकल स्टोर से ही दवाएं खरीदें और किसी भी संदिग्ध पैकेजिंग या कीमत की सूचना तुरंत संबंधित विभाग को दें।