कोलगेट, फेयर एंड लवली, डेटॉल, अमूल घी सहित हजारों प्रोडक्ट नकली पुलिस का बड़ा खुलासा: चार गिरफ्तार
कोलगेट, फेयर एंड लवली, डेटॉल, अमूल घी सहित हजारों नकली उत्पाद बरामद; सांगानेर में मकान को बनाया गया था फैक्ट्री
जयपुर। शहर की सांगानेर पुलिस ने नकली ब्रांडेड उत्पाद बनाने वाले एक संगठित गिरोह का भंडाफोड़ कर दिया है। यह गिरोह लंबे समय से रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले नामी-गिरामी कंपनियों के उत्पादों की नकली कॉपी तैयार कर बाजार में सप्लाई कर रहा था। पुलिस ने छापा मारकर भारी मात्रा में नकली सामान जब्त किया है और गिरोह के सरगना मनीष कुमार गुप्ता समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया है।
इस कार्रवाई से न केवल लाखों रुपये का नकली सामान जब्त हुआ है, बल्कि उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़े बड़े खतरे का भी खुलासा हुआ है।
गुप्त सूचना से खुला बड़ा खेल
डीसीपी साउथ राजर्षि राज ने बताया कि डीएसटी टीम को सूचना मिली थी कि सांगानेर सदर थाना क्षेत्र के सचिवालय नगर में एक मकान के भीतर नकली उत्पाद बनाए जा रहे हैं। सूचना पुख्ता होने पर एसीपी सुरेंद्र सिंह के नेतृत्व में विशेष टीम गठित की गई। पुलिस ने मकान नंबर 2769 पर दबिश दी, जो कि मनीष कुमार गुप्ता का है।
यह मकान किसी फैक्ट्री से कम नहीं था। अंदर हर कमरे में पैकिंग का काम चल रहा था। अलग-अलग कंपनियों के नकली उत्पाद तैयार कर उन्हें असली जैसे रैपर और पैकिंग में डालकर सप्लाई के लिए रखा गया था।
बरामद सामान देखकर दंग रह गई पुलिस
पुलिस ने छापेमारी के दौरान जो सामान जब्त किया, उसकी सूची इतनी लंबी है कि सुनकर कोई भी हैरान रह जाए।
साबुन और डिटर्जेंट – गोदरेज और डेटॉल के 9,000 से ज्यादा साबुन, सर्फ एक्सल ईजी वॉश के 5,772 पैकेट, डिटर्जेंट पाउडर तैयार करने का कच्चा माल और पैकिंग रोल।
टूथपेस्ट और कॉस्मेटिक उत्पाद – कोलगेट और क्लोजअप के 2,000 से अधिक पैकेट, फेयर एंड लवली की 540 ट्यूब, वैसलीन के 17 पैक, आयोडेक्स की 1053 डिब्बियां और विक्स की 340 डिब्बियां।
खाद्य सामग्री और घी – अमूल, सरस, कृष्णा, लोटस और महान ब्रांड का नकली घी, करीब 100 लीटर से ज्यादा। साथ ही परम्परा रिफाइंड तेल और वनस्पति घी के टिन भी बरामद।
बीड़ी, सिगरेट और पान मसाला – गोल्ड फ्लैक सिगरेट के 2,226 पैकेट, बीड़ी के सैकड़ों पूड़े, तानसेन पान मसाला और जर्दा के सैकड़ों पैकेट।
अन्य उत्पाद – माहेश्वरी चाय, फेवीक्विक, ऑल आउट जैसे रोजमर्रा में काम आने वाले सामान।
इतना ही नहीं, पुलिस ने फैक्ट्री से नकली घी और सर्फ बनाने की सामग्री, पैकिंग मशीनें और हजारों खाली रैपर भी जब्त किए।
गिरफ्तार आरोपी
पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है –
1. मनीष कुमार गुप्ता (46) – गिरोह का सरगना, मूल निवासी टोंक।
2. नावेद खान (21) – निवासी टोंक।
3. अमन सैन (19) – निवासी टोंक।
4. शंकर लाल शर्मा (48) – निवासी सांगानेर, जयपुर।
मनीष कुमार गुप्ता ने ही इस मकान को नकली फैक्ट्री में तब्दील कर रखा था।
कैसे चल रहा था कारोबार?
गिरोह बड़े सुनियोजित तरीके से नकली सामान तैयार करता था। असली कंपनियों के नाम और लोगो वाले रैपर और पैकेट पहले से तैयार करवाए जाते। फिर खुले में तैयार किया गया नकली सामान उनमें पैक कर दिया जाता।
इसके बाद यह माल जयपुर शहर की सैकड़ों छोटी-बड़ी दुकानों तक पहुंचाया जाता। दुकानदार भी ज्यादा मुनाफे के लालच में इस नकली सामान को खरीदते और ग्राहकों को असली बताकर बेचते। इस तरह गिरोह का नेटवर्क तेजी से फैल गया था।
खतरनाक है नकली सामान का सेवन
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह केवल धोखाधड़ी का मामला नहीं है बल्कि लोगों के स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा है। नकली घी और तेल में इस्तेमाल किए जाने वाले केमिकल्स शरीर को नुकसान पहुंचा सकते हैं। नकली टूथपेस्ट, क्रीम और बाम से त्वचा और दांतों की गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। यहां तक कि नकली सिगरेट और पान मसाले से कैंसर जैसे रोगों का खतरा कई गुना बढ़ सकता है।
शहर में फैला हुआ है नकली उत्पादों का जाल
जानकारों का कहना है कि जयपुर जैसे बड़े शहरों में नकली उत्पादों का कारोबार तेजी से बढ़ा है। एक अनुमान के मुताबिक शहर की लगभग हर तीसरी दुकान पर किसी न किसी ब्रांड का नकली सामान मिलता है। दुकानदार असली और नकली उत्पाद मिलाकर बेचते हैं ताकि ग्राहक को आसानी से शक न हो।
पुलिस की चेतावनी और अगली कार्रवाई
डीसीपी राजर्षि राज ने कहा कि पुलिस उपभोक्ताओं को जागरूक करने के लिए अभियान चलाएगी। लोगों से अपील है कि यदि उन्हें किसी दुकान पर संदिग्ध सामान बिकता दिखे तो तुरंत पुलिस को सूचना दें।
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि गिरोह का नेटवर्क किन-किन दुकानों तक फैला हुआ था और रैपर तैयार कराने में किसका हाथ है। जांच एजेंसियां इस मामले में कर चोरी और ब्रांड कंपनियों की बौद्धिक संपदा से जुड़े अपराधों की भी जांच करेंगी।
जयपुर पुलिस की इस कार्रवाई से न केवल एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश हुआ है बल्कि आम उपभोक्ताओं को भी यह संदेश गया है कि बाजार में उपलब्ध हर ब्रांडेड उत्पाद असली नहीं होता। उपभोक्ताओं को चाहिए कि वे हमेशा भरोसेमंद दुकानों से ही सामान खरीदें और संदिग्ध उत्पादों की जानकारी तुरंत संबंधित विभाग को दें।