केंद्र का बड़ा जीएसटी सुधार प्रस्ताव: दरें होंगी सरल, विलासिता वस्तुओं पर कड़ा प्रहार
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने वस्तु एवं सेवा कर (GST) ढांचे में व्यापक बदलाव का खाका तैयार किया है, जिसका उद्देश्य कर प्रणाली को अधिक सरल, पारदर्शी और उपभोक्ता-अनुकूल बनाना है। सरकारी सूत्रों के हवाले से समाचार एजेंसी पीटीआई की शुक्रवार को जारी रिपोर्ट के अनुसार, प्रस्तावित बदलावों के तहत अधिकांश वस्तुओं की कर दरों को मौजूदा चार स्तरीय संरचना से घटाकर दो प्रमुख दरों — 5 प्रतिशत और 18 प्रतिशत — में समेटने की योजना है।
इन सुधारों में, आम उपभोक्ता की जेब पर सीधा असर डालने वाले कदमों में एक यह है कि दैनिक उपयोग की वस्तुओं पर कर बोझ घटेगा। वहीं, तंबाकू जैसे विलासिता और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक उत्पादों पर विशेष कर लगाकर उनकी खपत को नियंत्रित करने का प्रयास होगा। प्रस्ताव के अनुसार, ऐसे उत्पादों पर 40 प्रतिशत का विशेष कर (सिन टैक्स) लगाया जाएगा, जो मौजूदा ढांचे से कहीं अधिक सख्त होगा।
कौन-सी दर किस पर लागू होगी?
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, वर्तमान में 12 प्रतिशत कर दर वाले लगभग 99 प्रतिशत सामानों को 5 प्रतिशत स्लैब में स्थानांतरित करने की योजना है। इसका सीधा फायदा आम जनता को मिलेगा क्योंकि इन वस्तुओं में कई आवश्यक उपभोक्ता उत्पाद और सामान्य उपभोग की वस्तुएं शामिल हैं।
दूसरी ओर, जो वस्तुएं वर्तमान में 28 प्रतिशत कर स्लैब में आती हैं — जिनमें गाड़ियां, कुछ इलेक्ट्रॉनिक्स और विलासिता की वस्तुएं शामिल हैं — उनमें से लगभग 90 प्रतिशत को घटाकर 18 प्रतिशत स्लैब में लाने की सिफारिश की गई है। इससे इन वस्तुओं के दामों में भी गिरावट की संभावना है, हालांकि जिन पर ‘सिन टैक्स’ लगेगा, उनकी कीमतें बढ़ सकती हैं।
पेट्रोलियम उत्पाद अभी भी बाहर
प्रस्तावित सुधारों में एक बड़ा बिंदु यह है कि पेट्रोल, डीजल, प्राकृतिक गैस और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों को फिलहाल GST व्यवस्था में शामिल नहीं किया जाएगा। इसका कारण राज्यों की राजस्व निर्भरता और इस क्षेत्र में जटिल कर संरचना है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में इस पर भी विचार किया जा सकता है, जिससे ईंधन के दामों पर कर का असर सीमित हो सके।
वर्तमान और प्रस्तावित ढांचे में अंतर
वर्तमान जीएसटी ढांचा:
5%, 12%, 18% और 28% — चार मुख्य दरें
विशेष उत्पादों पर ‘सेस’ और अतिरिक्त कर
दर निर्धारण में कई स्तर और जटिलताएं
प्रस्तावित जीएसटी ढांचा:
5% और 18% — दो मुख्य दरें
तंबाकू व अन्य हानिकारक वस्तुओं पर 40% विशेष कर
कर निर्धारण में सरलता और पारदर्शिता
सरकार का तर्क — सरलता और पारदर्शिता
सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार का मानना है कि मौजूदा चार स्लैब वाली संरचना जटिल है और इससे न केवल व्यापारियों के लिए अनुपालन कठिन होता है, बल्कि उपभोक्ताओं में भी भ्रम की स्थिति रहती है। दरों को सरल बनाने से न केवल कर संग्रहण में पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि राजस्व में भी स्थिरता आएगी।
उपभोक्ता पर असर
यदि प्रस्ताव लागू होता है तो —
खाद्य पदार्थ, पैकेज्ड सामान, घरेलू उपयोग की वस्तुएं सस्ती हो सकती हैं।
कार, बाइक और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की कीमतों में कमी आ सकती है।
तंबाकू, सिगरेट, गुटखा और अन्य हानिकारक वस्तुएं महंगी हो जाएंगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे एक ओर जहां आम लोगों को राहत मिलेगी, वहीं विलासिता और हानिकारक उत्पादों के इस्तेमाल पर अंकुश लगेगा।
विशेष कर क्यों?
40 प्रतिशत विशेष कर लगाने का उद्देश्य न केवल राजस्व बढ़ाना है, बल्कि यह एक स्वास्थ्य नीति का हिस्सा भी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) भी लंबे समय से तंबाकू उत्पादों पर ऊंचे कर लगाने की सिफारिश करता रहा है ताकि उनकी खपत कम की जा सके। सरकार का मानना है कि महंगे होने पर इन उत्पादों की मांग घटेगी और स्वास्थ्य पर बोझ कम होगा।
राज्यों की भूमिका और चुनौतियां
GST परिषद में इस प्रस्ताव को राज्यों की मंजूरी आवश्यक होगी। राज्यों के लिए यह निर्णय आसान नहीं होगा क्योंकि कर ढांचे में बदलाव से उनके हिस्से के राजस्व पर असर पड़ सकता है। विशेष रूप से पेट्रोलियम को GST के बाहर रखने का कारण यही है कि राज्य इस पर भारी वैट लगाकर बड़ा राजस्व कमाते हैं।
वित्त विशेषज्ञों का कहना है कि दरों में कटौती के बावजूद यदि कर संग्रह बढ़ाना है तो कर अनुपालन में सुधार और कर आधार का विस्तार करना होगा।
सूत्रों के अनुसार, यह प्रस्ताव आगामी GST परिषद की बैठक में रखा जाएगा। मंजूरी मिलने पर इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा सकता है, ताकि व्यापार जगत और कर अधिकारियों को नई व्यवस्था के अनुकूल होने का समय मिल सके।
यदि सब कुछ योजना के अनुसार चलता है, तो अगले वित्त वर्ष की शुरुआत से नया GST ढांचा लागू हो सकता हैं