अकुम्स और ज़ाम्बिया सरकार मिलकर बनाएंगे दवा निर्माण संयंत्र, अफ्रीकी देशों को भी होगा फायदा
लुसाका/दिल्ली। भारत की प्रमुख दवा निर्माण कंपनी अकुम्स और ज़ाम्बिया सरकार ने मिलकर एक नई दवा निर्माण फैक्ट्री स्थापित करने का बड़ा कदम उठाया है। यह पहल न सिर्फ ज़ाम्बिया के मरीजों को उच्च गुणवत्ता वाली और किफायती जेनेरिक दवाएं उपलब्ध कराएगी बल्कि भविष्य में कई पड़ोसी अफ्रीकी देशों को भी इसका लाभ मिलेगा।
कंपनी की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, ज़ाम्बिया में बनने वाला यह अत्याधुनिक संयंत्र एक नई जॉइंट वेंचर कंपनी (JV) के तहत स्थापित होगा। इस कंपनी में अकुम्स की 51 प्रतिशत और ज़ाम्बिया सरकार की 49 प्रतिशत हिस्सेदारी होगी। इस साझेदारी के तहत बनाई जाने वाली दवा फैक्ट्री का मुख्यालय ज़ाम्बिया में ही रहेगा। कंपनी के संचालन और फैसलों की जिम्मेदारी दोनों पक्षों के प्रतिनिधियों वाली बोर्ड टीम के पास होगी।
यह संयंत्र बनने के बाद ज़ाम्बिया की जनता को स्थानीय स्तर पर सस्ती और भरोसेमंद दवाएं मिल सकेंगी। अभी तक ज़ाम्बिया अपनी ज्यादातर दवा आपूर्ति आयात पर निर्भर करता है। इस फैक्ट्री के शुरू होने से न केवल आयात पर निर्भरता घटेगी बल्कि दवा उद्योग में स्थानीय रोजगार भी बढ़ेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस परियोजना से ज़ाम्बिया की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
अकुम्स का कहना है कि भविष्य में इस संयंत्र में बनने वाली दवाओं का निर्यात ज़िम्बाब्वे, नामीबिया, बोत्सवाना, मलावी, तंज़ानिया और मोज़ाम्बिक जैसे पड़ोसी अफ्रीकी देशों में भी किया जाएगा। इससे पूरे दक्षिणी अफ्रीकी क्षेत्र में किफायती दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित होगी।
सूत्रों के मुताबिक, इस जॉइंट वेंचर के तहत बनने वाले संयंत्र की स्थापना का काम वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके बाद निर्माण कार्य तेजी से शुरू किया जाएगा। अनुमान है कि फैक्ट्री चालू होने के बाद वहां प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से सैकड़ों लोगों को रोजगार मिलेगा।
अकुम्स ने पहले भी भारत और अन्य देशों में दवा निर्माण में अपनी उत्कृष्ट पहचान बनाई है। कंपनी की रणनीति है कि वह वैश्विक स्तर पर उन क्षेत्रों तक पहुंचे जहां सस्ती और गुणवत्तापूर्ण दवाओं की सबसे अधिक आवश्यकता है। ज़ाम्बिया सरकार ने भी इस परियोजना को देश की स्वास्थ्य सेवाओं के लिए ऐतिहासिक कदम बताया है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह साझेदारी भारत और अफ्रीका के बीच बढ़ते औद्योगिक और स्वास्थ्य सहयोग का नया उदाहरण है। भारत लंबे समय से अफ्रीका को दवाओं की आपूर्ति में प्रमुख भूमिका निभाता रहा है। अब यह फैक्ट्री उस सहयोग को और अधिक मजबूत करेगी।
ज़ाम्बिया में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति को देखते हुए इस फैक्ट्री को एक बड़ा कदम माना जा रहा है। वहां लंबे समय से दवाओं की कमी और महंगाई को लेकर चुनौतियां रही हैं। ऐसे में इस परियोजना से वहां के मरीजों को राहत मिलने की उम्मीद है।
अकुम्स और ज़ाम्बिया सरकार की इस संयुक्त पहल से न केवल अफ्रीकी देशों को दवाओं की आपूर्ति में आत्मनिर्भरता मिलेगी, बल्कि दोनों देशों के बीच आर्थिक और औद्योगिक रिश्तों को भी नई ऊंचाई मिलेगी।