ग़ैर-अनुसूचित दवाओं की कीमतों पर एनपीपीए का सख़्त निर्देश एमआरपी में 10% से अधिक की बढ़ोतरी न करें।
राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) ने दवा कंपनियों को चेतावनी दी है कि वे ग़ैर-अनुसूचित फॉर्मूलेशन और चिकित्सा उपकरणों के एमआरपी (Maximum Retail Price) को एक समान करें और किसी भी स्थिति में पिछले 12 महीनों में एमआरपी में 10% से अधिक की बढ़ोतरी न करें।
एनपीपीए ने कहा है कि यह निर्देश औषधि (मूल्य नियंत्रण) आदेश, 2013 (DPCO, 2013) के पैरा 20 के तहत जारी किया गया है, जो कि आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के अंतर्गत आता है।
“सभी निर्माताओं को डीपीसीओ, 2013 के पैरा 20 के प्रावधानों का कड़ाई से पालन करना होगा। उल्लंघन की स्थिति में धारा 7 के तहत कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी,”
– एनपीपीए
डीपीसीओ के नियमों के मुताबिक—
एमआरपी में 12 महीनों में 10% से ज़्यादा बढ़ोतरी नहीं हो सकती।
यदि कोई कंपनी तय सीमा से अधिक बढ़ोतरी करती है तो उसे न केवल वह राशि लौटानी होगी, बल्कि उस पर ब्याज और जुर्माना भी देना होगा।
एनपीपीए की अब तक की कार्रवाई
सितंबर 2024 तक 2,545 मामलों में दवा कंपनियों से ₹9,980.6 करोड़ की मांग की गई।
इनमें से ₹8,579.1 करोड़ बकाया है, और ₹6,076.4 करोड़ मुक़दमेबाज़ी में फंसा हुआ है।
एनपीपीए ने साफ कर दिया है कि वह आगे भी गैर-अनुसूचित दवाओं व चिकित्सा उपकरणों के एमआरपी की कड़ी निगरानी करेगा और नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई से पीछे नहीं हटेगा।