कैंसर की दवाओं पर FDA की सख्ती, पूरे उत्तराखंड में जांच के आदेश

कैंसर की दवाओं पर FDA की सख्ती, पूरे उत्तराखंड में जांच के आदेश

मेडिकल स्टोर से लेकर दवा बनाने वाली कंपनियों तक होगी जांच, एंटी-कैंसर दवाओं के सैंपल लेने के निर्देश

देहरादून/हरिद्वार। कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं को लेकर उत्तराखंड खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन ने सख्ती बढ़ा दी है। FDA के अपर आयुक्त ताजबर सिंह ने  प्रदेश के सभी वरिष्ठ औषधि निरीक्षकों और औषधि निरीक्षकों को विशेष जांच के निर्देश जारी किए हैं।

जारी पत्र में अधिकारियों को एंटी-कैंसर दवाओं के निर्माण और बिक्री से जुड़े प्रतिष्ठानों का विशेष रूप से निरीक्षण करने और दवाओं के सैंपल लेने के लिए कहा गया है। साथ ही दवाओं से जुड़े रिकॉर्ड की जांच करने और यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि बाजार में बिक रही एंटी-कैंसर दवाएं वास्तविक और प्रमाणित हों।

दवा की असलियत पर रहेगा खास जोर

FDA के आदेश में केवल दवा की बिक्री देखने की बात नहीं कही गई है, बल्कि एंटी-कैंसर दवाओं की प्रामाणिकता यानी दवा असली है या नहीं, इस पर भी विशेष ध्यान देने को कहा गया है।

निरीक्षण के दौरान अधिकारियों को संबंधित प्रतिष्ठान के रिकॉर्ड की जांच करनी होगी। दवा कहां से खरीदी गई, उसका रिकॉर्ड क्या है, स्टॉक कितना है और बिक्री से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध हैं या नहीं—इन पहलुओं की भी जांच की जा सकती है।

निर्माण से लेकर बिक्री तक जांच

इस अभियान का दायरा केवल मेडिकल स्टोर तक सीमित नहीं रहेगा। आदेश में एंटी-कैंसर दवाओं का निर्माण और बिक्री करने वाले प्रतिष्ठानों पर विशेष जोर दिया गया है।

इसका मतलब है कि जहां एंटी-कैंसर दवाओं का निर्माण हो रहा है और जहां इनकी बिक्री हो रही है, वहां औषधि निरीक्षकों को जांच करनी होगी।

सैंपल लेकर होगी जांच

FDA ने अधिकारियों को एंटी-कैंसर दवाओं के सैंपल लेने के भी निर्देश दिए हैं। सैंपल की जांच से दवा की गुणवत्ता और उसकी वास्तविकता से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।

यह कदम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाएं मरीज के उपचार का बेहद संवेदनशील हिस्सा होती हैं। ऐसी दवाओं की गुणवत्ता और असलियत में किसी तरह की गड़बड़ी मरीज के लिए गंभीर समस्या बन सकती है।

हरिद्वार में भी बढ़ सकती है निगरानी

प्रदेशभर में जारी इस निर्देश के बाद हरिद्वार जिले में भी एंटी-कैंसर दवाओं की बिक्री करने वाले मेडिकल स्टोर और संबंधित प्रतिष्ठान जांच के दायरे में आ सकते हैं। जिले में औषधि निरीक्षकों की ओर से ऐसे प्रतिष्ठानों के रिकॉर्ड और दवाओं के सैंपल की जांच महत्वपूर्ण होगी।

खास तौर पर यह देखना अहम होगा कि मेडिकल स्टोरों में एंटी-कैंसर दवाएं अधिकृत स्रोत से खरीदी जा रही हैं या नहीं और उनके खरीद-बिक्री के रिकॉर्ड पूरे हैं या नहीं।

रिपोर्ट शासन को भेजनी होगी

अपर आयुक्त के आदेश में निरीक्षण और सैंपलिंग के बाद इसकी रिपोर्ट कार्यालय में भेजने के निर्देश भी दिए गए हैं। यानी यह केवल सामान्य निरीक्षण का मामला नहीं है, बल्कि अधिकारियों से कार्रवाई की रिपोर्ट भी मांगी गई है।

अब सामने आएगी दवाओं की हकीकत

FDA के इस आदेश के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि प्रदेश में कितने प्रतिष्ठानों की जांच होती है, कितनी एंटी-कैंसर दवाओं के सैंपल लिए जाते हैं और जांच में क्या सामने आता है।

कैंसर जैसी गंभीर बीमारी में इस्तेमाल होने वाली दवाओं की गुणवत्ता और असलियत से कोई समझौता न हो, इसके लिए अब विभाग की जांच पर नजर रहेगी। अगर किसी प्रतिष्ठान में दवा की गुणवत्ता, स्रोत, रिकॉर्ड या प्रामाणिकता को लेकर गड़बड़ी मिलती है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई का रास्ता खुल सकता है।

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